उत्तराखण्ड के हर गांव में होगी पक्की सड़क, धामी को केन्द्र से मिले 1700 करोड़
देहरादून- सीएम धामी की सरकार अब उत्तराखण्ड के गांव गांव में सड़कों का जाल बिछाने जा रही है। दूरस्थ पहाड़ी गांव, जो अभी तक पक्की सड़क से महरूम है, उनके लिए केन्द्र सरकार के बड़ी रकम स्वीकृत हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से हुई मुलाकात राज्य के विकास के लिए निर्णायक साबित हुई। इस बैठक के बाद केंद्र सरकार ने उत्तराखंड की 184 ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए 1700 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कर दी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनने वाली इन सड़कों की कुल लंबाई 1228 किलोमीटर होगी। यह उन पहाड़ी इलाकों में नई सांस की तरह है जहां आज भी लोगों को चिकित्सा, शिक्षा, बाजार और आपात स्थितियों तक पहुंचने के लिए लंबे और कठिन रास्ते तय करने पड़ते हैं।
इस योजना का असर गांवों की अर्थव्यवस्था से लेकर बच्चों की शिक्षा और आपातकालीन सेवाओं तक हर स्तर पर दिखाई देगा। बेहतर सड़कें किसानों तक मंडियों को जोड़ेंगी, पर्यटन के नए रास्ते खोलेंगी और ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देंगी। पहाड़ में सड़क का मतलब सिर्फ यातायात नहीं होता, यह सामाजिक जुड़ाव, बाजार तक पहुंच और आधुनिक सुविधाओं का प्रवेश द्वार होती है।
मुख्यमंत्री धामी ने अपनी बैठक के दौरान केंद्र को एक और महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर ध्यान दिलाया। पिछले महीनों में उत्तराखंड के कई हिस्से प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आए। भारी जाड़ों और वर्षा के कारण भूधंसाव, बादल फटने और मलबे के बहाव से राज्य की बुनियादी संरचना को भारी क्षति पहुंची। मुख्यमंत्री ने बताया कि आपदा में नौ सौ छियालिस सड़कें और पंद्रह पुल गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनका पुनर्निर्माण तत्काल सरकारी सहायता की मांग करता है, जिसके लिए उन्होंने छह सौ पचास करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई।
सिर्फ सड़कों और पुलों का नुकसान ही नहीं, बल्कि राज्य के कई क्षेत्रों में हजारों परिवार प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए। पांच हजार नौ सौ घर क्षतिग्रस्त हैं और उनकी मरम्मत के लिए भी केंद्र के सहयोग की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने बैठक में यह भी आग्रह किया कि अगले पांच वर्षों तक राज्य को प्रतिवर्ष दो सौ करोड़ रुपये का विशेष बजट दिया जाए ताकि उत्तराखंड प्राकृतिक आपदाओं की पुनरावृत्ति और उनके दीर्घकालिक प्रभाव से निपटने के लिए सक्षम हो सके।

उत्तराखंड के लिए इस मंजूरी का भावनात्मक पक्ष भी उतना ही गहरा है। पहाड़ में अक्सर सड़कें जीवन और मृत्यु के बीच फर्क पैदा करती हैं, विशेषकर तब जब मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना हो। कई पहाड़ी गांव आज भी ऐसे हैं जहां सड़क न होने के कारण बच्चों की शिक्षा और महिलाओं की सुरक्षा प्रभावित होती है। खेती के उत्पाद बाजार तक पहुंचने में खराब हो जाते हैं, और पर्यटन का विकास सीमित रह जाता है। ऐसी परिस्थितियों में यह सौगात लोगों की आशाओं को एक नई दिशा देती है।

सड़क निर्माण केवल कंक्रीट और डामर का काम नहीं है, यह विकास का पहला कदम है। यह गांवों को शहरों से, किसानों को उपभोक्ताओं से, बच्चों को स्कूलों से और बीमारों को अस्पतालों से जोड़ती है। नई सड़कों के माध्यम से उत्तराखंड की वादियों में नई संभावनाओं की किरणें फैलेंगी और उन इलाकों में भी जीवन आसान होगा जो अभी तक अलग थलग पड़े हुए हैं।
केंद्र से मिली यह सहायता उत्तराखंड की ग्रामीण संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आने वाले महीनों में जब ये सड़कें गांवों तक पहुंचेंगी, तब राज्य की सामाजिक और आर्थिक संरचना में सकारात्मक बदलाव साफ साफ नजर आएगा। यह मंजूरी सिर्फ सड़कों के निर्माण की नहीं, बल्कि उन उम्मीदों की भी मंजूरी है जिन्हें पहाड़ का हर परिवार अपने भीतर संजोए बैठा है






