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संघर्ष से समृद्धि तक का एक ऐतिहासिक सफर: डॉ. जगदीश पाण्डेय

उतराखंड की असली ताकत केवल उसके हिमालय, नदियाँ और प्राकृतिक सौंदर्य नहीं है बल्कि वे लोग भी है हिमालय जिन्होंन अपने कर्मों से समाज में बदलाव की नई इबारत लिखी। ऐसे ही प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं डॉ. जगदीश पाण्डेय, जिन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बनाकर हजारों बच्चों के जीवन में नई उम्मीद जगाई ।

8 अप्रैल 1971 को बागेश्वर जनपद के कठायतबाड़ा गाँव में जन्मे डॉ. पाण्डेय ने बचपन से ही पहाड़ की शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को करीब से देखा। गुणवत्तापूर्ण विद्यालयों की कमी, लंबी दूरी तय कर पढ़ाई करना और बेहतर शिक्षा के लिए परिवारों का पलायन – इन समस्याओं ने उनके मन में बदलाव का संकल्प पैदा किया। उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली जाने के बाद उनका विश्वास और मजबूत हुआ कि यदि अच्छी शिक्षा पहाड़ तक पहुँच जाए, तो पलायन जैसी बड़ी समस्या पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

इसी सोच को साकार करने के लिए वर्ष 2003 में उन्होंने कंट्रीवाइड वेलफेयर एंड एजुकेशन सोसायटी की स्थापना की और बागेश्वर में पहले कंट्रीवाइड पब्लिक स्कूल की शुरुआत की। यह केवल एक विद्यालय नहीं था, बल्कि ग्रामीण उत्तराखंड में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की नई शुरुआत थी । समय के साथ यह प्रयास एक व्यापक अभियान बन गया और गरुड़, कपकोट, सोमेश्वर, कांडा, कठपुरियाछीना, मंडलसेरा तथा चौरा सहित कई क्षेत्रों में विद्यालय स्थापित किए गए।

आज यह संस्थान उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में 9 सीबीएसई से संबद्ध अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों का सफल संचालन कर रहा है, जहाँ 7,000 से अधिक विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इतना ही नहीं, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के 1,200 से अधिक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और निःशुल्क शिक्षा प्रदान कर उनके भविष्य को नई दिशा दी गई है।

डॉ. पाण्डेय का मानना है कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब वह समाज को आत्मनिर्भर भी बनाए । इसी सोच के साथ उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी प्राथमिकता दी। उनके विभिन्न संस्थानों और उपक्रमों ने सैकड़ों युवाओं, शिक्षकों और कर्मचारियों को अपने ही प्रदेश में सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराया, जिससे पलायन की समस्या को कम करने में सकारात्मक सहयोग मिला।

उनके विद्यालयों की सबसे बड़ी विशेषता आधुनिक और मूल्यपरक शिक्षा काँ संतुलित समन्वय है। स्मार्ट क्लास, विज्ञान प्रयोगशालाएँ, डिजिटल लर्निंग, खेलकूद, योग, व्यक्तित्व विकास, करियर काउंसलिंग और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार किया जाता है। उनका उद्देश्य ऐसे युवा तैयार करना है जो ज्ञानवान होने के साथ-साथ संस्कारवान और आत्मविश्वासी भी हों।

डॉ. जगदीश पाण्डेय के प्रयासों का प्रभाव आज दूर-दराज के गाँवों में स्पष्ट दिखाई देता है। अब अनेक परिवारों को अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ता। बच्चे अपने परिवार, संस्कृति और पहाड़ की जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इससे न केवल आर्थिक बोझ कम हुआ है, बल्कि ग्रामीण समाज में आत्मविश्वास और विकास की नई सोच भी विकसित

शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। एजुकेशन एक्सीलेंस अवॉर्ड, नेल्सन मंडेला ग्लोबल ब्रिलियंस अवॉर्ड, उत्तराखंड हिमालय रत्न सम्मान और इंटरनेशनल एजुकेशन अवॉर्ड जैसे प्रतिष्ठित सम्मान उनके उल्लेखनीय कार्यों की पहचान हैं।

डॉ. जगदीश पाण्डेय का जीवन इस बात का सशक्त उदाहरण है कि यदि उददेश्य स्पष्ट हो और संकल्प अटल हो, तो सीमित संसाधन भी बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं। उन्होंने शिक्षा को केवल ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, रोजगार और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की नींव रखी है।

आज जब उत्तराखंड विकास और आत्मनिर्भरता की नई राह पर आगे बढ़ रहा है, तब डॉ. जगदीश पाण्डेय का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ है। उन्होंने केवल विद्यालयों का निर्माण नहीं किया, बल्कि हजारों सपनों को उड़ान देकर यह साबित किया कि शिक्षा ही किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति है।

इसी सोच के साथ डॉ. जगदीश पाण्डेय ने शिक्षा को केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का सशक्त आधार बनाया। पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच को मजबूत करने के उनके प्रयासों ने अनेक परिवारों को नई उम्मीद दी। उन्होंने युवाओं को अपने सपनों को साकार करने, आत्मनिर्भर बनने और अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनका मानना हैं, कि जब एक बच्चा शिक्षित होता है, तो उसके साथ पूरा परिवार और समाज आगे बढ़ता है। आज उनके प्रयास उत्तराखंड के सामाजिक और शैक्षिक विकास की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुके हैं।

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