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कॉकरोच जनता पार्टी: सत्ता के अंधेरों में जन्मी ‘कॉकरोच राजनीति’

जब व्यवस्था की सफाई करने वाले ही गंदगी को ढोने लगें, तब अंधेरे कोनों से अक्सर एक नया प्रतीक जन्म लेता है। इस बार वह प्रतीक बना है “कॉकरोच”। सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन देश में अब “कॉकरोच जनता पार्टी” यानी CJP नाम का एक नया व्यंग्यात्मक राजनीतिक संगठन सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा छेड़ दी है।

इस पूरे विवाद की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी से हुई। उनकी मौखिक टिप्पणी को कई लोगों ने बेरोजगार युवाओं के अपमान के रूप में देखा। हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान फर्जी डिग्री लेकर कानून और मीडिया जैसे क्षेत्रों में घुसने वालों के लिए था, न कि नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए। लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर बहस तेज हो चुकी थी।

इसी माहौल में 16 मई को अभिजीत डिपके नाम के युवक ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर “कॉकरोच जनता पार्टी” की घोषणा की और लोगों से जुड़ने की अपील की। यह कोई चुनाव लड़ने वाली पार्टी नहीं, बल्कि एक सटायर यानी व्यंग्यात्मक राजनीतिक मंच है, जो सिस्टम के प्रति युवाओं की नाराज़गी को दर्शाने का दावा करता है।

पार्टी में शामिल होने के लिए चार “योग्यताएं” बताई गई हैं, जो खुद में व्यंग्य हैं। पहली — बेरोजगार होना। दूसरी — आलसी या “डले रहो” वाली मानसिकता। तीसरी — हमेशा ऑनलाइन रहने की आदत। और चौथी — प्रोफेशनल तरीके से भड़ास निकालने की कला।

पार्टी बनाने वाले अभिजीत फिलहाल अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन की पढ़ाई कर रहे हैं। वे पहले आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम में वालंटियर भी रह चुके हैं। उनका कहना है कि “अगर युवाओं को अपनी आवाज उठाने के लिए कॉकरोच कहलाना पड़ता है, तो हम इस पहचान को अपनाने के लिए तैयार हैं।”

पार्टी की टैगलाइन है — “आलसी और बेरोजगारों की आवाज।” वे दावा करते हैं कि यह मंच उन लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जिन्हें सिस्टम ने नजरअंदाज कर दिया है।

CJP का मेनिफेस्टो भी काफी तीखा और व्यंग्य से भरा हुआ है। पार्टी ने पांच बड़े वादे किए हैं:

रिटायरमेंट के बाद किसी भी मुख्य न्यायाधीश को राज्यसभा जैसी राजनीतिक नियुक्ति नहीं दी जाएगी।

अगर किसी का वैध वोट हटाया गया, तो संबंधित चुनाव अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई होगी।

महिलाओं को संसद और कैबिनेट में 50% आरक्षण दिया जाएगा।

बड़े कॉर्पोरेट घरानों के टीवी चैनलों और एंकर्स की वित्तीय जांच होगी।

जो नेता पार्टी बदलेंगे, उन्हें 20 साल तक चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिलेगी।

अभिजीत का कहना है कि उनकी विचारधारा गांधी, अंबेडकर और नेहरू से प्रेरित है। वे इसे धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी और जाति विरोधी मंच बताते हैं। उनके अनुसार देश का युवा धीरे-धीरे सिस्टम से भरोसा खो रहा है क्योंकि उसे लगता है कि उसकी समस्याएं कोई सुन नहीं रहा।

“कॉकरोच” को प्रतीक बनाने के पीछे भी एक सोच है। अभिजीत के मुताबिक कॉकरोच हर परिस्थिति में खुद को ढाल लेता है और मुश्किल हालात में भी जिंदा रहता है। यही आज के युवाओं की मजबूरी और संघर्ष का प्रतीक है।

हालांकि CJP खुद को सिर्फ एक व्यंग्यात्मक मंच बताती है, लेकिन इसकी लोकप्रियता यह दिखाती है कि देश का एक वर्ग व्यवस्था से गहरी नाराज़गी महसूस कर रहा है। सवाल सिर्फ कॉकरोच का नहीं, बल्कि उस गुस्से और निराशा का है जो धीरे-धीरे युवाओं के भीतर जमा हो रही है।

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