कभी टीम इंडिया में खेलने का सपना हो गया था चूर-चूर, अब बनाया भारत को एशिया कप चैंपियन पर्दे के पीछे का हीरो!
कभी भारतीय टीम की नीली जर्सी पहनने का सपना देखने वाला एक बल्लेबाज… जिसने घरेलू क्रिकेट में सालों तक रनों का अंबार लगाया… जिसने 11 हजार से ज्यादा फर्स्ट-क्लास रन बनाए और करीब 30 शतक जड़े, लेकिन फिर भी इंटरनेशनल क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला। कहानी यहीं खत्म हो सकती थी, लेकिन अमोल मजूमदार की कहानी हार मानने वालों की नहीं है।
जिस खिलाड़ी का टीम इंडिया के लिए खेलने का सपना अधूरा रह गया, उसी ने अब कोच के रूप में भारतीय महिला क्रिकेट टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। अमोल मजूमदार की कोचिंग में भारतीय महिला टीम ने पहले 2025 वनडे वर्ल्ड कप में इतिहास रचा और अब 2026 महिला एशिया कप का खिताब भी अपने नाम कर लिया। एक खिलाड़ी के अधूरे सपने ने आखिरकार कोच के रूप में एक बड़ी विरासत को जन्म दे दिया।
11 हजार से ज्यादा रन, फिर भी टीम इंडिया से रहे दूर
अमोल मजूमदार का घरेलू क्रिकेट करियर भारतीय क्रिकेट की उन कहानियों में शामिल है, जिन्हें अक्सर इंटरनेशनल क्रिकेट की चमक के पीछे भुला दिया जाता है। 1994 से 2013 के बीच मुंबई और असम के लिए खेलने वाले मजूमदार ने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 11,000 से अधिक रन बनाए।
उन्होंने लगातार रन बनाए, शतक लगाए और अपनी बल्लेबाजी से खुद को साबित किया। बावजूद इसके भारतीय पुरुष टीम में उस समय जगह बनाना बेहद मुश्किल था। टीम के मिडिल ऑर्डर में कई बड़े नाम मौजूद थे और इसी कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच मजूमदार का इंटरनेशनल डेब्यू का सपना अधूरा रह गया। सोचिए, जिस खिलाड़ी ने घरेलू क्रिकेट में इतने लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन किया हो, उसके लिए भारत की जर्सी पहनने का मौका न मिलना कितना बड़ा दर्द रहा होगा। लेकिन मजूमदार ने इस निराशा को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

जब बल्लेबाज नहीं बन पाया टीम इंडिया का हिस्सा, तो कोच बनकर बदल दी कहानी
अक्टूबर 2023 में जब बीसीसीआई ने अमोल मजूमदार को भारतीय महिला क्रिकेट टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया, तब उनके सामने एक नई चुनौती थी। अब उन्हें खुद बल्ला लेकर मैदान पर नहीं उतरना था, बल्कि मैदान पर उतरने वाली खिलाड़ियों को जीत के लिए तैयार करना था। उन्होंने अपने अनुभव, रणनीति और क्रिकेट की गहरी समझ को टीम के साथ साझा किया। धीरे-धीरे भारतीय महिला टीम के खेल में इसका असर दिखाई देने लगा।
मजूमदार की कोचिंग का सबसे बड़ा असर सिर्फ नतीजों में नहीं, बल्कि टीम के आत्मविश्वास और बड़े मुकाबलों में दबाव संभालने की क्षमता में भी नजर आया। वह पर्दे के सामने कम और पर्दे के पीछे ज्यादा दिखाई देते हैं, लेकिन टीम की सफलता में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।
वर्ल्ड कप के बाद अब एशिया कप की बादशाहत
साल 2025 भारतीय महिला क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक रहा। अपनी घरेलू सरजमीं पर खेले गए वनडे वर्ल्ड कप में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम को हराने के बाद फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को मात देकर भारत ने पहली बार महिला वनडे वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया। इस सफलता के पीछे खिलाड़ियों की मेहनत के साथ कोचिंग स्टाफ की रणनीति भी अहम रही और अमोल मजूमदार उस पूरी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा थे।लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी।
2026 महिला एशिया कप में भारतीय टीम ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम किया। दुबई में खेले गए फाइनल में भारत ने श्रीलंका को 72 रनों से हराकर खिताब अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने एशिया कप की ट्रॉफी पर आठवीं बार कब्जा जमाया। लगातार बड़ी उपलब्धियों ने अमोल मजूमदार को भारतीय महिला क्रिकेट के सबसे चर्चित कोचों में शामिल कर दिया है।

ट्रॉफी विवाद में भी टीम के साथ मजबूती से खड़े रहे
एशिया कप जीतने के बाद ट्रॉफी समारोह से जुड़ा विवाद भी चर्चा में रहा। भारतीय टीम ने एसीसी अध्यक्ष मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार किया। इस पूरे मामले में अमोल मजूमदार ने अपनी टीम के फैसले का खुलकर समर्थन किया।
उन्होंने साफ किया कि ट्रॉफी न लेने का फैसला बीसीसीआई का था और पूरी टीम इस फैसले के साथ खड़ी थी। उनके बयान से यह भी स्पष्ट हुआ कि उनके लिए ट्रॉफी से ज्यादा महत्वपूर्ण टीम की एकजुटता और मैदान पर हासिल की गई जीत है।
अधूरा सपना बना सबसे बड़ी ताकत
अमोल मजूमदार की कहानी सिर्फ क्रिकेट की कहानी नहीं है। यह उस खिलाड़ी की कहानी है जिसने अपने करियर में वह मुकाम नहीं पाया, जिसका उसने सपना देखा था। लेकिन उसने अपनी असफलता को अपनी पहचान नहीं बनने दिया।
जिस हाथ में कभी टीम इंडिया की जर्सी नहीं आई, उसी अनुभव ने आज उन्हें ऐसी टीम तैयार करने में मदद की है जो दुनिया और एशिया दोनों में अपना परचम लहरा रही है। कभी वह खिलाड़ी थे जो टीम इंडिया में जगह पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। आज वह उस टीम के पीछे खड़े हैं जो इतिहास रच रही है।
शायद यही अमोल मजूमदार की सबसे बड़ी जीत है—उन्होंने खुद भारत के लिए नहीं खेला, लेकिन अब वह भारत को जिताने वाली टीम तैयार कर रहे हैं।






