NEET पेपर लीक का असली सरगना कौन?
देश की सबसे अहम मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET एक बार फिर विवादों में घिर गई है। लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा में पेपर लीक का मामला अब केवल एक लीक तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह एक बड़े संगठित गिरोह का रूप ले चुका है। सीबीआई की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस पूरे नेटवर्क की नई परतें सामने आती जा रही हैं।
सीबीआई सूत्रों के अनुसार, एनटीए यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से परीक्षा के दोनों सेट बाहर पहुंचे थे। जांच में पता चला है कि एनटीए ने नीट परीक्षा के लिए दो अलग-अलग प्रश्नपत्र तैयार करवाए थे। एक सेट परीक्षा में उपयोग किया गया जबकि दूसरा रिजर्व के तौर पर सुरक्षित रखा गया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि रिजर्व सेट के सवाल भी कथित क्वेश्चन बैंक में पाए गए। इससे यह संकेत मिलता है कि आरोपियों की पहुंच सिर्फ एक पेपर तक नहीं बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली तक थी।

अब तक की जांच में कई अहम नाम सामने आए हैं। इनमें मनीषा पंधारे, मनीषा वाघमारे और प्रहलाद कुलकर्णी जैसे लोग शामिल बताए जा रहे हैं। सीबीआई का कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं था बल्कि कई लोगों की साझेदारी से यह पूरा रैकेट संचालित किया जा रहा था। जांच एजेंसी के मुताबिक इस नेटवर्क में पेपर तक पहुंच रखने वाले विशेषज्ञ, छात्रों तक सवाल पहुंचाने वाले एजेंट और विशेष क्लासेस चलाने वाले लोग आपस में जुड़े हुए थे।
सीबीआई अब केवल पेपर लीक की नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क के मुख्य सूत्रधार की तलाश कर रही है। एजेंसी को अंदेशा है कि इस मामले में और भी बड़े चेहरे सामने आ सकते हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वे कौन लोग थे जिन्होंने परीक्षा से पहले ही छात्रों तक प्रश्न पहुंचा दिए?

इस मामले को लेकर राहुल गांधी ने भी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में गड़बड़ी होना देश के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से जवाब मांगते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत पद छोड़ना चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
सीबीआई के रिमांड नोट में सबसे ज्यादा चर्चा प्रहलाद कुलकर्णी के नाम की हो रही है। जांच एजेंसी का दावा है कि जिन स्पेशल क्लासेस में छात्रों को पढ़ाया गया, वहां पढ़ाए गए कई सवाल असली परीक्षा में पूछे गए। अब सवाल उठता है कि क्या कुलकर्णी सिर्फ एक शिक्षक थे या पूरे नेटवर्क के मुख्य संचालक?

जांच में यह भी सामने आया है कि छात्रों को केवल सवाल ही नहीं दिए गए, बल्कि उन्हें परीक्षा का पैटर्न समझाया गया, नोटबुक में प्रश्न लिखवाए गए और किताबों में खास निशान भी लगवाए गए। यानी यह सिर्फ पेपर लीक नहीं बल्कि पूरी तरह से योजनाबद्ध ट्रेनिंग सिस्टम था।
सीबीआई अब उन गुप्त ठिकानों की तलाश कर रही है जहां ये विशेष क्लासेस चलाई जाती थीं। एजेंसी को शक है कि असली सरगना वही लोग हैं जिन्होंने पेपर तक पहुंच, पैसों का लेनदेन और छात्रों की व्यवस्था — इन तीनों को जोड़कर पूरे नेटवर्क को चलाया।

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि मनीषा वाघमारे और मनीषा मंधारे दोनों एक ही सोसाइटी में कई सालों से रह रही थीं। बताया जा रहा है कि मनीषा वाघमारे छात्रों तक पेपर पहुंचाने का काम करती थी जबकि मनीषा मंधारे से पूछताछ जारी है। सीबीआई को शक है कि इस नेटवर्क से जुड़े कई अहम दस्तावेज वाघमारे के घर में मौजूद हो सकते हैं।
यह मामला अब सिर्फ परीक्षा में गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा बल्कि एनटीए की साख पर भी बड़ा सवाल बन गया है। क्योंकि जांच में ऐसे लोगों के नाम सामने आए हैं जिनका सीधा संबंध परीक्षा प्रक्रिया से बताया जा रहा है। कुछ सूत्रों का कहना है कि आरोपी सीधे एनटीए अधिकारियों के संपर्क में थे।

बढ़ते दबाव के बीच अब एनटीए में नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इनमें आईआरएस अधिकारी आकाश जैन का नाम भी शामिल है। सरकार का दावा है कि एनटीए को पहले से ज्यादा पारदर्शी और मजबूत बनाया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है। आखिर इतने गोपनीय पेपर तक पहुंच कैसे मिली? क्या गिरफ्तार आरोपी ही इस पूरे खेल के असली सरगना हैं या इनके पीछे और भी बड़े चेहरे छिपे हुए हैं?
करीब 22 लाख छात्रों ने दिन-रात मेहनत करके नीट परीक्षा दी थी। लेकिन पेपर लीक की खबरों ने उनकी मेहनत और भरोसे दोनों को गहरा झटका दिया है। अब पूरा देश सिर्फ एक जवाब चाहता है — आखिर इस पूरे खेल का असली मास्टरमाइंड कौन है?






