दिल्ली-NCR में मानसून विदा होने के बाद भी क्यों बरस रहे बादल? जानें अक्टूबर की बारिश की वजह ?
नई दिल्ली: अक्टूबर का महीना आते ही आमतौर पर दिल्ली-NCR में बारिश की संभावना कम होने लगती है। लोग गर्मी से राहत के बाद हल्की ठंड और साफ आसमान की उम्मीद करते हैं। लेकिन इस बार मौसम ने अलग ही रंग दिखाया है। सोमवार, 12 अक्टूबर की सुबह दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के कई इलाकों में तेज बारिश और गरज-चमक से मौसम अचानक बदल गया। कहीं सड़कों पर पानी भर गया, तो कहीं तेज हवाओं के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मानसून की विदाई हो चुकी है, तो फिर अक्टूबर में बारिश क्यों हो रही है?
मौसम में आए इस बदलाव के पीछे मुख्य वजह पश्चिमी विक्षोभ और वातावरण में मौजूद नमी का मेल बताया जा रहा है। मौसम विज्ञान के अनुसार, मानसून के लौटने के बाद भी दूसरे मौसमी सिस्टम सक्रिय हो सकते हैं। इनके प्रभाव से बादल बनते हैं और कई बार तेज बारिश तथा गरज-चमक की स्थिति पैदा हो जाती है।
अक्टूबर में बारिश क्यों हो रही है?
अक्टूबर में बारिश होने की एक बड़ी वजह पश्चिमी विक्षोभ है। यह ऐसा मौसमी सिस्टम है, जो आमतौर पर पश्चिमी दिशा से आगे बढ़ते हुए उत्तर भारत के मौसम को प्रभावित करता है। इसके असर से पहाड़ी राज्यों के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी बादल छा सकते हैं।

जब इस सिस्टम के प्रभाव से वातावरण में मौजूद नमी ऊपर उठती है, तो बादलों का निर्माण होता है। वातावरण अस्थिर होने पर गरज-चमक के साथ बारिश भी हो सकती है। दिल्ली-NCR में हालिया बारिश को भी मानसून की वापसी के बजाय मानसून के बाद सक्रिय हुए मौसमी सिस्टम से जोड़कर देखा जा रहा है।
पश्चिमी विक्षोभ कैसे बदलता है दिल्ली का मौसम?
पश्चिमी विक्षोभ का असर केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं रहता। यह उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी मौसम बदल सकता है। इसके साथ जब नमी वाली हवाएं और वातावरण में मौजूद अन्य मौसमी परिस्थितियां अनुकूल हो जाती हैं, तो बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
दिल्ली-NCR में मौसम बदलने की प्रक्रिया को समझने के लिए आसपास के राज्यों की परिस्थितियों को भी देखना जरूरी है। पश्चिमी विक्षोभ, हवा की दिशा, नमी और वायुमंडलीय दबाव में बदलाव मिलकर बादलों के विकास में भूमिका निभा सकते हैं। यही वजह है कि कभी किसी इलाके में हल्की बूंदाबांदी होती है, तो कुछ किलोमीटर दूर तेज बारिश देखने को मिलती है।

इस तरह की बारिश हर बार मानसून की वापसी का संकेत नहीं होती। कई बार यह कुछ समय के लिए सक्रिय हुए मौसमी सिस्टम का असर होती है।
मानसून की विदाई के बाद भी क्यों नहीं थमती बारिश?
मानसून की विदाई को मौसम के एक चरण के खत्म होने के रूप में समझना चाहिए, न कि बारिश पर पूरी तरह विराम लगने के तौर पर। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग मानसून की वापसी तय करते समय बारिश की गतिविधियों में कमी, वातावरण में नमी घटने और हवा के परिसंचरण में बदलाव जैसे संकेतों को देखता है। इसलिए मानसून की वापसी के बाद भी कोई नया मौसमी सिस्टम बारिश करा सकता है।
दिल्ली में सितंबर के आखिर से अक्टूबर तक मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। दिन में गर्मी महसूस हो सकती है, जबकि बादल छाने और बारिश होने पर तापमान में गिरावट आ जाती है। यही बदलाव लोगों को मौसम के सामान्य पैटर्न से अलग अनुभव कराता है।
दिल्ली का मौसम: बारिश से तापमान और जनजीवन पर असर
12 अक्टूबर की सुबह हुई बारिश के बाद दिल्ली-NCR के मौसम में ठंडक महसूस हुई। तेज बारिश के कारण कुछ स्थानों पर जलभराव, यातायात की धीमी रफ्तार और दृश्यता घटने जैसी समस्याएं भी सामने आईं। मौसम विभाग ने दिल्ली और उत्तर भारत के कई हिस्सों के लिए बारिश तथा गरज-चमक को लेकर चेतावनी जारी की थी।

बारिश से जहां गर्मी से अस्थायी राहत मिल सकती है, वहीं रोजाना यात्रा करने वाले लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खासकर सुबह और शाम के समय दफ्तर जाने वालों, दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
क्या आने वाले दिनों में भी बारिश होगी?
मौसम की स्थिति में बदलाव होने पर बारिश की अवधि और तीव्रता भी बदल सकती है। 12 अक्टूबर को सामने आई मौसम संबंधी रिपोर्टों में अगले कुछ समय तक दिल्ली-NCR और उत्तर भारत के कुछ इलाकों में बारिश तथा गरज-चमक की संभावना जताई गई थी। हालांकि, बारिश कब और किस क्षेत्र में होगी, इसकी सटीक जानकारी के लिए मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान को देखना जरूरी है।
लोगों को सलाह है कि घर से निकलने से पहले मौसम का अपडेट देख लें। तेज बारिश के दौरान जलभराव वाली सड़कों से बचें, वाहन सावधानी से चलाएं और बिजली चमकने के समय खुले मैदान या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।
दिल्ली-NCR में बदले मौसम का क्या है असली संकेत?
अक्टूबर में हो रही बारिश को केवल मानसून से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। पश्चिमी विक्षोभ, नमी और वातावरण में अस्थिरता जैसे कारक मानसून के बाद भी मौसम को प्रभावित कर सकते हैं। दिल्ली-NCR में हुई हालिया बारिश इसी बात की याद दिलाती है कि मानसून की विदाई के बाद भी मौसम पूरी तरह स्थिर नहीं हो जाता।
फिलहाल दिल्ली का मौसम कैसा रहेगा, यह सक्रिय मौसमी सिस्टम और मौसम विभाग के अगले पूर्वानुमान पर निर्भर करेगा। इसलिए बारिश के बाद ठंड बढ़ने या मौसम पूरी तरह साफ होने का अनुमान लगाने के बजाय ताजा आधिकारिक अपडेट पर नजर रखना बेहतर है।





