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गैरसैंण में बजट सत्र प्रारंभ, धामी सरकार ₹7,412 करोड़ का अनुपूरक बजट प्रस्तुत करेगी, मुख्य विषयों पर होगा विचार।

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में मंगलवार से दो दिवसीय विधानसभा सत्र शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 7,412 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट सदन में पेश करने जा रही है। इसके साथ ही आठ विधेयक भी विधानसभा के पटल पर रखे जाने हैं। चुनावी वर्ष में हो रहे इस सत्र को सरकार और विपक्ष, दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सत्र के दौरान जहां सरकार अतिरिक्त बजट और विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सवाल उठाने की रणनीति बना रहा है। ऐसे में सदन की कार्यवाही के दौरान जनहित के मुद्दों पर बहस होने की संभावना है।

पहले दिन दिवंगत नेताओं को दी जाएगी श्रद्धांजलि

निर्धारित कार्यसूची के अनुसार, सदन की कार्यवाही की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट सहित दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने से होगी। इस दौरान सदस्य उनके सार्वजनिक जीवन और योगदान को याद करेंगे।

पहले दिन प्रश्नकाल नहीं रखा गया है। श्रद्धांजलि संबंधी कार्यवाही के बाद भोजनावकाश के पश्चात सरकार अनुपूरक बजट सदन में पेश करेगी। बुधवार, 28 अक्टूबर को बजट पर चर्चा और उसे पारित कराने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। हालांकि, सदन की कार्यवाही निर्धारित कार्यक्रम और पीठासीन अधिकारी के निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ेगी।

क्या होता है 7,412 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट?

अनुपूरक बजट वह अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान है, जिसे सरकार चालू वित्तीय वर्ष में पहले से स्वीकृत बजट के अलावा जरूरी खर्चों के लिए विधानसभा के सामने रखती है। जब किसी विभाग, योजना या सरकारी काम के लिए निर्धारित राशि से अधिक धन की जरूरत होती है, तब सरकार नियमानुसार अतिरिक्त अनुदान की मांग कर सकती है।

धामी सरकार के 7,412 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट को कैबिनेट पहले ही मंजूरी दे चुकी है। अब इसे विधानसभा में पेश करने और निर्धारित विधायी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाने की तैयारी है।

हालांकि, बजट का कुल आकार ही उसकी उपयोगिता तय नहीं करता। आम लोगों के लिए यह जानना भी जरूरी होगा कि अतिरिक्त धन किन विभागों और योजनाओं पर खर्च किया जाएगा, किन परियोजनाओं को प्राथमिकता मिलेगी और खर्च का लाभ प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक किस तरह पहुंचेगा।

आठ विधेयकों पर भी रहेगी नजर

दो दिवसीय सत्र में सरकार की ओर से आठ विधेयक पेश किए जाने हैं। इनमें उत्तराखंड जन विश्वास अधिनियम में संशोधन और अग्निशमन एवं आपात सेवाओं से संबंधित विधेयक सहित अन्य प्रस्ताव शामिल बताए गए हैं। समान नागरिक संहिता और माल एवं सेवा कर से जुड़े विधायी विषयों पर भी सदन की कार्यवाही में चर्चा हो सकती है। इसके अलावा विभिन्न विभागों और बोर्डों की वार्षिक रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी जानी हैं।

इन विधेयकों का महत्व इस बात से भी तय होगा कि उनसे प्रशासनिक प्रक्रियाओं, नागरिक सुविधाओं और सरकारी कामकाज में क्या बदलाव आएंगे। संबंधित प्रस्तावों का वास्तविक प्रभाव उनके अंतिम स्वरूप और लागू होने के बाद सामने आएगा।

विपक्ष किन मुद्दों पर सरकार से मांगेगा जवाब?

विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष सरकार को प्रदेश की प्रमुख समस्याओं पर घेरने की तैयारी में है। बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के साथ महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी चर्चा में रह सकता है। अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सवालों को लेकर भी विपक्ष सरकार से जवाब मांगने की तैयारी कर रहा है।

विपक्ष का जोर इस बात पर रह सकता है कि सरकार विकास योजनाओं, रोजगार के अवसरों और सार्वजनिक सेवाओं के संबंध में अपनी उपलब्धियों तथा आगे की कार्ययोजना को स्पष्ट करे। दूसरी ओर, सरकार की ओर से अपने निर्णयों और नीतियों का पक्ष रखने की उम्मीद है।

पहाड़ के गांवों को बजट से क्या उम्मीदें?

गैरसैंण में होने वाले विधानसभा सत्र को लेकर स्थानीय लोगों की उम्मीदें केवल बजट के आंकड़े तक सीमित नहीं हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, शिक्षकों और चिकित्सकों की कमी, सड़क संपर्क, पेयजल, रोजगार और पलायन जैसी समस्याएं लंबे समय से चर्चा में रही हैं।

दूरस्थ गांवों के लिए समय पर स्वास्थ्य सुविधा, बेहतर सड़कें, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और गांवों में आजीविका के अवसर अहम जरूरतें हैं। ऐसे में अनुपूरक बजट के खर्च का ब्यौरा और विभागवार प्राथमिकताएं महत्वपूर्ण होंगी। यदि अतिरिक्त संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल इन क्षेत्रों में होता है, तो लोगों को वास्तविक राहत मिल सकती है।

गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित होना भी राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व रखता है। पर्वतीय राज्य की राजधानी से जुड़ी आकांक्षाओं और पहाड़ के विकास की चर्चा के बीच इस स्थान पर होने वाली कार्यवाही से जनता की अपेक्षाएं स्वाभाविक रूप से जुड़ी रहती हैं।

निष्कर्ष: आंकड़ों से आगे, खर्च का असर भी अहम

गैरसैंण में शुरू हुआ यह दो दिवसीय विधानसभा सत्र उत्तराखंड की वित्तीय और राजनीतिक प्राथमिकताओं को सामने रखने का अवसर है। सरकार के सामने ₹7,412 करोड़ के अनुपूरक बजट और आठ विधेयकों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है, जबकि विपक्ष जनहित के मुद्दों पर जवाब मांगने की तैयारी में है।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि बजट किन जरूरतों को प्राथमिकता देता है, विधेयकों पर सदन में क्या चर्चा होती है और सरकार पहाड़ की बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम सामने रखती है। प्रदेश की जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि विधानसभा में लिए गए फैसलों का असर उनके रोजमर्रा के जीवन तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचता है।

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