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CM DHAMI – पिछले एक साल में सीएम धामी ने किया ‘धमाल’, पहाड़ के लोगों के लिए 10 बड़े फैसले

साल 2025 उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासन के इतिहास में एक ऐसे अध्याय के रूप में दर्ज हुआ, जिसने राज्य की पहचान को सिर्फ पहाड़ी प्रदेश तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया। यह साल फैसलों का रहा, साहस का रहा और उन प्रयोगों का रहा जिन पर पहले केवल बहस होती थी, लेकिन अमल कम दिखाई देता था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 2025 में कई ऐसे निर्णय लिए, जिनका असर सिर्फ उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश में उनकी चर्चा हुई। साल की शुरुआत ही एक बड़े और ऐतिहासिक फैसले से हुई। 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू कर दी गई। यह कदम इसलिए भी खास रहा क्योंकि स्वतंत्र भारत में ऐसा करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य बना। इस फैसले ने नागरिक कानूनों में समानता को लेकर चल रही दशकों पुरानी बहस को नई दिशा दी। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक जैसे नियम लागू किए गए। सरकार का तर्क साफ था कि कानून व्यक्ति की आस्था नहीं, बल्कि नागरिक के अधिकार और कर्तव्य तय करता है। इस फैसले के बाद उत्तराखंड का नाम देश भर में चर्चा का विषय बना और कई अन्य राज्यों में भी इस दिशा में विचार शुरू हुआ। राजनीतिक साहस के साथ साथ 2025 प्रशासनिक सख्ती का साल भी रहा। सरकार ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया। वर्ष भर में 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।

यह कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ी क्षेत्रों तक साफ दिखाई दी। सरकार का कहना था कि सरकारी जमीन पर कब्जा केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों पर भी चोट है। इस अभियान ने कई जगह विरोध भी झेला, लेकिन सरकार अपने फैसले पर अडिग रही। साल 2025 का एक और बड़ा पड़ाव रहा राज्य का बजट। उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट पेश किया गया। यह सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं थी, बल्कि सरकार की विकास की सोच का संकेत था। बजट में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, कृषि और रोजगार पर खास जोर दिया गया। पहाड़ी जिलों के लिए अलग से योजनाएं बनाई गईं ताकि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। कृषि के क्षेत्र में सरकार ने परंपरागत खेती को नई पहचान देने की कोशिश की। मिलेट मिशन के तहत पहाड़ी जिलों में मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने की योजना को मंजूरी दी गई। 2030 31 तक 11 पर्वतीय जिलों के लिए 134.89 करोड़ रुपये की कार्य योजना तय की गई। इसके साथ ही कीवी नीति और ड्रैगन फ्रूट खेती योजना शुरू की गई, ताकि किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ नई फसलों से भी आय का साधन मिले। सरकार का फोकस साफ था कि पहाड़ में खेती घाटे का सौदा नहीं, बल्कि सम्मानजनक आजीविका का जरिया बने। दिसंबर 2023 में देहरादून में हुए वैश्विक निवेशक सम्मेलन के नतीजे 2025 में जमीन पर उतरते दिखे। 3.56 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों में से दिसंबर 2025 तक करीब एक लाख करोड़ रुपये की ग्राउंडिंग हो चुकी थी। उद्योग, पर्यटन, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नए प्रोजेक्ट शुरू हुए। इससे न सिर्फ रोजगार के नए अवसर बने, बल्कि राज्य की आर्थिक सेहत को भी मजबूती मिली।

सामाजिक और सांस्कृतिक मोर्चे पर भी 2025 अहम रहा। सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक लागू किया, जिसके तहत राज्य के सभी पंजीकृत मदरसों में उत्तराखंड बोर्ड का पाठ्यक्रम अनिवार्य किया गया। सरकार का कहना था कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना समय की मांग है, ताकि वे मुख्यधारा से पीछे न रहें। इस फैसले पर बहस जरूर हुई, लेकिन सरकार ने इसे शिक्षा सुधार का जरूरी कदम बताया। धर्म और आस्था की आड़ में चल रही ठगी और पाखंड पर लगाम लगाने के लिए 10 जुलाई 2025 से ऑपरेशन कालनेमि शुरू किया गया। इस अभियान के तहत पूरे प्रदेश में व्यापक सत्यापन हुआ। अब तक 724 मुकदमे दर्ज किए गए और 511 गिरफ्तारियां की गईं। इसके अलावा अवैध रूप से रह रहे 19 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया, जिनमें से 10 को डिपोर्ट किया जा चुका है। सरकार का कहना था कि यह अभियान किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि धोखे और अवैध गतिविधियों के खिलाफ है। खेल के मैदान में भी 2025 उत्तराखंड के लिए यादगार रहा। राज्य ने 38वें राष्ट्रीय खेलों का सफल आयोजन किया। आयोजन की व्यवस्थाओं से लेकर खिलाड़ियों के स्वागत तक हर स्तर पर तारीफ हुई। उत्तराखंड ने 103 पदक जीतकर पदक तालिका में सातवां स्थान हासिल किया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास थी क्योंकि यह राज्य के खेल ढांचे में हुए सुधारों का नतीजा मानी गई। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में 2025 को मानवीय सेवा का साल कहा जाए तो गलत नहीं होगा। चारधाम यात्रा ने इस साल नया रिकॉर्ड बनाया। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में 47 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाए रखा गया। चारधाम मार्ग पर 49 स्थायी चिकित्सा इकाइयां सक्रिय रहीं। केदारनाथ धाम में शुरू हुआ 17 बेड का अस्पताल यात्रा 2025 की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना गया। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में यह व्यवस्था करना आसान नहीं था, लेकिन सरकार ने इसे संभव कर दिखाया। सैन्य परिवारों के लिए भी 2025 राहत और सम्मान का साल रहा। शहीद सैनिकों के आश्रितों के लिए अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी गई। यह फैसला उन परिवारों के लिए बड़ा सहारा बना, जिन्होंने देश के लिए अपने सबसे प्रिय को खोया। संस्कृति और परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम में श्रीमद्भगवद्गीता के अध्ययन को शामिल करने का फैसला लिया गया। सरकार का कहना था कि यह केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन दर्शन है, जो विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों से जोड़ता है। इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी कई अहम फैसले हुए। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए मेगा इंडस्ट्रियल और इन्वेस्टमेंट नीति 2025 को मंजूरी दी गई। देहरादून शहर के लिए रिस्पना और बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को हरी झंडी मिली। केन्द्रीय कैबिनेट से सोनप्रयाग केदारनाथ रोपवे परियोजना को मंजूरी मिली, जिससे आने वाले वर्षों में यात्रा और सुगम होने की उम्मीद जगी। साल 2025 ने यह साफ कर दिया कि उत्तराखंड अब केवल प्राकृतिक सौंदर्य के लिए नहीं, बल्कि नीतिगत फैसलों और प्रशासनिक साहस के लिए भी जाना जा रहा है। धामी सरकार के लिए यह साल उपलब्धियों, चुनौतियों और प्रयोगों का रहा। सरकार का दावा है कि 2026 और उसके बाद के वर्षों में इन्हीं फैसलों की नींव पर उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा किया जाएगा। पिछला साल बेमिसाल रहा और सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में विकास की यह रफ्तार और तेज होगी। उत्तराखंड ने 2025 में यह संकेत दे दिया है कि वह अब सिर्फ पहाड़ों का राज्य नहीं, बल्कि नीतियों और निर्णयों का मॉडल बनने की ओर बढ़ चुका है।

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