Chamoli Hotel – नया साल मनाने उत्तराखण्ड पहुंचने लगे सैलानी, चमोली के सारे होटल फुल
चमोली- उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित देवाल क्षेत्र इन दिनों सर्दियों के पर्यटन का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। खासकर लोहाजंग और उसके आसपास के इलाके में पर्यटकों की लगातार बढ़ती भीड़ ने पूरे क्षेत्र में रौनक लौटा दी है। पहाड़ों की ठंडी हवा, देवदार के जंगल, ऊंचे बुग्याल और शांत माहौल के बीच नया साल मनाने पहुंचे सैलानियों से देवाल गुलजार नजर आ रहा है। लंबे समय बाद आई इस चहल पहल से स्थानीय व्यापारी, होटल संचालक और गाइड काफी उत्साहित हैं। देवाल का लोहाजंग इलाका सर्दियों में ट्रैकिंग और नेचर टूरिज्म के लिए जाना जाता है। ब्रह्मताल और भेकलताल जैसे प्रसिद्ध ट्रैक इन दिनों पर्यटकों की पहली पसंद बने हुए हैं। सुबह से शाम तक पर्यटकों के छोटे बड़े समूह ट्रैक पर निकलते दिखाई दे रहे हैं। कहीं लोग पहाड़ों के बीच तस्वीरें खींचते नजर आते हैं, तो कहीं ट्रैकिंग के बाद अलाव के पास बैठकर ठंड का मजा लेते हुए नए साल की बातें कर रहे हैं। स्थानीय ट्रैकिंग संस्थाओं और पर्यटन से जुड़े लोगों के अनुसार, रोज हजारों पर्यटक लोहाजंग बेस कैंप तक पहुंच रहे हैं। यूथ हॉस्टल, हिमालय ट्रैक्टर्स और ट्रेक द हिमालय से जुड़े आयोजकों का कहना है कि इस बार नए साल के मौके पर उम्मीद से ज्यादा लोग यहां पहुंचे हैं। भुवन सिंह दानू, लक्ष्मण सिंह राणा, महिपाल सिंह दानू, प्रदीप कुमार और बाबी बिष्ट जैसे स्थानीय पर्यटन आयोजकों का कहना है कि लंबे समय बाद क्षेत्र में ऐसा माहौल बना है, जिससे स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ी है। हालांकि कुछ पर्यटक बर्फ न पड़ने की वजह से थोड़ा निराश भी नजर आए। कई लोग यह सोचकर पहुंचे थे कि उन्हें चारों तरफ बर्फ से ढकी पहाड़ियां देखने को मिलेंगी, लेकिन मौसम के उतार चढ़ाव के कारण अपेक्षित बर्फ नहीं मिली। इसके बावजूद अधिकतर पर्यटक यहां के शांत वातावरण, साफ हवा और प्राकृतिक सुंदरता से संतुष्ट दिखे। कई लोगों ने कहा कि बर्फ न होने के बावजूद लोहाजंग और आसपास का इलाका सर्दियों में भी बेहद खूबसूरत लगता है। पर्यटकों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि क्षेत्र के होटल और होम स्टे पूरी तरह भर चुके हैं। लोहाजंग के होटल व्यवसायी गंगा सिंह पटवाल बताते हैं कि क्षेत्र में कुल 15 होम स्टे और 7 होटल हैं और सभी पहले से बुक हो चुके हैं। नए साल के स्वागत के लिए जो भी पर्यटक आ रहे हैं, उन्हें ठहरने के लिए टेंट की व्यवस्था करनी पड़ रही है। खुले मैदानों में सुरक्षित जगहों पर टेंट लगाए गए हैं, ताकि किसी को परेशानी न हो। स्थानीय लोगों के लिए यह सीजन किसी उत्सव से कम नहीं है। छोटे दुकानदारों की दुकानें देर रात तक खुली रहती हैं। चाय, कॉफी, सूप और पहाड़ी व्यंजनों की मांग काफी बढ़ गई है। टैक्सी चालक, घोड़ा संचालक और पोर्टर भी व्यस्त नजर आ रहे हैं। कई परिवारों के लिए सर्दियों का यह पर्यटन सीजन साल भर की आमदनी का बड़ा सहारा बनता है। ब्रह्मताल और भेकलताल ट्रैक इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। ये ट्रैक न सिर्फ सुंदर नजारों के लिए जाने जाते हैं,

