Telangana Government – माता-पिता की उपेक्षा पड़ी महंगी पड़ेगी: तेलंगाना सरकार का सख्त और संवेदनशील फैसला
नई दिल्ली – तेलंगाना सरकार समाज में पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में राज्य सरकार उन सरकारी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी में है, जो अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल नहीं करते। सरकार का स्पष्ट संदेश है—माता-पिता की सेवा केवल नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है।
सोमवार, 12 जनवरी को मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इस प्रस्तावित फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे बुजुर्ग हैं, जिन्हें उनके अपने बच्चे बेसहारा छोड़ चुके हैं। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए सरकार आगामी बजट सत्र में एक अहम विधेयक पेश करेगी।
सैलरी से होगी 10 से 15 फीसदी कटौती
मुख्यमंत्री के अनुसार, नए विधेयक के तहत यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करता पाया गया, तो उसके वेतन से 10 से 15 प्रतिशत तक की कटौती की जाएगी। खास बात यह है कि यह राशि सरकार के पास नहीं जाएगी, बल्कि सीधे माता-पिता के बैंक खाते में जमा कराई जाएगी। इससे बुजुर्गों को आर्थिक सहारा मिलेगा और बच्चों की जिम्मेदारी भी तय होगी।
सीएम रेवंत रेड्डी ने दो टूक कहा, “जो लोग अपने माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं निभा सकते, वे समाज के प्रति भी ईमानदार नहीं हो सकते।” उनका मानना है कि पारिवारिक संस्कार ही एक स्वस्थ और संवेदनशील समाज की नींव होते हैं।

बुजुर्गों के लिए ‘प्रणाम’ डे-केयर सेंटर
सरकार केवल दंडात्मक कदम ही नहीं उठा रही, बल्कि बुजुर्गों के कल्याण के लिए सुविधाएं भी विकसित कर रही है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के लिए ‘प्रणाम’ नाम से डे-केयर सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों में बुजुर्गों को स्वास्थ्य सुविधाएं, सामाजिक गतिविधियां और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।
सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी बुजुर्ग माता-पिता द्वारा अपने बच्चों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो उसे बेहद गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, “यह कोई सख्ती नहीं, बल्कि एक मानवीय पहल है, ताकि हमारे बुजुर्ग सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जी सकें।
ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए भी बड़ा ऐलान इसी मंच से मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सामाजिक समावेशन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय के सशक्तिकरण के लिए ठोस कदम उठाएगी। आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में हर नगर निगम में एक सह-सदस्य पद ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए आरक्षित किया जाएगा।
समाज को संदेश तेलंगाना सरकार का यह फैसला न केवल प्रशासनिक, बल्कि सामाजिक चेतना से जुड़ा हुआ है। यह कदम उस सोच को चुनौती देता है, जिसमें बुजुर्गों को बोझ समझ लिया जाता है। सरकार का यह निर्णय पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकता है, जहां कानून के साथ-साथ संवेदना को भी प्राथमिकता दी गई है।
संक्षेप में, तेलंगाना सरकार ने साफ कर दिया है— माता-पिता की सेवा सम्मान है, और उसकी अनदेखी की कीमत चुकानी होगी।






