उत्तराखंड: धामी सरकार ने PWD को खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत के लिए दो दिन का अल्टीमेटम दिया।
देहरादून: उत्तराखंड में मानसून के बाद सड़कों की मरम्मत की निर्धारित समयसीमा समाप्त हो गई है, लेकिन कई मार्गों पर गड्ढे अभी भी मौजूद हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने PWD को सड़क सुधार कार्यों में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए हैं, जिसके बाद विभाग को अधूरे कार्य पूरे करने के लिए दो दिन का अतिरिक्त समय मिला है। जानकारी के अनुसार, राज्य में 1,862 किलोमीटर सड़कें खराब स्थिति में हैं, हालांकि इस आंकड़े और नई समयसीमा की आधिकारिक पुष्टि अभी होनी बाकी है। पहाड़ी प्रदेश उत्तराखंड में सड़कों की खराब स्थिति का असर आवागमन के साथ-साथ पर्यटन, ग्रामीण संपर्क, स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय व्यापार पर भी पड़ता है।

15 अक्टूबर की समयसीमा के बाद भी काम अधूरा है
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा मानसून में क्षतिग्रस्त सड़कों को 15 अक्टूबर तक गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसके लिए विभागों को मरम्मत कार्य तेज करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, समयसीमा समाप्त होने के बाद भी कई स्थानों पर पैचवर्क अधूरा रहा। अमर उजाला की 16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 14 अक्टूबर तक 9,389 किलोमीटर प्रभावित सड़कों में से केवल 7,281 किलोमीटर पर ही पैचवर्क हो पाया था, जिससे हजारों किलोमीटर सड़क पर मरम्मत का काम बाकी था। यह स्थिति दर्शाती है कि सड़कों को दुरुस्त करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अभी और प्रयासों की आवश्यकता है।
पीडब्ल्यूडी समेत कई विभागों के लिए चुनौती
उत्तराखंड में सड़कों की मरम्मत का काम विभिन्न विभागों और एजेंसियों, जैसे लोक निर्माण विभाग (PWD), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY), राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग और सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा किया जाता है। PWD ने अपने पैचवर्क का 94% से अधिक काम पूरा कर लिया है, जबकि PMGSY के तहत 3,389 किलोमीटर में से केवल 1,703 किलोमीटर सड़क की मरम्मत ही 14 अक्टूबर तक हो पाई थी। ग्रामीण सड़कों की मरम्मत में देरी से दूरदराज के गांवों में बाजार, स्कूल और अस्पतालों तक पहुँचने में कठिनाई हो रही है।

गड्ढों से दुर्घटना का खतरा बढ़ता है
सड़क पर बने गड्ढे वाहन चालकों के लिए, खासकर दुपहिया वाहन चालकों के लिए, गंभीर परेशानी का कारण बनते हैं, जिससे संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। रात या बारिश में इनका अंदाजा लगाना और भी कठिन हो जाता है। पहाड़ी क्षेत्रों में, जहाँ सड़कें पहले से ही संकरी, घुमावदार और ढलानदार होती हैं, खराब सड़कें चुनौती को और बढ़ा देती हैं। ऐसे में, समय पर मरम्मत और सुरक्षा संकेतक अत्यंत आवश्यक हैं। केवल गड्ढे भरना ही काफी नहीं है, बल्कि मरम्मत की गुणवत्ता, उचित जल निकासी और सड़क की मज़बूती पर भी ध्यान देना होगा, ताकि समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद क्या होगा?
सरकार अधूरे सड़क मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा कर सड़कों की स्थिति में सुधार लाना चाहती है। दो दिन की अतिरिक्त मोहलत संबंधी जानकारी की आधिकारिक पुष्टि होने पर यह स्पष्ट होगा कि किन विभागों को कितने समय में काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों को केवल रिपोर्ट पर निर्भर न रहकर, मौके पर जाकर मरम्मत की गुणवत्ता जांचनी चाहिए और क्षतिग्रस्त सड़कों पर प्राथमिकता से काम करना चाहिए।
आम जनता किस बात का इंतज़ार कर रही है?
प्रदेशवासियों को उम्मीद है कि सड़कों की मरम्मत से दुर्घटनाएं कम होंगी, यात्रा का समय बचेगा और ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी सुधरेगी।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में मानसून के बाद सड़कों की मरम्मत तय समय पर न हो पाना एक बड़ी चुनौती है। सरकार को अब अधूरे कामों को शीघ्र पूरा करने के साथ उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी, तभी लोगों को खराब सड़कों और गड्ढों से राहत मिल पाएगी।






