हरिद्वार के गुड़ की बदली तकदीर! ODOP ने दिलाई देश-विदेश में पहचान, किसानों की बढ़ी कमाई…
हरिद्वार। कभी गांव के पारंपरिक कोल्हुओं और स्थानीय बाजारों तक सीमित रहने वाला हरिद्वार का गुड़ अब देश की सीमाओं को पार कर अपनी अलग पहचान बना रहा है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना ने हरिद्वार के पारंपरिक गुड़ उद्योग को नई दिशा दी है। बेहतर पैकेजिंग, आधुनिक तकनीक और बदलते बाजार के साथ अब यहां का गुड़ देश के बड़े शहरों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बना रहा है।
हरिद्वार के लक्सर, रुड़की और भगवानपुर क्षेत्र गन्ने की खेती के लिए लंबे समय से जाने जाते हैं। उच्च गुणवत्ता वाले गन्ने से तैयार होने वाला यहां का गुड़ अपने स्वाद और पारंपरिक निर्माण प्रक्रिया के कारण खास पहचान रखता है। ODOP के तहत इसे एक संगठित बाजार उपलब्ध होने से किसानों, कोल्हू संचालकों और इससे जुड़े छोटे कारोबारियों को नए अवसर मिल रहे हैं।

पहले हरिद्वार का गुड़ मुख्य रूप से खुले रूप में स्थानीय बाजारों में बिकता था। अब तस्वीर बदल रही है। आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग ने इसे एक प्रीमियम उत्पाद का रूप देना शुरू कर दिया है। सादा गुड़ के साथ अब सौंफ, इलायची, तिल, मूंगफली, अदरक, अजवाइन और ड्राई फ्रूट्स जैसे फ्लेवर में भी गुड़ तैयार किया जा रहा है। आकर्षक पैकेजिंग और बेहतर हाइजीन के कारण इन उत्पादों की बाजार में मांग बढ़ी है।
ODOP के तहत गुड़ उद्योग को बढ़ावा मिलने से गन्ना किसानों के लिए स्थानीय स्तर पर बाजार के नए विकल्प तैयार हुए हैं। गुड़ बनाने वाले कोल्हुओं और क्रशरों में गन्ने की मांग बढ़ने से किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए अतिरिक्त बाजार मिल रहा है। लक्सर क्षेत्र के किसान रामपाल सिंह के मुताबिक, पहले गन्ने के भुगतान के लिए चीनी मिलों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब स्थानीय कोल्हुओं में गन्ने की मांग बढ़ने से उन्हें अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।
रुड़की क्षेत्र में लंबे समय से गुड़ बनाने के कारोबार से जुड़े शमशेर अली बताते हैं कि ODOP के बाद पारंपरिक कारोबार में आधुनिक बदलाव देखने को मिला है। बेहतर स्वच्छता, पैकेजिंग और उत्पादों की नई किस्मों ने गुड़ को पहले के मुकाबले ज्यादा आकर्षक बना दिया है। फ्लेवर्ड और ड्राई फ्रूट्स वाले गुड़ की कीमत सामान्य गुड़ से कहीं अधिक मिल रही है। इससे छोटे उत्पादकों और कारीगरों के लिए कमाई के नए रास्ते खुले हैं।

हरिद्वार के गुड़ उद्योग का विस्तार केवल किसानों तक सीमित नहीं है। इसके साथ जुड़े मजदूरों, कारीगरों, पैकेजिंग कर्मचारियों, परिवहन कारोबारियों और छोटे उद्यमियों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। युवा उद्यमी अब पारंपरिक गुड़ को आधुनिक ब्रांड में बदलकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में बेच रहे हैं। इससे गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं।
हरिद्वार के गुड़ को ODOP के तहत बढ़ावा मिलने से यह सिर्फ एक पारंपरिक खाद्य उत्पाद नहीं रह गया है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और ग्रामीण उद्यमिता का नया उदाहरण बन रहा है। सरकार की कोशिश है कि स्थानीय उत्पादों को बेहतर तकनीक, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसानों और छोटे उत्पादकों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सके।
हरिद्वार का गुड़ अब यही संदेश दे रहा है कि अगर स्थानीय हुनर को सही बाजार और आधुनिक पहचान मिल जाए, तो गांव की मिट्टी से निकला उत्पाद भी वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना सकता है।