बल्कि अपेक्षाकृत सुरक्षित भी माने जाते हैं। ट्रैकिंग आयोजकों का कहना है कि यहां आने वाले अधिकतर पर्यटक पहली बार पहाड़ों में ट्रैकिंग का अनुभव ले रहे हैं। ऐसे में उन्हें खास सावधानी और मार्गदर्शन की जरूरत होती है। इसी को देखते हुए गाइड और आयोजक हर समूह के साथ जा रहे हैं। पर्यटन बढ़ने के साथ साथ वन विभाग भी पूरी तरह सतर्क है। जंगलों और बुग्यालों की सुरक्षा को लेकर सख्त नियम लागू किए गए हैं। वन क्षेत्राधिकारी मनोज देवराड़ी के अनुसार बिना रजिस्ट्रेशन कोई भी पर्यटक जंगलों में रात नहीं बिता सकता। यह नियम पर्यटकों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि पर्यटन स्थलों पर प्लास्टिक ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। बुग्याल और जंगलों में आग जलाने पर पूरी तरह रोक है, क्योंकि इससे वन संपदा को भारी नुकसान हो सकता है। पर्यटकों को पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे शोर शराबा न करें और नए साल का जश्न शांतिपूर्ण तरीके से मनाएं।
फिलहाल आली वेदनी, ब्रह्मताल और भेकलताल क्षेत्र में करीब 500 पर्यटक मौजूद बताए जा रहे हैं। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भीड़ के बावजूद व्यवस्था बनी रहे। पर्यटकों को समय समय पर जानकारी दी जा रही है कि वे तय रास्तों से ही यात्रा करें और किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी इस बार देखने को मिल रही है। कई पर्यटक अपने साथ कचरा वापस ले जाते नजर आए। ट्रैकिंग आयोजक भी अपने स्तर पर पर्यटकों को समझा रहे हैं कि पहाड़ों की सुंदरता तभी बनी रहेगी, जब हम उसे नुकसान न पहुंचाएं। कुछ जगहों पर स्वयंसेवी समूह भी पर्यटकों को प्लास्टिक मुक्त यात्रा का संदेश देते दिखे। देवाल और लोहाजंग का यह इलाका सिर्फ पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि यहां की संस्कृति और सादगी भी लोगों को आकर्षित करती है। स्थानीय लोग बेहद सादगी से पर्यटकों का स्वागत करते हैं। कई होम स्टे में पर्यटकों को पहाड़ी खाना परोसा जा रहा है, जिससे उन्हें यहां के जीवन को करीब से देखने का मौका मिल रहा है। यह अनुभव कई लोगों के लिए शहर की भागदौड़ से दूर सुकून भरे पल लेकर आया है। नए साल के करीब आते ही यहां का माहौल और उत्साह से भर गया है। रात के समय ठंड काफी बढ़ जाती है, लेकिन अलाव के पास बैठकर लोग गीत संगीत का आनंद लेते हैं। पहाड़ों के बीच नया साल मनाने का सपना लेकर आए लोग इसे अपने जीवन का यादगार अनुभव बता रहे हैं। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि अगर मौसम अनुकूल रहा, तो आने वाले दिनों में पर्यटकों की संख्या और बढ़ सकती है। इसके लिए पहले से तैयारी की जा रही है। स्वास्थ्य, सुरक्षा और यातायात को लेकर भी जरूरी इंतजाम किए गए हैं, ताकि किसी तरह की परेशानी न हो। देवाल का यह पर्यटन सीजन यह भी दिखाता है कि अगर प्राकृतिक संसाधनों का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो पर्यटन स्थानीय लोगों के जीवन में खुशहाली ला सकता है। हालांकि इसके साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। पर्यावरण, जंगल और बुग्याल को बचाए बिना यह विकास टिकाऊ नहीं हो सकता। फिलहाल लोहाजंग, ब्रह्मताल और भेकलताल की वादियों में कदम कदम पर सैलानियों की मौजूदगी बताती है कि पहाड़ आज भी लोगों को अपनी ओर खींचने की ताकत रखते हैं। नए साल की दहलीज पर खड़ा देवाल क्षेत्र उम्मीदों और उत्साह से भरा नजर आ रहा है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि यह चहल पहल बनी रहे, लेकिन प्रकृति की शांति और संतुलन के साथ। यही संतुलन इस खूबसूरत पहाड़ी इलाके का असली भविष्य तय करेगा।






