कांवड़ मेले के बाद हरिद्वार में सफाई की बड़ी चुनौती, कूड़ा हटाने में जुटा नगर निगम 12 दिन में हुआ 7000 मीट्रिक टन कूड़ा!
हरिद्वार में 12 दिनों तक चले कांवड़ मेले के बाद अब धर्मनगरी को फिर से स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने की बड़ी चुनौती सामने है। इस वर्ष कांवड़ मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और प्रशासन के अनुसार करीब 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार कांवड़िये हरिद्वार पहुंचे। मेले के दौरान शहर और गंगा घाटों पर लगभग 7 हजार मीट्रिक टन कूड़ा जमा होने का अनुमान है। कूड़े के इस बड़े ढेर को हटाने के लिए नगर निगम ने विशेष सफाई अभियान शुरू कर दिया है।
कांवड़ मेला 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त को समाप्त हुआ। मेले के दौरान हरकी पैड़ी, कनखल, ज्वालापुर, सप्तऋषि और आसपास के क्षेत्रों में लगातार श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। अंतिम दिन भी लाखों कांवड़िये गंगाजल लेकर अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए। प्रशासन के मुताबिक अकेले अंतिम दिन करीब 36 लाख 62 हजार कांवड़िये हरिद्वार से जल लेकर निकले।
मेले के दौरान सफाई व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नगर निगम की टीमें लगातार काम करती रहीं, लेकिन श्रद्धालुओं की भारी संख्या के कारण बड़ी मात्रा में कचरा जमा हो गया। अब मेला समाप्त होने के बाद नगर निगम ने घाटों, सड़कों और शहर के विभिन्न हिस्सों की सफाई के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों और मशीनों को मैदान में उतार दिया है। कूड़ा उठाने के लिए बुलडोजर और अन्य संसाधनों की मदद भी ली जा रही है।

हरकी पैड़ी समेत गंगा के प्रमुख घाटों को साफ करना प्रशासन की प्राथमिकता में है। नगर निगम की टीमें घाटों से कूड़ा उठाने के साथ-साथ उसे अलग-अलग श्रेणियों में बांट रही हैं। सूखा कचरा, गीला कचरा, प्लास्टिक और कपड़ों को अलग करके उनके उचित निस्तारण की व्यवस्था की जा रही है।
डाक कांवड़ के दौरान भी कूड़े की मात्रा तेजी से बढ़ी। बताया गया कि केवल दो दिनों में ही शहर में करीब 1700 मीट्रिक टन कूड़ा जमा हो गया था। इसके अलावा श्रद्धालुओं द्वारा छोड़े गए कपड़ों की मात्रा भी काफी अधिक रही। प्रशासन के अनुसार इस वर्ष करीब दो हजार मीट्रिक टन से अधिक कपड़ों को रिसाइकिल कर उनसे कपास तैयार करने की योजना है। इससे कचरे के निस्तारण के साथ-साथ रिसाइक्लिंग को भी बढ़ावा मिलेगा।
नगर आयुक्त नंदन कुमार ने हरकी पैड़ी पहुंचकर सफाई अभियान का जायजा लिया और अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दिए। नगर निगम की कोशिश है कि प्रमुख घाटों से कूड़ा जल्द से जल्द हटाकर उन्हें दोबारा श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ और व्यवस्थित बनाया जाए। सफाई कर्मचारियों को अलग-अलग शिफ्ट में लगाया गया है, ताकि अभियान लगातार जारी रह सके। कांवड़ मेले के बाद पूरे हरिद्वार जिले में भी विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने अभियान की रूपरेखा तैयार की है। यह विशेष अभियान 12 अगस्त से 18 अगस्त तक चलेगा।

अभियान में केवल नगर निगम ही नहीं, बल्कि जिले के विभिन्न विभागों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की गई है। अधिकारियों का उद्देश्य है कि कांवड़ मेले के दौरान जमा हुए कचरे को जल्द हटाने के साथ-साथ शहर और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को भी मजबूत किया जाए।
हरिद्वार के लिए कांवड़ मेला धार्मिक आस्था और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। हर साल करोड़ों श्रद्धालु यहां गंगा जल लेने पहुंचते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने से सफाई और कचरा प्रबंधन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। इस बार करीब 4.80 करोड़ श्रद्धालुओं की मौजूदगी और हजारों टन कचरे के बाद यह चुनौती और भी बड़ी हो गई है।
अब प्रशासन और नगर निगम की कोशिश है कि अगले कुछ दिनों में हरिद्वार के घाटों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को पूरी तरह साफ कर दिया जाए। इसके लिए मशीनों के साथ बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारियों को लगाया गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन अपने विशेष अभियान के तहत कितनी तेजी से कूड़े का निस्तारण कर हरिद्वार की स्वच्छता व्यवस्था को सामान्य स्थिति में वापस ला पाता है।





