शांतिकुंज हरिद्वार का शताब्दी समारोह, 15 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए बसेगा आध्यात्मिक नगर
हरिद्वार- संतों की पावन धरती एक बार फिर एक बड़े आध्यात्मिक आयोजन की साक्षी बनने जा रही है। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के शताब्दी समारोह की तैयारियां पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ शुरू हो चुकी हैं। इसके लिए हरिद्वार के बैरागी कैंप मैदान में एक विशाल शताब्दी नगर बसाया गया है, जो आने वाले दिनों में साधना, सेवा और विचारों के महासंगम का केंद्र बनेगा। मंगलवार को इसी शताब्दी नगर में 108 पवित्र तीर्थ स्थलों की रज और जल से प्रखर प्रज्ञा पूजन किया गया, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। शांतिकुंज का शताब्दी समारोह 19 जनवरी 2026 से शुरू होकर 23 जनवरी 2026 तक चलेगा। इन पांच दिनों में बैरागी कैंप स्थित शताब्दी नगर में चार दिवसीय मुख्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजकों को उम्मीद है कि देश और विदेश से लाखों साधक इस दौरान हरिद्वार पहुंचेंगे। इसे शांतिकुंज का कुंभ भी कहा जा रहा है, जहां विचार, साधना और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
100 वर्षों की साधना शांतिकुंज का यह शताब्दी समारोह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सौ वर्षों की साधना, तप, सेवा और विचार क्रांति का उत्सव है। इसी भावना के साथ बैरागी कैंप में शताब्दी नगर को आकार दिया जा रहा है। चारों ओर अस्थायी लेकिन सुव्यवस्थित ढांचे, साधकों के ठहरने की व्यवस्था, साधना स्थल और आयोजन मंच तैयार किए जा रहे हैं। मंगलवार को हुए प्रखर प्रज्ञा पूजन में हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल, कई संत महात्मा और बड़ी संख्या में शांतिकुंज के साधक मौजूद रहे।
108 तीर्थ स्थलों की यात्रा इस विशेष पूजन में देश के 108 तीर्थ स्थलों से लाई गई पवित्र रज और जल का उपयोग किया गया। शांतिकुंज के साधकों ने बीते महीनों में देश भर के प्रमुख तीर्थों से यह रज और जल एकत्र किया था। इसे एक आध्यात्मिक प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है, जो भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक एकता को दर्शाता है। पूजन के दौरान अखंड ज्योति, माता भगवती देवी शर्मा की स्मृति और युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों को केंद्र में रखा गया। इस अवसर पर अरविंद आश्रम के प्रमुख स्वामी ब्रह्मदेव ने कहा कि युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा का जीवन किसी एक संप्रदाय या सीमित सोच में बंधा नहीं था। उनका जीवन सेवा, साधना और समाज निर्माण का जीवंत उदाहरण रहा। उन्होंने कहा कि शांतिकुंज की परंपरा हमें यह सिखाती है कि सच्ची साधना वही है, जो समाज को बेहतर बनाने में काम आए।

15 करोड़ साधक देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति और अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ चिन्मय पंड्या ने कहा कि आज से करीब सौ वर्ष पहले पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने अखिल भारतीय गायत्री परिवार की नींव रखी थी। यह एक ऐसा विचार आंदोलन था, जिसने धीरे धीरे पूरे देश और फिर दुनिया में अपनी पहचान बनाई। आज गायत्री परिवार से जुड़े साधकों की संख्या 15 करोड़ से अधिक बताई जाती है और दुनिया भर में इसके पांच हजार से ज्यादा केंद्र सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि माता जी के आशीर्वाद से गायत्री परिवार के साधक अब हरिद्वार की इस पवित्र भूमि पर एक साथ जुटने जा रहे हैं। इस बार आयोजन को लेकर सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शांतिकुंज प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि शताब्दी समारोह में नो कार्ड नो एंट्री व्यवस्था लागू रहेगी। यानी बिना पहचान पत्र के किसी को भी आयोजन स्थल में प्रवेश नहीं मिलेगा। दुनियाभर से आने वाले लगभग तीस हजार से अधिक साधक आयोजन स्थल पर ठहरेंगे। इसके लिए अलग अलग सेक्टर बनाए जा रहे हैं, ताकि भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके।

प्रशासन की तैयारियां डॉ चिन्मय पंड्या ने बताया कि इस बार जिला प्रशासन के साथ पूरा तालमेल रखा जा रहा है। भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाएं और आपात स्थिति से निपटने के लिए विस्तृत योजना तैयार की गई है। पुलिस, प्रशासन और स्वयंसेवकों की संयुक्त टीम हर स्तर पर तैनात रहेगी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। शांतिकुंज प्रबंधन इस आयोजन को लेकर बेहद सतर्क है, क्योंकि वर्ष 2011 में नीलधारा टापू पर हुए एक दर्दनाक हादसे की याद आज भी लोगों के मन में है। उस समय हवन कार्यक्रम के दौरान भगदड़ मच गई थी, जिसमें कई श्रद्धालुओं की जान चली गई थी। उस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था और शांतिकुंज प्रबंधन के लिए भी यह एक बड़ा सबक था। बाद में इस मामले में मुकदमा भी दर्ज हुआ था, जिसे तत्कालीन सरकार ने जनहित में वापस लिया था। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार शांतिकुंज ने साफ कहा है कि किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। आयोजन स्थल पर प्रवेश, निकास, आपात रास्ते, चिकित्सा सुविधा और निगरानी व्यवस्था को बेहद मजबूत बनाया जा रहा है। प्रबंधन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और 2011 जैसी स्थिति दोबारा पैदा न हो, इसके लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

देश की बड़ी हस्तियां पधारेंगी शताब्दी समारोह में देश के कई बड़े संत महात्मा और प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल होंगी। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के शामिल होने की भी जानकारी दी गई है। आयोजकों के अनुसार वर्ष 2026 शांतिकुंज के लिए बेहद खास है, क्योंकि इसी वर्ष युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य, माता भगवती देवी शर्मा और अखंड ज्योति से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण घटनाओं के सौ वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसे केवल गायत्री परिवार का नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए विचार जागरण और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का वर्ष माना जा रहा है। बैरागी कैंप में बस रहा शताब्दी नगर धीरे धीरे आकार ले रहा है। यहां हर कोना साधना और सेवा की भावना से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। साधकों के चेहरे पर उत्साह है और आंखों में उस पल का इंतजार, जब लाखों लोग एक साथ गायत्री मंत्र की शक्ति और युगऋषि के विचारों को जीते नजर आएंगे। हरिद्वार की गंगा, संतों की वाणी और शांतिकुंज की साधना परंपरा मिलकर एक बार फिर यह संदेश देने को तैयार हैं कि अध्यात्म केवल पूजा नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने की ताकत है। शताब्दी समारोह उसी ताकत का उत्सव बनने जा रहा है।






