आरबीआई के नए नियम: अब सोना-चांदी पर कर्ज लेना होगा और आसान
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों और बैंकों की सुविधा के लिए सात नए नियम जारी किए हैं। ये नियम 1 अक्तूबर 2025 से लागू होंगे। नए प्रावधानों के साथ-साथ चार मसौदा दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं, जिन पर लोग 20 अक्तूबर तक अपने सुझाव दे सकते हैं। इन बदलावों का सीधा असर आम लोगों, ज्वैलर्स और उन उद्योगों पर पड़ेगा जो सोने-चांदी का इस्तेमाल करते हैं।

1. फ्लोटिंग रेट लोन में बदलाव
अभी तक बैंक केवल तीन साल बाद ही फ्लोटिंग रेट लोन पर स्प्रेड (ब्याज दर का अंतर) बदल सकते थे। अब आरबीआई ने यह नियम ढीला कर दिया है। इसका मतलब है कि ग्राहकों के हित में बैंक इसे पहले भी घटा सकते हैं। साथ ही, EMI आधारित पर्सनल लोन में रीसेट के समय फिक्स्ड रेट चुनने का विकल्प अब जरूरी नहीं होगा, बल्कि यह बैंक के विवेक पर रहेगा। इससे कर्जदारों को ब्याज दर में राहत मिलने की संभावना है।
2. सोने-चांदी के बदले कर्ज
पहले केवल ज्वैलर्स ही गोल्ड लोन लेने के पात्र थे। लेकिन अब नए नियमों के अनुसार वे उद्योग भी इसके लिए आवेदन कर सकेंगे जो सोने को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा, टियर-3 और टियर-4 स्तर के शहरी सहकारी बैंक भी सोना और चांदी के बदले कर्ज दे पाएंगे। इससे छोटे शहरों और कस्बों के लोगों को भी आसानी से सुविधा मिलेगी।
3. पूंजी नियमन में सुधार
बेसल-III कैपिटल रेगुलेशन से जुड़े नियमों को और स्पष्ट किया गया है। खासतौर पर परपेचुअल डेट इंस्ट्रूमेंट्स और विदेशी मुद्रा या रुपये में जारी बांड पर प्रावधान तय किए गए हैं। यह नियम केवल अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों पर लागू होंगे, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को इससे बाहर रखा गया है।
4. मसौदा दिशानिर्देश
आरबीआई ने चार नए मसौदा दिशानिर्देश भी जारी किए हैं:
गोल्ड मेटल लोन (GML): ज्वैलर्स के लिए पुनर्भुगतान अवधि 180 दिन से बढ़ाकर 270 दिन की जाएगी। साथ ही वे गैर-निर्माता भी पात्र होंगे जो आभूषण का उत्पादन आउटसोर्स करते हैं।
लार्ज एक्सपोजर फ्रेमवर्क (LEF) और इंट्राग्रुप ट्रांजैक्शंस एंड एक्सपोजर्स (ITE): विदेशी बैंकों की शाखाओं और उनके मुख्यालय के बीच लेनदेन को स्पष्ट किया गया है। साथ ही ITE की सीमा टियर-1 कैपिटल से जोड़ी गई है।

क्रेडिट इन्फॉर्मेशन रिपोर्टिंग: अब बैंकों को पखवाड़े में नहीं, बल्कि हर सप्ताह डेटा जमा करना होगा। इसके अलावा उपभोक्ता रिकॉर्ड में CKYC नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा और गलती सुधारने की प्रक्रिया तेज करनी होगी।
आरबीआई के ये नए नियम बैंकों के कामकाज को पारदर्शी बनाने और ग्राहकों को ज्यादा सुविधाएं देने के लिए लाए गए हैं। खासकर गोल्ड और सिल्वर लोन के प्रावधान छोटे उद्योगों और सामान्य लोगों के लिए फायदेमंद साबित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से बैंकिंग सेक्टर मजबूत होगा और ग्राहकों को कर्ज लेने में आसानी होगी।






