Rupee vs Dollar : 96 के स्तर के करीब पहुंची भारतीय करेंसी, जानें क्यों कमजोर हो रहा रुपया?
Rupee vs Dollar: पिछले कुछ सालों से भारतीय फाइनेंस बाज़ार में रुपया डॉलर के मुकाबले काफी पीछे रह गया. सितंबर के आखिरी कारोबारी दिन यानी 30 सितंबर 2026 को डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सुबह के कारोबार में रुपया करीब ₹95.95 प्रति डॉलर पर खुला और शुरुआती कारोबार में ₹95.97 तक कमजोर हुआ। बाद में कारोबार के दौरान इसमें कुछ सुधार देखने को मिला और रुपया करीब ₹95.81 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ।
96 रुपये के स्तर पर बाजार की नजर(Rupee vs Dollar)
डॉलर के मुकाबले ₹96 का स्तर इस समय मुद्रा बाजार में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 30 सितंबर को शुरुआती कारोबार में रुपया इस मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब रहा। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद और विदेशी निवेश की दिशा रुपये की चाल को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे।
मुद्रा बाजार में एक डॉलर की कीमत बढ़ने का अर्थ है कि डॉलर खरीदने के लिए भारतीयों को ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसी वजह से रुपये में कमजोरी का असर आयात, विदेश यात्रा और विदेशी मुद्रा में भुगतान करने वाले कारोबारों पर पड़ सकता है।Rupee vs Dollar
कच्चा तेल बना बड़ी चुनौती
रुपये पर दबाव की एक प्रमुख वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है तो भारतीय आयातकों को डॉलर में ज्यादा भुगतान करना पड़ता है। इससे डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव बन सकता है।Rupee vs Dollar
30 सितंबर के कारोबार में भी तेल कंपनियों की डॉलर मांग और ऊंची कच्चे तेल की कीमतों को रुपये पर दबाव डालने वाले कारणों में शामिल किया गया।
सितंबर में रुपये का प्रदर्शन
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में रुपया करीब 0.7 प्रतिशत कमजोर हुआ और जुलाई-सितंबर तिमाही में इसकी गिरावट करीब 1.2 प्रतिशत रही। रिपोर्ट में ऊंची वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और बढ़ती बॉन्ड यील्ड को रुपये के लिए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शामिल किया गया है।Rupee vs Dollar
हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक की बाजार में मौजूदगी और हस्तक्षेप ने रुपये की गिरावट को सीमित करने में भूमिका निभाई है। रॉयटर्स के अनुसार, केंद्रीय बैंक की कार्रवाई के कारण रुपया अपने पहले दर्ज किए गए रिकॉर्ड निचले स्तर ₹96.96 प्रति डॉलर को दोबारा नहीं छू पाया।
डॉलर मजबूत होने का क्या असर?
डॉलर मजबूत होने और रुपये के कमजोर होने का असर आम लोगों से लेकर कारोबार तक दिखाई दे सकता है। विदेश से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी, कच्चे माल और पेट्रोलियम उत्पादों की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर कुछ वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।Rupee vs Dollar
विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और विदेश यात्रा करने वाले लोगों के लिए भी कमजोर रुपया महत्वपूर्ण है। उन्हें समान डॉलर राशि खरीदने के लिए पहले की तुलना में अधिक रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।
दूसरी ओर, डॉलर में कमाई करने वाले भारतीय निर्यातकों को रुपये में भुगतान प्राप्त होने पर अपेक्षाकृत अधिक राशि मिल सकती है। हालांकि इसका वास्तविक लाभ कारोबार की लागत और अन्य बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

RBI की भूमिका भी महत्वपूर्ण
रुपये में तेज उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। रॉयटर्स के अनुसार, 2026 में आरबीआई की विदेशी मुद्रा से जुड़ी गतिविधियां और फॉरवर्ड पोजीशन भी काफी बढ़ी हैं। अगस्त में आरबीआई की नेट फॉरवर्ड डॉलर देनदारियां रिकॉर्ड करीब 200 अरब डॉलर तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई।Rupee vs Dollar
इसका उद्देश्य बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को संभालने और विदेशी मुद्रा तरलता को व्यवस्थित रखने से जुड़ा है।
आगे रुपये की चाल किन बातों पर निर्भर?
आने वाले दिनों में रुपये की दिशा कई घरेलू और वैश्विक कारकों से प्रभावित हो सकती है। इनमें कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, विदेशी निवेश, डॉलर इंडेक्स, भारत का व्यापार संतुलन और भू-राजनीतिक परिस्थितियां प्रमुख हैं।Rupee vs Dollar
मौजूदा स्थिति में मुद्रा बाजार में 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर खास नजर बनी हुई है। हालांकि दिनभर के कारोबार में रुपये और डॉलर की कीमत में बदलाव संभव है।
एक नजर में
- 30 सितंबर 2026 को शुरुआती स्तर: करीब ₹95.95 प्रति डॉलर
- शुरुआती कारोबार में निचला स्तर: करीब ₹95.97 प्रति डॉलर
- कारोबारी बंद: करीब ₹95.81 प्रति डॉलर, प्रोविजनल
- सितंबर में रुपये की गिरावट: करीब 0.7%
- जुलाई-सितंबर तिमाही में गिरावट: करीब 1.2%





