Uttarakhand goverment – सरकारी खजाने में टैक्स बढ़ाने के लिए धामी की बड़ी बैठक, टैक्स रिकवरी पर ज़ोर
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में वित्तीय वर्ष 2025 26 के लिए राज्य की आय से जुड़ी एक अहम समीक्षा बैठक की। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने अलग अलग विभागों से मिलने वाले राजस्व की स्थिति को विस्तार से जाना और साफ कहा कि अब टैक्स वसूली को लेकर किसी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर स्तर पर निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि राज्य की आमदनी मजबूत हो और विकास के कामों में किसी तरह की रुकावट न आए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व वसूली केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि इससे सीधे तौर पर सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और रोजगार से जुड़े काम जुड़े हैं। अगर राज्य की आय मजबूत होगी, तो आम लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। इसी सोच के साथ उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राजस्व वसूली की नियमित समीक्षा हो और जहां कमी दिखे, वहां तुरंत सुधार किया जाए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि राजस्व वसूली की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। इसके लिए जिलों में जो समितियां बनाई गई हैं, उनकी बैठकें नियमित रूप से हों और हर महीने प्रगति की रिपोर्ट ली जाए। उन्होंने विशेष रूप से देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल जिलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन जिलों में राजस्व की संभावनाएं ज्यादा हैं, लेकिन वसूली की रफ्तार अभी और बढ़ाई जा सकती है।
ऊर्जा क्षेत्र पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपीसीएल और यूजेवीएनएल को अपनी आय बढ़ाने के लिए ज्यादा गंभीर प्रयास करने होंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन इलाकों में बिजली चोरी की आशंका रहती है, वहां लगातार निगरानी अभियान चलाए जाएं। साथ ही जहां उद्योगों की बिजली मांग ज्यादा है, वहां बिलिंग व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, ताकि सही समय पर सही बिलिंग हो सके और राजस्व का नुकसान न हो।
वन क्षेत्र से मिलने वाले राजस्व को लेकर भी मुख्यमंत्री ने कई अहम निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वन संपदा का बेहतर और जिम्मेदार इस्तेमाल कर राज्य की आय बढ़ाई जा सकती है। तराई क्षेत्रों में व्यावसायिक पौधारोपण के काम को तेजी से आगे बढ़ाने को कहा गया। साथ ही लकड़ी की बिक्री के लिए पारदर्शी और मजबूत व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए, ताकि सरकार को पूरा लाभ मिल सके।
मुख्यमंत्री ने जड़ी बूटी से जुड़ी संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जड़ी बूटी केवल जंगलों की संपदा नहीं हैं, बल्कि यह गांवों की आजीविका और राज्य की आय का बड़ा जरिया बन सकती हैं। इसके लिए संरक्षण और लंबे समय की योजना बनाकर काम करने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी इसका लाभ मिल सके।
इसके अलावा वन क्षेत्रों में बरसाती नालों को चिन्हित कर उन्हें सही दिशा में मोड़ने और सुरक्षित बनाने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे न केवल जंगलों को नुकसान से बचाया जा सकेगा, बल्कि पानी के बेहतर इस्तेमाल से कृषि और पर्यावरण दोनों को फायदा होगा।
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री धामी ने दो टूक कहा कि राजस्व बढ़ाना सिर्फ एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरी सरकार और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी अधिकारी मिलकर ईमानदारी और सक्रियता के साथ काम करेंगे, ताकि उत्तराखंड आर्थिक रूप से और मजबूत बने और विकास की रफ्तार लगातार आगे बढ़ती रहे।






