देहरादून-मसूरी मार्ग पर फिर धंसी सड़क, कुठालगेट के पास 10 मीटर हिस्सा बैठा; बारिश ने बढ़ाई चिंता
देहरादून। मानसून की लगातार बारिश के बीच देहरादून-मसूरी मार्ग पर सड़क धंसने का सिलसिला एक बार फिर सामने आया है। मंगलवार दोपहर कुठालगेट के पास सड़क का करीब 10 मीटर लंबा हिस्सा अचानक धंस गया। सड़क के एक किनारे के बैठने की सूचना मिलते ही लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लेना शुरू किया।
फिलहाल देहरादून से मसूरी और मसूरी से देहरादून आने-जाने वाले वाहनों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है। हालांकि, सड़क के जिस हिस्से में धंसाव हुआ है, उसे देखते हुए विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। लगातार हो रही बारिश के कारण जमीन में नमी बढ़ने और सड़क के नीचे की मिट्टी कमजोर होने की स्थिति में आने वाले समय में धंसाव का दायरा बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

देहरादून-मसूरी मार्ग उत्तराखंड के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण पहाड़ी मार्गों में शामिल है। रोजाना बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, पर्यटक, टैक्सी और अन्य वाहन इस मार्ग से आवाजाही करते हैं। ऐसे में सड़क के बार-बार धंसने की घटनाएं यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं। कुठालगेट के पास मंगलवार को हुए ताजा धंसाव में सड़क का लगभग 10 मीटर हिस्सा प्रभावित हुआ है। प्रारंभिक तौर पर सड़क के किनारे का हिस्सा बैठने की बात सामने आई है। मौके पर पहुंची PWD की टीम ने धंसाव वाले स्थान का निरीक्षण किया और सड़क की स्थिति का आकलन शुरू किया।
अधिकारियों की प्राथमिकता फिलहाल यह पता लगाना है कि सड़क केवल ऊपरी सतह पर प्रभावित हुई है या इसके नीचे की संरचना में भी किसी तरह की कमजोरी आई है। यदि सड़क के नीचे की मिट्टी या आधार कमजोर पाया जाता है तो विभाग को तत्काल सुरक्षा और मरम्मत से जुड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।

कुठालगेट पर सड़क धंसने की यह घटना पहली नहीं है। इससे पहले भी लगातार बारिश के दौरान देहरादून-मसूरी मार्ग के कई हिस्सों में सड़क की स्थिति खराब हुई है। 20 जुलाई 2026 को कोल्हूखेत के पास पानीवाला बैंड क्षेत्र में सड़क का एक हिस्सा धंस गया था। इस दौरान सड़क पर बड़ी-बड़ी दरारें भी दिखाई दी थीं। स्थिति को गंभीर देखते हुए प्रशासन को कुछ समय के लिए मार्ग पर यातायात बंद करना पड़ा था। इसके बाद अगले दिन हल्के वाहनों के लिए रास्ता खोला गया, लेकिन क्षतिग्रस्त सड़क के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। एक तरफ से यातायात संचालित होने के चलते कई जगह जाम की स्थिति भी बनी थी।
बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों पर भूस्खलन, मिट्टी का कटाव और सड़क धंसने की घटनाएं आम हो जाती हैं। देहरादून-मसूरी मार्ग भी इससे अछूता नहीं है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ों से पानी का बहाव बढ़ने पर सड़क के किनारों की मिट्टी कमजोर पड़ सकती है, जिसका सीधा असर सड़क की मजबूती पर पड़ता है।
ताजा घटना के बाद फिलहाल मार्ग को बंद नहीं किया गया है और यातायात सामान्य रूप से संचालित हो रहा है। हालांकि, सड़क के प्रभावित हिस्से को देखते हुए वाहन चालकों से सावधानी बरतने की जरूरत है। विशेष रूप से बारिश के दौरान इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को गति नियंत्रित रखने और सड़क के किनारे से पर्याप्त दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। पहाड़ी मार्गों पर अचानक सड़क धंसने या मलबा आने की स्थिति में तेज गति हादसे का कारण बन सकती है।

PWD की टीम मौके पर स्थिति का निरीक्षण कर रही है। विभाग की ओर से सड़क की वास्तविक स्थिति और धंसाव के कारणों का विस्तृत आकलन किए जाने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। देहरादून-मसूरी मार्ग केवल स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। मसूरी में पर्यटन सीजन के दौरान इस सड़क पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ जाता है। ऐसे में सड़क के किसी भी हिस्से के क्षतिग्रस्त होने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा का मुद्दा भी गंभीर हो जाता है।
लगातार सामने आ रही सड़क धंसने की घटनाओं ने इस पूरे मार्ग की स्थायी मजबूती को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून के दौरान सड़क की संवेदनशील जगहों की लगातार निगरानी की जानी चाहिए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले जरूरी कदम उठाए जा सकें।
फिलहाल कुठालगेट के पास सड़क धंसने के बाद PWD की टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में बारिश जारी रहने की स्थिति में प्रभावित हिस्से की निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। यदि सड़क का धंसाव आगे बढ़ता है तो यातायात को नियंत्रित करने या वैकल्पिक व्यवस्था करने की जरूरत पड़ सकती है।
बारिश के इस दौर में देहरादून-मसूरी मार्ग पर लगातार सामने आ रही सड़क धंसने की घटनाएं पहाड़ी सड़कों की मजबूती और मानसून के दौरान उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर चेतावनी जरूर दे रही हैं।





