वन्यजीव हमलों की सूचना पर 30 मिनट में पहुंचेगी टीम, धामी ने पौढ़ी के डीएफओ को हटाया
पौढ़ी गढ़वाल- उत्तराखंड में वन्यजीव हमलों का बढ़ना अब आम लोगों की रोजमर्रा की बड़ी चिंता बन गया है। खासकर पौड़ी गढ़वाल जैसे इलाकों में पिछले कुछ महीनों में तेंदुए और अन्य जंगली जानवरों के हमलों ने कई परिवारों को गहरी पीड़ा दी है। इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में एक बड़ी समीक्षा बैठक बुलाई थी, जिसमें वन विभाग की कार्यप्रणाली से लेकर पीड़ित परिवारों की मदद तक हर मुद्दे पर सख्त निर्णय लिए गए।
मुख्यमंत्री धामी ने बैठक की शुरुआत ही बेहद स्पष्ट शब्दों में की। उन्होंने कहा कि अब किसी भी वन्यजीव हमले की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम को घटना स्थल पर पहुंचने में अधिकतम 30 मिनट लगने चाहिए। यदि टीम देर से पहुंचती है, तो इसकी जिम्मेदारी सीधे डीएफओ और रेंजर पर तय की जाएगी। इसके बाद कार्रवाई में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
पौड़ी में हाल ही में हुए कई हमलों पर मुख्यमंत्री धामी ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने वहां के डीएफओ को तुरंत हटाने के आदेश दिए और कहा कि संवेदनशील इलाकों में अधिकारियों की तैनाती उनके अनुभव और जिम्मेदारी निभाने की क्षमता के आधार पर की जाएगी। मुख्यमंत्री का यह निर्णय उन ग्रामीणों के लिए राहत की खबर है, जो कई महीनों से डर और असुरक्षा में जी रहे हैं।
बैठक में बच्चों की सुरक्षा पर भी विशेष चर्चा हुई। कई इलाकों में बच्चे सुबह स्कूल जाते समय खतरे में रहते हैं। इस स्थिति को समझते हुए मुख्यमंत्री धामी ने निर्देश दिए कि संवेदनशील गांवों में स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए एस्कॉर्ट सुविधा शुरू की जाए। इसके तहत वन विभाग और जिला प्रशासन की टीमें बच्चों को सुरक्षित तरीके से स्कूल ले जाएंगी और वापस घर छोड़ेंगी। जिन गांवों में अस्थायी वाहन चल रहे हैं, उन्हें और मजबूत सहायता दी जाएगी ताकि किसी भी बच्चे की सुरक्षा में कमी न रहे।
मानव वन्यजीव संघर्ष में परिवार का एक कमाने वाला सदस्य खो देना, किसी भी घर के लिए सबसे बड़ा आघात होता है। इसलिए मुख्यमंत्री ने वन विभाग को दो सप्ताह के अंदर एक विशेष आर्थिक सहायता नीति तैयार करने को कहा, जिससे ऐसे प्रभावित परिवारों को तुरंत मदद मिल सके। गंभीर रूप से घायल लोगों और मृतकों के परिवारों की सहायता राशि में देरी न हो, इसके लिए भी सख्त निर्देश दिए गए।
बैठक में तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अब निगरानी और रेस्क्यू ऑपरेशन सिर्फ पारंपरिक तरीकों पर निर्भर नहीं रह सकते। उन्होंने वन अधिकारियों को निर्देश दिया कि ड्रोन, हाई रिजॉल्यूशन कैमरे, सर्च लाइट, मजबूत पिंजरे और अलार्म सिस्टम जैसे आधुनिक उपकरण तुरंत खरीदे जाएं और संवेदनशील गांवों में लगाए जाएं। साथ ही झाड़ियों की सफाई, नियमित गश्त और ग्रामीणों के साथ जागरूकता बैठकों को भी जरूरी बताया गया।
सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है। इंसानों की जान की सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन वन्यजीवों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि दोनों प्राथमिकताओं को साथ लेकर चलना ही राज्य का भविष्य सुरक्षित करेगा। यह सिर्फ सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि पहाड़ों के जीवन, संस्कृति और जंगलों के संतुलन का भी सवाल है।
समीक्षा बैठक में अपर पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार, वी मुरुगेशन, पुलिस महानिरीक्षक विम्मी सचदेवा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
अब राज्य की नजर इस बात पर है कि इन फैसलों के बाद जमीनी हालात कितनी जल्दी बदलते हैं। पहाड़ के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि उनके गांवों के बाहर मंडराता खतरा कम होगा और बच्चे फिर से सुरक्षित रास्तों पर स्कूल जा सकेंगे।






