रुद्रप्रयाग दिव्यांगता प्रमाणपत्र रिश्वत: दिव्यांगता प्रमाणपत्र के नाम पर रिश्वत का मामला, ₹5 हजार लेते डॉक्टर गिरफ्तार
रुद्रप्रयाग दिव्यांगता प्रमाणपत्र रिश्वत: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले से दिव्यांगता प्रमाणपत्र को लेकर रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। जिला अस्पताल में तैनात एक ऑर्थोपेडिक सर्जन को सतर्कता विभाग की टीम ने कथित तौर पर ₹5,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने के एवज में शिकायतकर्ता से इस रकम की मांग की गई थी।
शिकायत के बाद हरकत में आया सतर्कता विभाग
मामला तब सामने आया जब एक व्यक्ति ने उत्तराखंड सतर्कता विभाग से शिकायत की। शिकायतकर्ता का आरोप था कि रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल में तैनात ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अंकुर ठाकुर दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने के बदले ₹5,000 की मांग कर रहे हैं।(रुद्रप्रयाग दिव्यांगता प्रमाणपत्र रिश्वत)
सतर्कता विभाग के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद आरोपों का सत्यापन किया गया। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद ट्रैप टीम गठित की गई। इसके बाद तय योजना के तहत अस्पताल में कार्रवाई की गई।
अस्पताल में ट्रैप लगाकर की गई कार्रवाई
रिपोर्टों के मुताबिक, 29 सितंबर 2026 को सतर्कता विभाग की टीम ने जिला अस्पताल में ट्रैप कार्रवाई की। शिकायतकर्ता द्वारा कथित रूप से रिश्वत की रकम दिए जाने के बाद टीम ने डॉक्टर को ₹5,000 लेते हुए पकड़ लिया।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता ने डॉक्टर के कक्ष में रकम सौंपी और इसके तुरंत बाद सतर्कता अधिकारियों ने कार्रवाई की। डॉक्टर को पूछताछ और आगे की जांच के लिए देहरादून ले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई।(रुद्रप्रयाग दिव्यांगता प्रमाणपत्र रिश्वत)
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला
सतर्कता विभाग ने डॉक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की है। आगे की कानूनी प्रक्रिया जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में डॉक्टर पर लगाए गए आरोपों को आरोप के रूप में ही बताया गया है; अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
दिव्यांग प्रमाणपत्र क्यों महत्वपूर्ण है?
दिव्यांगता प्रमाणपत्र पात्र लोगों के लिए कई सरकारी योजनाओं, सुविधाओं और अधिकारों का आधार बन सकता है। इसके माध्यम से संबंधित व्यक्ति को विभिन्न सरकारी सहायता और निर्धारित सुविधाओं का लाभ लेने में मदद मिलती है।
ऐसे में प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में कथित रिश्वत की मांग का मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आने वाले लोगों के लिए प्रक्रिया पारदर्शी और सुगम होना जरूरी है।(रुद्रप्रयाग दिव्यांगता प्रमाणपत्र रिश्वत)

भ्रष्टाचार की शिकायत के लिए हेल्पलाइन
उत्तराखंड सतर्कता विभाग के निदेशक वी. मुरुगेशन ने लोगों से सरकारी कर्मचारियों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की शिकायत करने की अपील की है। रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने इसके लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन 1064 और WhatsApp नंबर 9456592300 उपलब्ध कराया है।
जांच के बाद सामने आएगा पूरा सच
रुद्रप्रयाग का यह मामला अब जांच के दायरे में है। सतर्कता विभाग द्वारा गिरफ्तारी और तलाशी के बाद मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित रिश्वत प्रकरण से जुड़े अन्य लोगों या घटनाक्रमों की क्या भूमिका रही।
फिलहाल, ₹5,000 की कथित रिश्वत लेते डॉक्टर की गिरफ्तारी ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं। मामले में आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर अब नजर रहेगी।(रुद्रप्रयाग दिव्यांगता प्रमाणपत्र रिश्वत)
आवास पर भी तलाशी
गिरफ्तारी के बाद सतर्कता टीम ने डॉक्टर के आवास पर भी तलाशी ली। रिपोर्टों के अनुसार, जांच टीम ने मामले से जुड़े संभावित दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की तलाश की। जांच का उद्देश्य कथित रिश्वत प्रकरण से जुड़े अन्य तथ्यों को सामने लाना है।(रुद्रप्रयाग दिव्यांगता प्रमाणपत्र रिश्वत)





