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Ankita Bhandari Case – अंकिता भंडारी हत्याकांड में फेक वीडियो से बवाल, पीएम और सीएम के फर्जी वीडियो वायरल करने वाले नपेंगे

देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह तकनीक का गलत इस्तेमाल है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम से बनाए गए फर्जी वीडियो और एआई तकनीक से अश्लील तस्वीरें तैयार करने के मामले में पुलिस ने सख्त कदम उठाया है। साइबर क्राइम पुलिस ने इस संबंध में दो अलग अलग मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, एआई और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चेहरे और आवाज की हूबहू नकल वाले वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाए गए। इन फर्जी वीडियो में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर ऐसे बयान दिखाए गए, जिनका सच्चाई से कोई लेना देना नहीं है। इन वीडियो से लोगों को गुमराह करने और समाज में तनाव फैलाने की आशंका जताई गई है। पहला मामला सहस्रधारा रोड निवासी रोहित शर्मा की शिकायत पर दर्ज किया गया है। रोहित शर्मा ने खुद को एक सामान्य जागरूक नागरिक बताया है। उन्होंने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं, लेकिन अंकिता जैसे संवेदनशील मामले में इस तरह की झूठी और भ्रामक सामग्री देखकर उन्हें बेहद दुख और गुस्सा हुआ। उनका कहना है कि इस तरह के फर्जी वीडियो न केवल संवैधानिक पदों की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि लोगों की भावनाओं को भड़काकर कानून व्यवस्था बिगाड़ने का खतरा भी पैदा करते हैं। रोहित शर्मा ने कहा कि एआई और डीपफेक तकनीक का ऐसा गलत इस्तेमाल समाज के लिए खतरनाक है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इसी सोच के साथ उन्होंने पुलिस से शिकायत की, ताकि ऐसे लोगों और प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई हो सके जो इस तरह की सामग्री फैला रहे हैं। दूसरा मामला ऋषिकेश के गुमानीवाला निवासी संजय सिंह राणा ने दर्ज कराया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उपलब्ध ग्रोक एआई के खिलाफ शिकायत दी है। संजय सिंह राणा का आरोप है कि जहां कई दूसरे एआई प्लेटफॉर्म कानून और साइबर सुरक्षा नियमों का पालन करते हैं, वहीं ग्रोक एआई पर गंभीर और आपत्तिजनक काम हो रहे हैं। संजय सिंह राणा ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि ग्रोक एआई पर किसी भी व्यक्ति की सामान्य तस्वीर को भी अश्लील रूप में बदला जा सकता है। इस बात की पुष्टि के लिए उन्होंने खुद की एक साधारण फोटो, जिसमें वह पूरी तरह कपड़ों में थे, ग्रोक एआई पर अपलोड की। कुछ ही पलों में उनकी फोटो को अश्लील रूप में बदल दिया गया। उन्होंने उस फोटो का स्क्रीनशॉट लेकर पुलिस को सबूत के तौर पर सौंपा है। उन्होंने इसे डिजिटल यौन उत्पीड़न, निजी जीवन में दखल और महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला काम बताया। उनका कहना है कि अगर इस तरह की तकनीक को खुली छूट दी गई तो आम लोग, खासकर महिलाएं, इसके सबसे बड़े शिकार बन सकते हैं। उन्होंने ऐसे एआई प्लेटफॉर्म और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। एसटीएफ के एसएसपी नवनीत सिंह ने बताया कि दोनों मामलों में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जांच के लिए विशेषज्ञ टीम बनाई गई है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि ये फर्जी वीडियो और अश्लील तस्वीरें किसने बनाई, कहां से अपलोड की गईं और इनके पीछे किसका हाथ है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद जो भी लोग या प्लेटफॉर्म दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एआई और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल अपराध और भ्रम फैलाने के लिए किया जाना बेहद गंभीर मामला है। खासकर अंकिता भंडारी जैसे संवेदनशील मामले में इस तरह की हरकतें लोगों की भावनाओं को आहत करती हैं और समाज में अविश्वास बढ़ाती हैं। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि वे किसी भी फर्जी वीडियो या आपत्तिजनक सामग्री को बिना जांचे आगे न फैलाएं। अगर किसी को इस तरह की सामग्री दिखाई दे, तो तुरंत साइबर क्राइम पुलिस को जानकारी दें। प्रशासन का कहना है कि तकनीक का इस्तेमाल समाज के भले के लिए होना चाहिए, न कि झूठ, डर और अश्लीलता फैलाने के लिए।

Ankita Bhandari Case – अंकिता भंडारी हत्याकांड में फेक वीडियो से बवाल, पीएम और सीएम के फर्जी वीडियो वायरल करने वाले नपेंगे

CM Dhami will take major action in

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