तराई इलाकों में बेमौसम बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता, धान की फसल को भारी नुकसान, खेतों में भरा पानी
तराई इलाकों में बेमौसम बारिश : उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में सितम्बर में लगातार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रुद्रपुर, किच्छा और आसपास के इलाकों में कई खेतों में पानी भर गया है, जबकि तैयार होने की कगार पर पहुंची धान की फसल तेज हवा और बारिश के कारण खेतों में गिर गई है। फसल में जलभराव से किसानों को अब सड़न और दाने की गुणवत्ता खराब होने का डर सताने लगा है।
तीन दिन की बारिश से खेत जलमग्न(तराई इलाकों में बेमौसम बारिश )
कई बार आ चुका है रेड अलर्ट : क्षेत्र में पिछले दिनों लगातार हुई बारिश ने धान की खेती पर असर डाला है। कई इलाकों में खेतों से पानी की निकासी नहीं हो पाने के कारण धान की खड़ी फसल पानी में डूब गई है। रुद्रपुर और किच्छा क्षेत्र में किसानों ने फसल को हुए नुकसान की जानकारी दी है।
रुद्रपुर के फुलसुंगी गांव में एक किसान के खेतों में करीब चार फीट तक पानी जमा होने की बात सामने आई है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द पानी नहीं निकला तो तैयार धान की फसल के सड़ने का खतरा बढ़ सकता है।(तराई इलाकों में बेमौसम बारिश )
तैयार फसल सबसे ज्यादा खराब
इस समय धान की कई किस्में पकने की अवस्था में हैं और किसान कटाई की तैयारी कर रहे थे। ऐसे में लगातार बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में पानी भरने के साथ तेज हवाओं के कारण लंबे तने वाली धान की फसल जमीन पर गिर गई है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पकने के करीब पहुंच चुकी धान की फसल लंबे समय तक पानी में रहने पर दानों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। कुछ शुरुआती किस्मों में नुकसान की आशंका अधिक बताई गई है। वहीं, तेज हवा से फसल के गिरने पर उपज में भी कमी आ सकती है।(तराई इलाकों में बेमौसम बारिश)
किसानो को हो रही बेहद परेशानी
धान की फसल को बारिश की जरूरत होती है, लेकिन कटाई के समय लगातार जलभराव नुकसानदायक साबित हो सकता है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से पौधों और बालियों पर असर पड़ सकता है। दानों का रंग और गुणवत्ता खराब होने के साथ कुछ मामलों में अंकुरण या सड़न की समस्या भी पैदा हो सकती है।
किसानों का कहना है कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ और खेतों से पानी नहीं निकला तो नुकसान और बढ़ सकता है। बारिश के कारण कटाई का काम भी प्रभावित हुआ है।( तराई इलाकों में बेमौसम बारिश )
20 से 25 प्रतिशत तक नुकसान
रुद्रपुर और किच्छा क्षेत्र में किसानों की ओर से अलग-अलग स्तर पर फसल नुकसान की जानकारी सामने आई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ किसानों ने करीब 25 प्रतिशत तक नुकसान की बात कही है। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ वीपी सिंह ने भी बताया कि हवा और पानी से गिरी लंबी तने वाली महीन दाने की किस्मों में 20 से 25 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। देर से पकने वाली फसलों में बारिश के कारण परागण प्रभावित होने से पैदावार में 5 से 10 प्रतिशत तक कमी की आशंका भी जताई गई है।(तराई इलाकों में बेमौसम बारिश )
हालांकि वास्तविक नुकसान का आंकड़ा खेत-खेत सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

मुआवजे और सर्वे दोनों की मांग
फसल को नुकसान पहुंचने के बाद किसानों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों का जल्द सर्वे कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि धान की खेती में उनकी पूरी लागत और महीनों की मेहनत लगी है। ऐसे में प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार की ओर से राहत मिलना जरूरी है।(तराई इलाकों में बेमौसम बारिश )
किसानों की मांग है कि राजस्व और कृषि विभाग की टीमें गांवों में पहुंचकर फसल नुकसान का आकलन करें और पात्र किसानों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जाए।
अब मौसम साफ़ होने का इंतज़ार
तराई के किसानों की नजर अब मौसम पर टिकी है। यदि बारिश थमती है और धूप निकलती है तो खेतों से पानी निकालकर कुछ फसल को बचाने की संभावना बनी रह सकती है। लेकिन जिन खेतों में लंबे समय तक जलभराव रहेगा, वहां नुकसान बढ़ने की आशंका है।(तराई इलाकों में बेमौसम बारिश )
धान की कटाई के महत्वपूर्ण समय पर हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब फसल को बचाने के साथ-साथ नुकसान का सही आकलन और समय पर राहत किसानों के लिए सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।(तराई इलाकों में बेमौसम बारिश )





