भारत-वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा, सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन पर बनी सहमति; व्यापार और कनेक्टिविटी पर भी जोर
भारत और वियतनाम ने अपने आपसी संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाया है। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने और सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं पर सहमति जताई है। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने व्यापार, सप्लाई चेन, बाजार तक पहुंच और कनेक्टिविटी समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की।
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब भारत और वियतनाम के बीच संबंध लगातार व्यापक होते जा रहे हैं। दोनों देश पहले से ही रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग करते रहे हैं, लेकिन अब फोकस केवल सैन्य प्रशिक्षण और संवाद तक सीमित न रहकर रक्षा उत्पादन और औद्योगिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन पर जोर
भारत और वियतनाम के बीच हालिया बातचीत में रक्षा क्षेत्र सबसे प्रमुख विषयों में रहा। दोनों देशों ने सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन के जरिए रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई।
रक्षा क्षेत्र में इस तरह का सहयोग दोनों देशों के लिए तकनीक, उत्पादन क्षमता और औद्योगिक भागीदारी के नए रास्ते खोल सकता है। भारत पहले से ही रक्षा क्षेत्र में घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहा है, जबकि वियतनाम भी अपनी रक्षा क्षमताओं और औद्योगिक आधार को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
भारत और वियतनाम के बीच रक्षा संबंधों की संस्थागत नींव काफी पुरानी है। दोनों देशों के बीच 2009 में रक्षा सहयोग समझौता हुआ था और 2015 में रक्षा सहयोग के लिए संयुक्त विजन दस्तावेज तैयार किया गया। 2022 में दोनों देशों ने 2030 तक रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए Joint Vision Statement पर भी सहमति जताई थी।

व्यापार और सप्लाई चेन पर भी हुई बातचीत
रक्षा के साथ-साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर भी दोनों देशों ने जोर दिया। भारत और वियतनाम ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए सप्लाई चेन मजबूत करने और बाजार तक पहुंच आसान बनाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और विस्तार देने की कोशिश ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक स्तर पर कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को ज्यादा विविध बनाने पर ध्यान दे रही हैं। भारत और वियतनाम के बीच औद्योगिक सहयोग बढ़ने से दोनों देशों की कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं।
एयर कनेक्टिविटी और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी सहयोग
बैठक में सहयोग का दायरा केवल रक्षा और व्यापार तक सीमित नहीं रहा। दोनों देशों ने एयर कनेक्टिविटी, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की।
कनेक्टिविटी दोनों देशों के बीच लोगों और कारोबार की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है। बेहतर हवाई संपर्क से पर्यटन, व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे तकनीकी क्षेत्र दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक सहयोग के नए क्षेत्र बन सकते हैं।

समुद्री सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दा
भारत और वियतनाम दोनों ही समुद्री क्षेत्र में सक्रिय देश हैं और दोनों के लिए समुद्री सुरक्षा महत्वपूर्ण विषय है। हालिया बातचीत में क्षेत्रीय सहयोग और Maritime Security से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान दिया गया।
भारत के लिए वियतनाम दक्षिण-पूर्व एशिया में एक महत्वपूर्ण साझेदार है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सितंबर में कहा कि वियतनाम भारत की Act East Policy, Vision MAHASAGAR और Indo-Pacific दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण साझेदार है। यह बयान दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक संबंधों की दिशा को भी दर्शाता है।
भारत-वियतनाम संबंधों में क्यों अहम है यह कदम?
भारत और वियतनाम के संबंध अब कई अलग-अलग क्षेत्रों तक फैल चुके हैं। रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, शिक्षा, तकनीक और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच नियमित संवाद होता रहा है।
रक्षा उत्पादन में संयुक्त सहयोग की दिशा में आगे बढ़ना इस साझेदारी का एक नया औद्योगिक आयाम हो सकता है। भारत पहले से रक्षा उत्पादन और निर्यात बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। वियतनाम के साथ सहयोग से भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजार में संभावनाएं बन सकती हैं, हालांकि वास्तविक परिणाम भविष्य में होने वाले समझौतों और परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।
भारत ने पहले भी वियतनाम को रक्षा क्षेत्र में सहयोग दिया है। 2023 में भारत ने स्वदेश निर्मित INS Kirpan वियतनाम को सौंपा था। इसके अलावा दोनों देशों के बीच प्रशिक्षण, सैन्य संवाद और समुद्री सहयोग भी जारी रहा है।

आगे क्या?
हालिया बातचीत के बाद अब दोनों देशों के बीच सहयोग को जमीन पर उतारने की दिशा में आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। संयुक्त रक्षा उत्पादन, व्यापारिक सप्लाई चेन, एयर कनेक्टिविटी और तकनीकी क्षेत्रों में अगर ठोस परियोजनाएं आगे बढ़ती हैं, तो भारत-वियतनाम संबंधों का दायरा और व्यापक हो सकता है।
फिलहाल दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ व्यापार, कनेक्टिविटी, अंतरिक्ष और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने का स्पष्ट संकेत दिया है। आने वाले समय में इन चर्चाओं से जुड़े नए समझौते और परियोजनाएं इस साझेदारी की अगली दिशा तय कर सकती हैं।






