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उत्तराखंड: पेपर लीक और फर्जीवाड़ा – सुरेंद्र की चालाकी हुई बेनकाब

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKSSSC) की परीक्षा से पहले एक संदिग्ध अभ्यर्थी सुरेंद्र कुमार का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। गाजियाबाद के मोदीनगर के रहने वाले सुरेंद्र ने सहकारी निरीक्षक भर्ती के लिए तीन अलग-अलग फॉर्म फर्जी दस्तावेजों और जानकारियों के साथ भरे। उसने शैक्षिक प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र और स्थायी पता प्रमाणपत्र तक में फर्जी जानकारी दी।

सुरेंद्र ने हर फॉर्म में अलग मोबाइल नंबर और फर्जी इम्प्लाई आईडी का इस्तेमाल किया। लेकिन उसकी यह चालाकी उसके ही लिए फँसने का कारण बन गई। उसने इम्प्लाई आईडी में उत्तराखंड की शुरुआत “यूके” के बजाय “यूए” लिख दी और आईडी के अंक भी गलत दर्ज किए।

इसके अलावा, उसने अपने पिता का नाम हर फॉर्म में अलग-अलग लिखा – कभी “सालीक”, कभी “शालीक”, तो कभी “सलीक”। फर्जी स्थायी प्रमाणपत्र बनवाकर देहरादून का पता भी दिखाया। उसने अंग्रेजी में पिता का नाम हर फॉर्म में अलग ढंग से लिखा ताकि फॉर्म कंप्यूटर में स्वीकृत हो जाए। ओबीसी प्रमाणपत्र के लिए भी उसने गलत आईडी और अंक दर्ज किए।

सुरेंद्र ने जन्मतिथि को भी बदल-बदल कर फॉर्म में भरा। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और ग्रेजुएट के दस्तावेजों में अलग-अलग जन्मतिथि दिखाई। अजीब बात यह रही कि उसने तीन साल में तीन अलग-अलग विश्वविद्यालयों से ग्रेजुएशन के प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किए, जो व्यावहारिक रूप से असंभव है।

एक फर्जी स्थायी प्रमाणपत्र में उसने खुद को देहरादून के बालावाला का निवासी दिखाया और बताया कि उसने 2001 में आवेदन किया था, जबकि यह प्रमाणपत्र 2023 में ही जारी हुआ। इसके अलावा, उसने एक फॉर्म में हापुड़ और एक में गाजियाबाद का पता भी दिखाया।

इस तरह की कई चालाकियों के बावजूद, गोपनीय जांच के बाद सुरेंद्र की सारी फर्जी गतिविधियाँ सामने आ गईं। रायपुर थाने में इस मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और उसकी हर चालाकी पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

सुरेंद्र का यह मामला एक उदाहरण है कि फर्जी दस्तावेजों और चालाकियों से बचना मुश्किल है, और सरकार की जांच प्रणाली इतनी मजबूत है कि कोई भी फर्जीवाड़ा आसानी से पकड़ में आ सकता

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