हिमाचल पर मानसून का कहर: अगले 48 घंटे रहेंगे बेहद चुनौतीपूर्ण 224 ट्रांसफार्मर ठप,145 सड़कें बंद…
हिमाचल प्रदेश में मानसून अब राहत नहीं, बल्कि बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पहाड़ी राज्य के कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। सड़कें भूस्खलन की चपेट में हैं, बिजली व्यवस्था चरमरा गई है और पेयजल आपूर्ति भी कई क्षेत्रों में बाधित हो गई है। हालात ऐसे हैं कि प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों से बेहद सतर्क रहने की अपील की है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले 48 घंटे भी आसान नहीं होंगे, क्योंकि राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।
पिछले 24 घंटों के दौरान हुई तेज बारिश ने हिमाचल के कई जिलों में तबाही के हालात पैदा कर दिए। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, धर्मशाला में सबसे अधिक 79 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा जोगिंदरनगर में 76 मिलीमीटर, मंडी में 63.4 मिलीमीटर और राजधानी शिमला में 54.6 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ों से मलबा और चट्टानें गिरने की घटनाएं बढ़ गई हैं, जिससे सड़क संपर्क लगातार प्रभावित हो रहा है।
बारिश और भूस्खलन का सबसे बड़ा असर राज्य के सड़क नेटवर्क पर देखने को मिला है। शुक्रवार सुबह तक प्रदेश की 145 सड़कें यातायात के लिए बंद हो चुकी थीं। सबसे अधिक प्रभावित जिला मंडी है, जहां अकेले 66 सड़कें अवरुद्ध हैं। कुल्लू जिले में 31 और सिरमौर में 28 सड़कें बंद होने से कई गांवों और कस्बों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है। कई स्थानों पर लोग आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भी परेशान हैं।
केवल सड़कें ही नहीं, बल्कि बिजली व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। प्रदेशभर में 224 बिजली ट्रांसफार्मर खराब होने से हजारों घरों में अंधेरा छा गया है। इनमें सबसे अधिक 182 ट्रांसफार्मर मंडी जिले में ठप पड़े हैं। बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों को दैनिक जीवन के साथ-साथ संचार सेवाओं में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में मरम्मत दल लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में बड़ी बाधा बन रही है।

भारी वर्षा का असर पेयजल व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश की 14 पेयजल योजनाएं प्रभावित होने के कारण कई इलाकों में पानी की आपूर्ति बाधित हो गई है। प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए लोगों तक पानी पहुंचाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन दुर्गम क्षेत्रों में चुनौती और भी बड़ी बनी हुई है। स्थानीय लोगों को आवश्यकतानुसार पानी का सीमित उपयोग करने की सलाह भी दी गई है।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने अगले कुछ दिनों के लिए चिंता बढ़ाने वाला पूर्वानुमान जारी किया है। विभाग के अनुसार 10 और 11 अगस्त को हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। इसे देखते हुए कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश से भूस्खलन, अचानक बाढ़ और पहाड़ी ढलानों के खिसकने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
राज्य प्रशासन ने सभी जिला अधिकारियों, आपदा प्रबंधन टीमों और संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। मशीनों और राहत दलों को संवेदनशील इलाकों में पहले से तैनात किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
प्रशासन ने स्थानीय निवासियों के साथ-साथ हिमाचल घूमने आए पर्यटकों से भी अपील की है कि वे मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचें। विशेष रूप से नदी-नालों, झरनों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के आसपास जाने से परहेज करने की सलाह दी गई है। पर्वतीय मार्गों पर सफर करने वाले लोगों को यात्रा शुरू करने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी अवश्य लेने को कहा गया है।

हर वर्ष मानसून के दौरान हिमाचल प्रदेश को भूस्खलन और सड़क अवरोध जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार लगातार हो रही तेज बारिश ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है। प्रशासन राहत और बहाली के कार्यों में जुटा है, जबकि लोग जल्द मौसम साफ होने की उम्मीद कर रहे हैं। फिलहाल मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए आने वाले 48 घंटे पूरे राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ऐसे में सतर्कता, सावधानी और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन ही इस प्राकृतिक चुनौती से सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी उपाय है।





