#Spiritual

Panchachuli – जहाँ पर्वत मौन रहकर भी बोलते हैं – पंचाचूली

Panchachuli: पंचाचुली पर्वत श्रृंखला पहाड़ों का एक समूह नहीं है बल्कि कुदरत की ऐसी रचना है जो अद्भुत है।

Panchachuli: पंचाचुली देश की हर एक श्रृंखला अलग ही कहानी। पंचाचुली पर्वत का हर एक पर्वत अलग ही कहानी बयां करता है। पंचाचुली पर्वत पर पड़ने वाली सूर्य की पहली किरणें। पर्वत को स्वर्ण का पर्वत बना देती है। उनमें जो हल्का गुलाबी लोक कथाओं या पुराने इतिहास के अगर बात की जाए तो पंचाचुली को पांडवों का अंतिम पड़ाव माना गया है पांच शिखर पांच पांडवों की तरह ही। साहस संघर्ष और सत्य की कथा सुनाते हैं।

यह प्रतीकात्मकता भी पहाड़ों की भाषा है जो समय के साथ और भी अधिक गहरी होती चली जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है जब मौसम बदलने वाला होता है तो पंचाचुली की चोटियां अपना रंग स्वयं ही बदल लेती है यह पहाड़ों का एक तरीका है संकेत देने का।

Panchachuli: पंचाचुली के पहाड़ों पंचाचुली में ऋतुओं का परिवर्तन और हर मौसम की एक अलग लिपि होती है। ग्रीष्म में यह सफेद से हल्के रजत में बदलता है। शरद में शिखर पर हल्का नीला प्रभामंडल दिखता है। शीतकाल में बर्फ शिखर को मानो कांच जैसा पारदर्शी बना देता है। बसंत में सूर्य प्रकाश की वजह से यह हल्का सुनहरा झिलमिलाता हुआ दिखाई देता है।के सामने खड़ा होकर उसे देखा है तो उसमें एक सकारात्मक आ जाती है। नंगी और सुनहरा प्रकाश आता है मानो प्रकृति अपनी भाषा में एक नया ही अध्याय लिख रही हो। और शाम के समय जब पर्वत पर गहरा नीला रंग और बर्फ पड़ने लग जाती है तो उसे देखकर अलग ही शांति और सुखी उनकी प्राप्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि जब पंचाचुली पर्वत से बर्फीली हवा नीचे घाटियों में निकलती है तो उसे हवा के बहाव में एक ऐसी फनी निकलती है मानो कोई प्राचीन मंत्र गा रहा हो।

Panchachuli

Panchachuli:पंचाचुली शिखर के रंग की अलग ही भाषा है। ग्रीष्म में यह सफेद हल्के रंग का हो जाता है शरद में शिखर पर हल्का नीला प्रभाव मंडल दिखता है शीतकाल में बर्फ शिखर को मानो कांच जैसा पारदर्शी बना देती है।और बसंत में सूर्य की वजह से यह हल्का सुनहरा झिलमिल आता हुआ नजर आता है। पंचाचुली आध्यात्मिक फूड दृश्य है जहां हर एक शिकार एक पत्र है हर एक बर्फ एक कथा और हर एक छाया एक स्मृति।

Read More

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *