UTTARAKHAND VOTER – उत्तराखण्ड में 10 जनवरी तक बढ़ा BLO आउटरीच अभियान, 65 फीसदी वोटर्स की मैपिंग पूरी
देहरादून- उत्तराखंड में होने वाले आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण से पहले प्री- विशेष गहन पुनरीक्षण का काम तेजी से चल रहा है। इस प्रक्रिया के तहत पूरे प्रदेश में बीएलओ आउटरीच अभियान चलाया जा रहा है, ताकि हर मतदाता तक पहुंच बनाई जा सके और किसी का भी नाम मतदाता सूची से छूट न जाए। अब इस अभियान को और आगे बढ़ा दिया गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जानकारी दी गई है कि प्रदेश में अब तक करीब 65 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। यह मैपिंग वर्तमान मतदाता सूची को साल 2003 की मतदाता सूची से मिलाकर की जा रही है। कई इलाकों में बीएलओ घर घर जाकर लोगों से मिल रहे हैं, उनसे बात कर रहे हैं और जरूरी जानकारी जुटा रहे हैं। इसी को देखते हुए अभियान की समय सीमा बढ़ाकर अब 10 जनवरी तक कर दी गई है, ताकि बाकी बचे मतदाताओं तक भी बीएलओ आसानी से पहुंच सकें। देहरादून सहित पूरे प्रदेश में इन दिनों बीएलओ मतदाताओं से सीधे संवाद कर रहे हैं। इसका मकसद सिर्फ कागजी प्रक्रिया पूरी करना नहीं है, बल्कि लोगों को यह भरोसा दिलाना भी है कि उनका वोट सुरक्षित है। निर्वाचन विभाग का मानना है कि जब तक हर मतदाता से सीधी बातचीत नहीं होगी, तब तक किसी भी सूची को पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता। प्री विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाताओं की पहचान और रिकॉर्ड को साफ और मजबूत किया जा रहा है। इसमें खास तौर पर यह देखा जा रहा है कि जिन मतदाताओं के नाम साल 2003 की मतदाता सूची में थे, वे मौजूदा सूची में सही तरीके से दर्ज हैं या नहीं। अब तक करीब 65 प्रतिशत मतदाताओं का यह मिलान हो चुका है, जो कम समय में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने आम लोगों से अपील की है कि वे बीएलओ को पूरी जानकारी दें और सहयोग करें। उन्होंने कहा कि बीएलओ का काम सिर्फ नाम चेक करना नहीं है, बल्कि हर मतदाता के मताधिकार की रक्षा करना भी है। इसलिए अगर कोई बीएलओ आपके घर आता है या आपसे संपर्क करता है, तो उससे बातचीत जरूर करें और सही जानकारी साझा करें। उन्होंने यह भी बताया कि इस अभियान में खास नियमों के तहत मैपिंग की जा रही है। जिन मतदाताओं की उम्र 38 साल या उससे ज्यादा है और जिनके नाम साल 2003 की मतदाता सूची में दर्ज हैं, उनकी मैपिंग सीधे बीएलओ एप के जरिए की जा रही है। इससे प्रक्रिया आसान और तेज हो गई है। वहीं जिन मतदाताओं के नाम किसी वजह से साल 2003 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं हैं, लेकिन उनके माता पिता के नाम उस सूची में मौजूद हैं, ऐसे मतदाताओं को भी सूची से बाहर नहीं किया जा रहा है। उनके माता पिता या दादा दादी के नाम के आधार पर उन्हें प्रोजनी के रूप में जोड़ा जा रहा है। इसका मकसद यह है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलती से भी न छूटे। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत उत्तराखंड में यह अभियान 1 दिसंबर 2025 से शुरू किया गया था। मुख्य निर्वाचन अधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम की पहल पर ईआरओ, बीएलओ और फील्ड अधिकारियों की टीम ने कम समय में यह बड़ा काम किया है।

अधिकारी लगातार फील्ड में रहकर लोगों से मिल रहे हैं और समस्याएं भी सुन रहे हैं। निर्वाचन विभाग का कहना है कि मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ही अभियान को 10 जनवरी तक बढ़ाया गया है। पहाड़ी इलाकों और दूरदराज के गांवों में कई बार मौसम और रास्तों की वजह से दिक्कत आती है। ऐसे में समय बढ़ने से बीएलओ को भी राहत मिलेगी और मतदाताओं तक पहुंच आसान होगी। मतदाताओं के लिए यह भी जानकारी दी गई है कि साल 2003 की मतदाता सूची ऑनलाइन देखी जा सकती है। इसके लिए लोग www.ceo.uk.gov.in और www.voters.eci.gov.in वेबसाइट पर जाकर अपना या अपने परिवार का नाम खोज सकते हैं। अगर किसी को लगता है कि उसके नाम में गलती है या नाम छूट गया है, तो वह बीएलओ से संपर्क कर सकता है। इस पूरे अभियान का भावनात्मक पहलू भी कम अहम नहीं है। वोट देना सिर्फ एक अधिकार नहीं, बल्कि लोकतंत्र में हिस्सेदारी का सबसे मजबूत जरिया है। कई बुजुर्ग मतदाता ऐसे हैं, जिनका नाम सालों से सूची में है और वे चाहते हैं कि उनकी पहचान और अधिकार सुरक्षित रहें। वहीं युवा मतदाता भी पहली बार या हाल ही में जुड़े हैं, जिनके लिए यह प्रक्रिया भरोसे की तरह है। निर्वाचन विभाग का साफ कहना है कि लक्ष्य सिर्फ आंकड़े पूरे करना नहीं है, बल्कि एक ऐसी मतदाता सूची तैयार करना है, जिस पर हर नागरिक भरोसा कर सके। आने वाले दिनों में जैसे जैसे मैपिंग आगे बढ़ेगी, विभाग की कोशिश रहेगी कि हर मतदाता तक पहुंच बनाई जाए और किसी को भी असमंजस या डर में न रखा जाए।






