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टिहरी में ऑनलाइन नक्शे से छेड़छाड़ का मामला, जांच के घेरे में सहायक अभियंता; सीएम ऑफिस की जांच के बाद नोटिस

देहरादून: उत्तराखंड में भ्रष्टाचार और सरकारी प्रक्रियाओं में अनियमितता के खिलाफ कार्रवाई के बीच टिहरी जिला विकास प्राधिकरण से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यावसायिक भवन के लिए स्वीकृत मानचित्र को ऑनलाइन पोर्टल पर बदलकर उसकी जगह दूसरा नक्शा अपलोड किया गया। शिकायत मिलने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर से कराई गई गोपनीय जांच में प्रक्रिया से जुड़ी कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है।

जांच के बाद टिहरी जिला विकास प्राधिकरण के सहायक अभियंता पंकज भट्ट को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दिनेश प्रताप सिंह ने उनसे निर्धारित समय के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है। मामले में भवन स्वामी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

स्वीकृत नक्शे की जगह अपलोड हुआ दूसरा मानचित्र मामला एक व्यावसायिक भवन के नक्शे से संबंधित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार भवन का मानचित्र 6 अप्रैल को स्वीकृत किया गया था। इसके बाद 30 जून को ऑनलाइन पोर्टल पर उसी स्वीकृत नक्शे के स्थान पर एक अलग मानचित्र अपलोड पाया गया।

शिकायत के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले की गोपनीय जांच कराई। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर प्राधिकरण स्तर पर संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस घटनाक्रम ने ऑनलाइन भवन मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए हैं।

बिना अनुमति प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आरोप जारी नोटिस में केवल नक्शे में बदलाव का ही उल्लेख नहीं है। इसमें यह भी कहा गया है कि सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया और दस्तावेज तैयार किए गए।

प्राधिकरण ने इसे अधिकार क्षेत्र के उल्लंघन और पद के दुरुपयोग से जुड़ा मामला माना है। नोटिस में स्वीकृत दस्तावेज में कथित बदलाव और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए जाने को गंभीर विषय बताया गया है।

हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी का अंतिम पक्ष और जांच की पूरी प्रक्रिया सामने आना अभी बाकी है। कारण बताओ नोटिस विभागीय कार्रवाई की प्रारंभिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

मूल स्वीकृत नक्शे पर भी उठे सवाल इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। जिस नक्शे को 6 अप्रैल को स्वीकृति मिली थी, उसमें भी भवन उपविधि, 2011 के संशोधित प्रावधानों के अनुरूप होने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

विशेष रूप से स्टिल्ट पार्किंग और बेसमेंट से जुड़े प्रावधानों के अनुपालन पर आपत्ति दर्ज की गई है। यानी जांच का दायरा केवल ऑनलाइन पोर्टल पर नक्शा बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि मूल रूप से स्वीकृत मानचित्र की वैधता और नियमों के अनुपालन की भी पड़ताल की जा रही है।

तीन दिन में जवाब, नहीं तो विभागीय कार्रवाई प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी नोटिस में सहायक अभियंता को तीन दिन के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस के मुताबिक यदि तय समय में जवाब नहीं दिया जाता या प्रस्तुत स्पष्टीकरण अभिलेखीय साक्ष्यों से मेल नहीं खाता, तो उत्तराखंड सरकारी सेवा नियमावली के तहत अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जा सकती है।

इस मामले में आगे की कार्रवाई जांच और अधिकारी के जवाब के आधार पर तय होगी।

भ्रष्टाचार की शिकायतों पर सरकार की निगरानी टिहरी का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब उत्तराखंड सरकार सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई की बात कर रही है। राज्य में भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों के लिए 1064 और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1905 जैसे माध्यम उपलब्ध हैं।

टिहरी प्राधिकरण से जुड़े इस प्रकरण ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि ऑनलाइन स्वीकृति प्रणाली में दर्ज सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा और उनमें होने वाले संभावित बदलावों की निगरानी किस तरह की जा रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि संबंधित अधिकारी के जवाब और आगे की जांच के बाद प्राधिकरण इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।

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