#Home #Uttarakhand

New Year Uttarakhand – कौसानी में बर्फीली चोटियों के बीच सैलानियों ने मनाया नया साल, बड़े शहरों से पहुंची भीड़

कौसानी- साल 2026 की शुरुआत पर उत्तराखंड के शांत और सुंदर पर्यटन स्थल कौसानी में सैलानियों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। दिल्ली, मुंबई, गुजरात और उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों से आए पर्यटक यहां नए साल का स्वागत करने पहुंचे। लोगों को यहां से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों को नजदीक से देखने का मौका मिला, जिसने नए साल की सुबह को यादगार बना दिया। नए साल के मौके पर कौसानी से नंदा देवी, त्रिशूल और पंचाचूली जैसी प्रसिद्ध चोटियां साफ दिखाई दीं। खुले आसमान और ठंडी हवा के बीच जब सुबह की पहली धूप इन चोटियों पर पड़ी, तो पूरा नजारा किसी चित्र की तरह नजर आया। कई पर्यटक सिर्फ इसी पल के लिए कौसानी पहुंचे थे। कुछ लोग कैमरे में इस दृश्य को कैद करते नजर आए, तो कुछ बस खामोशी में हिमालय को निहारते रहे। इकतीस दिसंबर की रात कौसानी में जश्न का माहौल रहा। होटल और रिसार्ट्स में कैंप फायर का इंतजाम किया गया था। कुमाऊंनी लोक संगीत की धुनों पर पर्यटक थिरकते दिखे। दिल्ली, मुंबई और गुजरात से आए सैलानियों ने बताया कि वे शोर शराबे वाले हिल स्टेशनों से दूर, एक सुकून भरी जगह की तलाश में कौसानी आए हैं। यहां का शांत वातावरण और साफ हवा उन्हें बहुत भा रही है। रात बारह बजे तक होटल और रेस्टोरेंट में नए साल के स्वागत के कार्यक्रम चलते रहे। कुमाऊं के पारंपरिक व्यंजन जैसे मंडुए की रोटी, भट्ट की दाल और स्थानीय मिठाइयों का लोगों ने खूब स्वाद लिया। कई पर्यटकों ने कहा कि यहां का खाना और मेहमाननवाजी इस जगह को और खास बना देती है। नए साल की सुबह पर्यटकों की शुरुआत कौसानी की मशहूर चाय के साथ हुई। हल्की ठंड और ताजगी भरी हवा में चाय की चुस्की लेते हुए लोगों ने हिमालय दर्शन किया। हालांकि कुछ देर के लिए हल्के बादल और कोहरा भी छाया रहा, लेकिन जैसे ही आसमान साफ हुआ, सामने हिमालय की लंबी श्रृंखला दिखाई दी। इस नजारे ने लोगों की सारी थकान उतार दी। कौसानी आए सैलानी सिर्फ होटल तक ही सीमित नहीं रहे। बड़ी संख्या में लोग अनासक्ति आश्रम, रुद्रधारी मंदिर और सुमित्रानंदन पंत संग्रहालय भी पहुंचे। अनासक्ति आश्रम में महात्मा गांधी से जुड़ी यादों को देखकर लोग भावुक नजर आए। वहीं रुद्रधारी मंदिर के आसपास की प्राकृतिक सुंदरता ने पर्यटकों को खासा आकर्षित किया। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय कौसानी का नजारा सबसे ज्यादा मन को छू लेने वाला रहा। जब उगता सूरज बर्फीली चोटियों को सुनहरी रंग में रंग देता है, तो हर कोई कुछ पल के लिए वहीं ठहर जाता है। कई पर्यटकों ने कहा कि उन्होंने ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा था और यह पल उनके लिए नए साल का सबसे बड़ा तोहफा है। इस बार कौसानी में नए साल के स्वागत को और खास बनाने के लिए पहली बार पारंपरिक छलिया महोत्सव का आयोजन भी किया गया। स्थानीय कलाकारों ने कुमाऊं की लोक संस्कृति और नृत्य की प्रस्तुति दी। ढोल और दमाऊं की थाप पर छलिया नृत्य देखकर पर्यटक बेहद खुश नजर आए। कई सैलानियों ने मोबाइल से वीडियो बनाए और स्थानीय कलाकारों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों से न सिर्फ पर्यटकों को उत्तराखंड की परंपरा समझने का मौका मिलता है, बल्कि स्थानीय कलाकारों को भी पहचान मिलती है। नए साल पर कौसानी में यह आयोजन लोगों के लिए एक नया और यादगार अनुभव बन गया। कुल मिलाकर नए साल पर कौसानी ने सैलानियों को शांति, प्रकृति और संस्कृति तीनों का संगम दिया। भीड़ भाड़ से दूर हिमालय की गोद में बैठकर नए साल की शुरुआत करना कई लोगों के लिए सुकून भरा अनुभव रहा। पर्यटकों का कहना है कि वे यहां से सिर्फ तस्वीरें नहीं, बल्कि यादों का एक खूबसूरत हिस्सा लेकर लौट रहे हैं।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *