उत्तराखण्ड में क्रांति कर रहा है आयुष्मान भारत कार्ड, अब तक 3300 करोड़ का फ्री इलाज
उत्तराखण्ड की कमान जब मुख्यमंत्री के तौर पर पुष्कर सिंह धामी ने संभाली थी तो पहाड़ी इलाकों में अच्छे इलाज की बहुत बड़ी समस्या थी। सरकारी अस्पतालों में अच्छे डॉक्टर टिकते नहीं थे और बड़े शहरों का इलाज महंगा था। ऐसे में केन्द्र की आयुष्मान भारत योजना को राज्य में बेहतरीन तरीके से लागू करके पुष्कर सिंह धामी ने स्वास्थ्य सेवा में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं।
सीएम धामी ने कहा है कि हमारी डबल इंजन सरकार द्वारा गत चार वर्षों में उत्तराखण्ड के 17 लाख से अधिक लोगों को ₹3300 करोड़ से अधिक का कैशलेश इलाज कराया है, जिससे लाखों परिवारों को आर्थिक राहत और क्वालिटी वाला इलाज मिला है। राज्य सरकार विभिन्न प्रयासों के माध्यम से ‘समृद्ध उत्तराखंड, स्वस्थ उत्तराखंड’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
दरअसल उत्तराखंड आज उन कुछ राज्यों में से एक है जहां स्वास्थ्य सुविधाओं को आम लोगों की पहुंच में लाने के लिए सरकार ने तेज और ठोस कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में यह जानकारी साझा की कि पिछले चार वर्षों में राज्य के सत्रह लाख से अधिक लोगों को आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से तीन हजार तीन सौ करोड़ रुपये से अधिक का कैशलेस उपचार प्रदान किया गया। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों की राहत की कहानी है जिनके लिए बीमारी अचानक आर्थिक संकट में बदल जाती थी। इस कैशलेस उपचार ने लोगों को गंभीर रोगों के इलाज की चिंता से मुक्त किया और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में भरोसा और मजबूत हुआ।
उत्तराखंड सरकार अब समृद्ध उत्तराखंड और स्वस्थ उत्तराखंड के लक्ष्य को और तेज़ी से साकार करने में जुटी है। स्वास्थ्य योजनाओं का दायरा बढ़ाया जा रहा है, अस्पतालों की क्षमता मजबूत की जा रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी वही सुविधा मिले जो शहरों में उपलब्ध है। इस पूरे अभियान का सबसे बड़ा आधार आयुष्मान भारत कार्ड यानी प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना है, जो देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के रूप में करोड़ों लोगों का सहारा बनी हुई है।
आयुष्मान भारत कार्ड कैसे बनेगा ?
अब यह समझना जरूरी है कि उत्तराखंड में आयुष्मान भारत कार्ड कैसे बनता है, कौन इसके पात्र हैं और यह कार्ड कहां कहां काम करता है। आम नागरिकों के लिए यह जानकारी बहुत आवश्यक है ताकि वे समय रहते इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
उत्तराखंड में आयुष्मान भारत कार्ड की पात्रता देशभर में लागू प्रावधानों के अनुसार ही तय की जाती है। यह योजना मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए है जिन्हें सामाजिक और आर्थिक जनगणना के आधार पर सूचीबद्ध किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूर परिवार, बिना पक्का घर वाले परिवार, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति परिवार, बेघर परिवार, दिव्यांगजन के आश्रित परिवार और ऐसी महिलाएं जिनके परिवार का नेतृत्व वे स्वयं करती हैं, इस योजना के दायरे में आते हैं। शहरी क्षेत्रों में भी आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए यह योजना उपलब्ध है।
इस योजना में आय का कोई अलग पैमाना निर्धारित नहीं है क्योंकि पात्रता जनगणना आधारित है। यदि आपका नाम सामाजिक आर्थिक जनगणना की सूची में है तो आप बिना किसी अतिरिक्त आय प्रमाण के आयुष्मान कार्ड बनवा सकते हैं। उत्तराखंड सरकार ने कई बार पात्रता सूची का विस्तार किया है ताकि अधिक से अधिक परिवार इसका लाभ उठा सकें।
कौन से दस्तावेज चाहिए-
कार्ड बनवाने के लिए दस्तावेज बहुत सरल रखे गए हैं। आधार कार्ड, राशन कार्ड या निवास प्रमाण पत्र, और मोबाइल नंबर पर्याप्त हैं। यदि परिवार के सभी सदस्यों का आधार सत्यापित है तो कार्ड बनवाना और भी आसान हो जाता है। किसी तरह का बैंक स्टेटमेंट या आय प्रमाणपत्र अनिवार्य नहीं है।
कार्ड के लिए कहां जाना होगा ?
आयुष्मान कार्ड प्राप्त करने के लिए उत्तराखण्ड के वासियों को नजदीकी जन सेवा केंद्र, ग्राम पंचायत केंद्र, अस्पताल में स्थित आयुष्मान हेल्प डेस्क या ब्लॉक स्तरीय आयुष्मान सुविधा केंद्र पर जाना होता है। कई जिलों में मोबाइल कैंप भी लगते हैं जहां कार्ड उसी समय तैयार कर दिए जाते हैं।
पूरे देश में फ्री इलाज –
आयुष्मान भारत योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह कार्ड पूरे देश में काम करता है। चाहे आप उत्तराखंड में हों या किसी अन्य राज्य के अस्पताल में, यदि वह अस्पताल आयुष्मान भारत योजना से संबद्ध है, तो आपको पांच लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार मिल सकता है। यह सुविधा तमाम सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है, साथ ही कई निजी अस्पताल भी इस योजना से जुड़े हैं। उत्तराखंड में दून अस्पताल, हिमालयन अस्पताल, बेस अस्पताल, अल्मोड़ा, हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज सहित सैकड़ों सरकारी और निजी अस्पताल इस योजना से जुड़ चुके हैं।
इलाज की प्रक्रिया भी सरल है। मरीज को अस्पताल पहुंचते ही आयुष्मान सहायता केंद्र पर कार्ड दिखाना होता है। अस्पताल पात्रता की पुष्टि करता है और इलाज तुरंत शुरू हो जाता है। किसी तरह की एडवांस फीस या बिलिंग नहीं की जाती। कार्डधारक केवल उपचार पर ध्यान देते हैं और सभी औपचारिकताएं अस्पताल और बीमा कंपनी के बीच पूरी होती हैं।
पहाड़ी इलाकों में होगा विस्तार
उत्तराखंड सरकार का कहना है कि आने वाले समय में इस योजना के दायरे को और विस्तार दिया जाएगा। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों के अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं और उपकरणों को बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है ताकि लोगों को इलाज के लिए मैदानी क्षेत्रों में न जाना पड़े।
आयुष्मान भारत योजना ने उत्तराखंड में स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक गहरी राहत दी है। जिन परिवारों के लिए बीमारी आर्थिक संकट बन जाती थी, उनके लिए यह कार्ड आशा की किरण बनकर आया है। मुख्यमंत्री धामी का यह दावा कि सत्रह लाख लोगों ने इसका लाभ उठाया, इस बात का प्रमाण है कि राज्य की स्वास्थ्य नीति जमीन पर असर दिखा रही है।
भविष्य में जब समृद्ध उत्तराखंड और स्वस्थ उत्तराखंड की अवधारणा पूरा आकार लेगी, तो आयुष्मान भारत योजना इस परिवर्तन की मजबूत नींव के रूप में देखी जाएगी।






