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जीई एयरोस्पेस ने एचएएल को दिया चौथा इंजन, तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमान में होगा इस्तेमाल

अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को जीई-एफ404-आईएन20 इंजन की चौथी यूनिट सौंप दी है। यह इंजन भारतीय वायुसेना के लिए बनाए जा रहे तेजस एलसीए (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) मार्क-1ए विमानों में लगाया जाएगा।

यह आपूर्ति 2021 में किए गए ऑर्डर के तहत की जा रही है। इस सौदे में कुल 99 इंजन भारत को मिलने हैं, जिनकी डिलीवरी चरणबद्ध तरीके से हो रही है। तेजस मार्क-1ए विमानों को भारतीय वायुसेना में शामिल किया जाएगा और यह पुराने मिग-21 लड़ाकू विमानों की जगह लेंगे।

तेजस एक सिंगल-इंजन, मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो हवाई रक्षा, समुद्री गश्त और हमले जैसे कई मिशनों को पूरा करने में सक्षम है। फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास 31 स्क्वाड्रन हैं, जबकि अधिकृत संख्या 42 होनी चाहिए। तेजस की तैनाती से इस कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी।

क्यों अहम है यह कदम?

भारतीय वायुसेना के मिग-21 विमान अब सेवा से बाहर हो चुके हैं। उनकी जगह स्वदेशी तकनीक से बने तेजस लड़ाकू विमानों को शामिल करना न सिर्फ भारत की सैन्य ताकत को बढ़ाएगा बल्कि यह संदेश भी देगा कि देश रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही देशभर की छोटी और मध्यम रक्षा कंपनियों को भी कारोबार का बड़ा अवसर मिलेगा।

स्वदेशी इंजन की तैयारी

भारत भविष्य में अपना फाइटर जेट इंजन खुद बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसके लिए फ्रांस की कंपनी सफरान के साथ साझेदारी की गई है। लक्ष्य है कि आने वाले समय में भारत को विदेशी इंजनों पर निर्भर न रहना पड़े।

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