Power crisis – कड़ाके की ठंड के बीच दूर होगा बिजली संकट, 500 मेगावाट बिजली खरीदने की मंजूरी
देहरादून। उत्तराखंड के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। कड़ाके की ठंड के बीच बिजली संकट अब दूर हो जाएगा। राज्य में लंबे समय से चल रही बिजली की कमी अब काफी हद तक दूर होने जा रही है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को मध्यम अवधि के लिए लगातार चौबीस घंटे मिलने वाली 500 मेगावाट बिजली खरीदने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से आम दिनों में बिजली की कटौती और कमी की समस्या लगभग खत्म होने की उम्मीद है।
अब तक राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर बना रहता था। उत्तराखंड में औसतन रोजाना करीब दो हजार से बाईस सौ मेगावाट बिजली की जरूरत होती है, जबकि केंद्र से मिलने वाली बिजली और अन्य स्रोतों को मिलाकर उपलब्धता केवल पंद्रह सौ से सोलह सौ मेगावाट के आसपास रहती थी। इसका मतलब यह था कि राज्य को करीब पांच सौ मेगावाट बिजली की कमी झेलनी पड़ती थी। इसी कमी के कारण कई बार महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ती थी, जिसका बोझ आखिरकार आम उपभोक्ताओं पर पड़ता था।
यूपीसीएल के निदेशक परिचालन एम आर आर्या ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य में कुल उपलब्ध बिजली करीब दो हजार से इक्कीस सौ मेगावाट तक पहुंच जाएगी। इससे सामान्य दिनों में बिजली संकट नहीं रहेगा और लोगों को बार बार कटौती का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी समय बिजली की जरूरत कम हुई, तो बिजली की बैंकिंग भी की जा सकेगी, जिससे आगे चलकर और फायदा मिलेगा।
इस बिजली खरीद के लिए दो कंपनियों को चुना गया है। जिंदल पावर लिमिटेड से 150 मेगावाट और पावरपल्स ट्रेडिंग सॉल्यूशंस लिमिटेड से 350 मेगावाट बिजली खरीदी जाएगी। दोनों कंपनियों ने एक जैसी दर पर बिजली देने की पेशकश की है। बिजली की कीमत 5.85 रुपये प्रति यूनिट तय हुई है। जब इसमें ट्रांसमिशन के दौरान होने वाला नुकसान जोड़ा जाएगा, तो यह दर करीब 6.06 रुपये प्रति यूनिट पड़ेगी। आयोग ने इस दर को अन्य राज्यों में चल रही मध्यम अवधि की बिजली दरों के मुकाबले ठीक और प्रतिस्पर्धी माना है।

यह बिजली आपूर्ति चार साल के लिए तय की गई है। जरूरत पड़ने पर इसे एक साल और बढ़ाया जा सकता है। यानी राज्य को अगले कई वर्षों तक बिजली की उपलब्धता को लेकर ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ेगी। आयोग का मानना है कि यह फैसला राज्य के लिए लंबे समय तक फायदेमंद साबित होगा।
इसके साथ ही नियामक आयोग ने यूपीसीएल और दोनों बिजली देने वाली कंपनियों के बीच होने वाले बिजली खरीद समझौते को भी मंजूरी दे दी है। हालांकि आयोग ने यूपीसीएल को एक तकनीकी कमी सुधारने के निर्देश दिए हैं और कहा है कि दस दिनों के भीतर हस्ताक्षरित समझौता आयोग के सामने पेश किया जाए।
इस फैसले से सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को मिलेगा। सर्दी और गर्मी के मौसम में जब बिजली की मांग बढ़ जाती है, तब भी अब कटौती की आशंका कम रहेगी। उद्योग, व्यापार और छोटे कारोबारियों को भी स्थिर बिजली आपूर्ति से राहत मिलेगी। कुल मिलाकर यह फैसला उत्तराखंड में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।






