Dehradun – प्रशासन के लिए ‘मुसीबत’ बन गया देहरादून का संडे बाजार, नई जगह शिफ्ट होने के बाद भी झगड़े और जाम
देहरादून- राजधानी देहरादून में हर रविवार लगने वाला संडे बाजार एक बार फिर विवाद और परेशानी की वजह बन गया है। रेंजर्स ग्राउंड से हटाए जाने के बाद पहली बार यह बाजार आईएसबीटी के पास लगाया गया, लेकिन हालात वहां भी वैसे ही रहे जैसे पहले थे। जिस समस्या से बचने के लिए बाजार को शिफ्ट किया गया था, वही जाम, अव्यवस्था और झगड़े आईएसबीटी इलाके में भी देखने को मिले। दिनभर ट्रैफिक बेकाबू रहा और आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। देहरादून में यह संडे बाजार वर्षों से लोगों की जरूरत और सस्ते सामान की उम्मीद का जरिया रहा है। हर रविवार हजारों लोग यहां कपड़े, जूते, घरेलू सामान और रोजमर्रा की चीजें खरीदने आते हैं। दुकानदारों के लिए भी यह बाजार रोजी रोटी का बड़ा सहारा है। लेकिन इसी बाजार की वजह से शहर के अहम इलाकों में बार बार जाम लगना प्रशासन और जनता दोनों के लिए सिरदर्द बन गया है। रविवार सुबह जैसे ही आईएसबीटी के पास संडे बाजार लगा, वैसे ही अव्यवस्था साफ नजर आने लगी। दुकानदार अपनी अपनी जगह घेरने में जुट गए। दुकान लगाने को लेकर कई जगह झगड़े हुए। कुछ व्यापारी तो सड़क पर ही खड़े रहे और जगह मिलने का इंतजार करते रहे। इससे माहौल और ज्यादा बिगड़ता चला गया। आईएसबीटी के आसपास सबसे बड़ी परेशानी पार्किंग को लेकर सामने आई। रेंजर्स ग्राउंड की तुलना में यहां पार्किंग की कोई साफ व्यवस्था नहीं थी। लोगों ने अपने वाहन सड़कों के किनारे, बाजार के बाहर और यहां तक कि फ्लाईओवर पर भी खड़े कर दिए। नतीजा यह हुआ कि बसों, ऑटो और निजी वाहनों की आवाजाही लगभग ठप हो गई। आईएसबीटी जैसे व्यस्त इलाके में दिनभर जाम लगा रहा और यात्रियों को बस पकड़ने तक में मुश्किल हुई। देहरादून में हर रविवार लगने वाला यह संडे बाजार पिछले रविवार तक रेंजर्स ग्राउंड में लगता था। वहां भी जाम और अव्यवस्था की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं।

खास तौर पर दून अस्पताल के पास होने की वजह से एंबुलेंस की आवाजाही में परेशानी होती थी। इसी को देखते हुए प्रशासन ने दो दिन पहले ही बाजार को आईएसबीटी के पास शिफ्ट करने का फैसला लिया था। इसका पोस्टर भी रेंजर्स ग्राउंड में लगाया गया था ताकि व्यापारी और लोग नई जगह की जानकारी ले सकें। प्रशासन ने आईएसबीटी के पास नियो मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की जमीन पर संडे बाजार लगाने की अनुमति दी थी। उम्मीद थी कि यहां खुली जगह होने से जाम की समस्या कम होगी, लेकिन बिना ठोस प्लान के बाजार लगाने से हालात और बिगड़ गए। सुबह से शाम तक आईएसबीटी इलाके में ट्रैफिक रेंगता रहा। इस मामले को लेकर पहले भी पुलिस और प्रशासन चिंता जता चुके हैं। 10 दिसंबर को एसएसपी देहरादून की ओर से पत्र लिखकर बताया गया था कि रेंजर्स ग्राउंड के पास दून अस्पताल है और वहां एंबुलेंस का आना जाना लगा रहता है। संडे बाजार के कारण जाम लगने से मरीजों पर सीधा असर पड़ता है। इसी मुद्दे पर 12 दिसंबर को बैठक भी हुई थी, जिसके बाद बाजार शिफ्ट करने का फैसला लिया गया। प्रशासन का कहना है कि संडे बाजार को हटाने या स्थान बदलने का फैसला जनहित में लिया गया है। डीएम देहरादून सविन बंसल के निर्देश पर यह तय किया गया था कि लैंसडाउन चौक के पास रेंजर्स ग्राउंड में लगने वाले इस साप्ताहिक बाजार को आईएसबीटी के पास शिफ्ट किया जाए। तर्क दिया गया कि संडे मार्केट के आसपास कई चौक, तिराहे और मुख्य रास्ते हैं, जहां हर रविवार जाम जैसी स्थिति बन जाती है और पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी प्रभावित होता है।

हालांकि संडे मार्केट का मामला नया नहीं है। इससे पहले भी इसे शिफ्ट करने के आदेश दिए जा चुके हैं। एक बार हरिद्वार बाईपास पर नगर निगम की ओर से जमीन भी आवंटित की गई थी। लेकिन उस समय संडे मार्केट के व्यापारियों ने इसका विरोध किया और मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया था। तभी से यह बाजार शहर के लिए एक स्थायी समस्या बना हुआ है। रेंजर्स ग्राउंड की हालत भी इस बहस में अहम मुद्दा है। जिस मैदान में सालों तक संडे मार्केट लगा, वह कभी एक हरा भरा ऐतिहासिक मैदान हुआ करता था। पहले यह मैदान एफआरआई के अधीन था और चारों तरफ हरियाली दिखाई देती थी। हर साल यहां उत्तराखंड गोल्ड कप क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन होता था, जो करीब 37 साल तक चला। देश के कई नामी क्रिकेटरों ने इसी मैदान पर खेलकर नाम कमाया लेकिन वर्ष 2017 के बाद इस टूर्नामेंट पर रोक लग गई। 2018 के बाद रेंजर्स ग्राउंड में खेल गतिविधियां पूरी तरह बंद हो गईं। धीरे धीरे यह मैदान खेल के बजाय ट्रेड फेयर, संडे मार्केट और पार्किंग के इस्तेमाल में आने लगा। आज हालत यह है कि मैदान के एक कोने में कबाड़ तक पड़ा नजर आता है, जबकि शहर में खेल के लिए मैदानों की भारी कमी है। आईएसबीटी के पास संडे बाजार लगने के बाद अब सवाल फिर खड़ा हो गया है कि आखिर इसका स्थायी हल क्या है। एक ओर व्यापारी अपनी रोजी रोटी की चिंता कर रहे हैं, तो दूसरी ओर आम लोग और यात्री जाम से परेशान हैं। प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह ऐसा स्थान और व्यवस्था तैयार करे, जहां बाजार भी लग सके और शहर की रफ्तार भी न थमे। फिलहाल इतना साफ है कि बिना सही पार्किंग, ट्रैफिक प्लान और व्यापारियों के साथ बातचीत के संडे बाजार को कहीं भी शिफ्ट करने से समस्या खत्म नहीं होगी। देहरादून के लोग चाहते हैं कि शहर की जरूरत और व्यवस्था दोनों के बीच संतुलन बने, ताकि रविवार का बाजार भी लगे और शहर की सड़कों पर जाम का दर्द भी न झेलना पड़े।






