नैनीताल विंटर कार्निवाल में इस बार ‘डबल धमाल’, न्यू ईयर स्पेशल के लिए सैलानियों को न्यौता
नैनीताल- नए साल में घूमने का प्लान बना रहे हैं तो पहाड़ों की वादियां आपको बुला रही हैं। नैनीताल की ठंडी वादियों में इस साल सर्दियों की रौनक कुछ खास होने जा रही है। झीलों की नगरी नैनीताल एक बार फिर संगीत, रोशनी, संस्कृति और खुशियों से सजने को तैयार है। 23 से 25 दिसंबर तक यहां विंटर कार्निवाल का आयोजन किया जा रहा है। तीन दिन चलने वाला यह आयोजन न केवल पर्यटकों के लिए खास होगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी उत्साह और उम्मीद लेकर आएगा। पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन ने इसकी तैयारियां तेज कर दी हैं और शहर में धीरे धीरे उत्सव का माहौल बनने लगा है। सर्दियों में नैनीताल हमेशा से लोगों को अपनी ओर खींचता रहा है। ठंडी हवा, धुंध से ढकी पहाड़ियां और नैनी झील का शांत पानी मन को सुकून देता है। लेकिन विंटर कार्निवाल इस खूबसूरती में रंग, संगीत और जश्न जोड़ देता है। यही वजह है कि यह आयोजन हर साल पर्यटकों के बीच खास लोकप्रिय होता जा रहा है। इस बार भी उम्मीद की जा रही है कि बड़ी संख्या में सैलानी नैनीताल पहुंचेंगे और शहर में चहल पहल बढ़ेगी। नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने इस साल 23 दिसंबर से कार्निवाल शुरू करने का प्रस्ताव रखा था, जिसे अब मंजूरी मिल चुकी है। इसके बाद तैयारियां तेजी से शुरू हो गई हैं। 22 दिसंबर से ही नैनीताल की पहचान मानी जाने वाली मॉलरोड को रंग बिरंगी बिजली की मालाओं से सजाया जाएगा। शाम होते ही मॉलरोड पर रोशनी की चमक और लोगों की आवाजाही एक अलग ही माहौल बना देगी। तीन दिन चलने वाले इस विंटर कार्निवाल में हर दिन कुछ न कुछ खास होगा। मंच पर लाइव संगीत कार्यक्रम होंगे, जहां स्थानीय कलाकारों के साथ साथ बॉलीवुड के मशहूर गायक और नामी बैंड अपनी प्रस्तुति दे सकते हैं। अभी कलाकारों के नाम को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन आयोजकों का कहना है कि इस बार कार्यक्रम को यादगार बनाने की पूरी कोशिश की जा रही है। सिर्फ संगीत ही नहीं, बल्कि नृत्य और लोक संस्कृति भी इस कार्निवाल की जान होगी। कुमाऊं की पारंपरिक झलक दिखाते सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक नृत्य और लोक गीत लोगों को पहाड़ की जड़ों से जोड़ेंगे। स्थानीय कलाकारों के लिए यह मंच अपने हुनर को दिखाने का बड़ा मौका होगा। इससे न सिर्फ उनकी पहचान बढ़ेगी, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी फायदा मिलेगा। नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट का कहना है कि विंटर कार्निवाल जैसे आयोजन पर्यटन के लिए नई जान डालते हैं।

सर्दियों में जब आमतौर पर पर्यटकों की संख्या कम हो जाती है, तब ऐसे आयोजन शहर को फिर से गुलजार कर देते हैं। होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी चालक, दुकानदार और स्थानीय कारोबारी सभी को इससे सीधा लाभ मिलता है। उनके मुताबिक विंटर कार्निवाल नैनीताल के पर्यटन के लिए संजीवनी का काम करता है। जिला पर्यटन अधिकारी का कहना है कि 23 दिसंबर से कार्निवाल की औपचारिक शुरुआत होगी। कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है और कलाकारों से बातचीत चल रही है। प्रशासन की कोशिश है कि आयोजन सुरक्षित, व्यवस्थित और यादगार बने। इसके लिए पुलिस, नगर पालिका और अन्य विभागों के साथ तालमेल बनाया जा रहा है। विंटर कार्निवाल का एक बड़ा पहलू यह भी है कि यह सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता। यह नैनीताल की पहचान, उसकी संस्कृति और उसकी मेहमाननवाजी को सामने लाता है। जब देश और विदेश से आए लोग यहां के गीत संगीत, खाने और लोगों से जुड़ते हैं, तो नैनीताल की छवि और मजबूत होती है। स्थानीय लोगों में भी इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह है। दुकानदार अपनी दुकानों को सजाने में जुट गए हैं। होटल मालिक बुकिंग बढ़ने की उम्मीद में तैयारियां कर रहे हैं। टैक्सी और नाव चलाने वाले भी आने वाले दिनों को लेकर उत्साहित हैं। कई परिवारों के लिए यह समय साल भर की अच्छी कमाई का मौका बन जाता है। पर्यटकों के लिए भी यह आयोजन खास अनुभव लेकर आता है। दिन में झील के किनारे घूमना, पहाड़ों में सैर करना और शाम को संगीत और रोशनी के बीच समय बिताना एक यादगार अनुभव बन जाता है। ठंडी रातों में गर्म चाय या कॉफी के साथ लाइव संगीत सुनना लोगों को लंबे समय तक याद रहता है।

प्रशासन की ओर से साफ किया गया है कि भीड़ को संभालने और सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए जाएंगे। ट्रैफिक व्यवस्था, पार्किंग और साफ सफाई पर खास ध्यान दिया जाएगा, ताकि पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी न हो। कुल मिलाकर इस साल का विंटर कार्निवाल नैनीताल के लिए सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि उम्मीदों का उत्सव है। यह पर्यटन को मजबूती देगा, स्थानीय लोगों को रोजगार और पहचान देगा और नैनीताल की सर्द रातों को गीत संगीत और खुशियों से भर देगा। झीलों के शहर में तीन दिन तक चलने वाला यह जश्न एक बार फिर यह एहसास कराएगा कि नैनीताल सिर्फ देखने की जगह नहीं, बल्कि महसूस करने का अनुभव है।






