कंगना रनौत ने क्या कहा, ‘राहुल गांधी में दम नहीं’, नेता प्रतिपक्ष की जर्मनी यात्रा पर घमासान
नई दिल्ली- संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। देश की राजनीति में इस समय माहौल काफी गर्म है, क्योंकि विपक्ष SIR में अनियमितता और वंदे मातरम जैसे मुद्दों पर सरकार को लगातार घेर रहा है। इसी बीच कांग्रेस के नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पांच दिनों की जर्मनी यात्रा पर जाने वाले हैं। उनका यह दौरा 15 दिसंबर से 20 दिसंबर तक होगा, और इसी को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने सवाल उठा दिए हैं।
बीजेपी की ओर से सबसे कड़ा बयान मंडी से सांसद कंगना रनौत का आया है। संसद की कार्यवाही में जाते समय पत्रकारों ने उनसे जब पूछा कि राहुल गांधी सत्र के बीच जर्मनी क्यों जा रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि इस बारे में उनके पास कहने के लिए कुछ खास नहीं है, क्योंकि उनके अनुसार राहुल गांधी की खबरें उन्हें महत्वपूर्ण नहीं लगतीं। उन्होंने आगे कहा कि वह राहुल गांधी की खबरें पढ़ने में समय नहीं लगातीं क्योंकि उन्हें वे “बेकार” लगती हैं। कंगना ने यह भी कहा कि कांग्रेस आज जिस स्थिति में है, उसके पीछे कारण सबके सामने हैं। उनके शब्दों में, “उनकी पार्टी सिंगल डिजिट में क्यों आ गई, यह किसी से छिपा नहीं है।”
कंगना के इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि संसद का सत्र देश के लिए बहुत अहम समय होता है और विपक्ष के शीर्ष नेता का इस दौरान विदेश जाना सवाल तो खड़ा करता ही है। वहीं कांग्रेस की ओर से कहा जा रहा है कि यह दौरा पहले से तय था और यह देश के राजनयिक संबंधों और भारतीय समुदाय के साथ संवाद का हिस्सा है।
राहुल गांधी की यात्रा के बारे में इंडियन ओवरसीज कांग्रेस की ओर से बताया गया है कि वह जर्मनी में भारतीय प्रवासियों से मुलाकात करेंगे और जर्मन सरकार के कई मंत्रियों के साथ भी बातचीत करेंगे। इस यात्रा में उनके साथ सैम पित्रोदा भी रहेंगे। बताया जा रहा है कि इस दौरे का उद्देश्य भारत की वर्तमान वैश्विक भूमिका पर चर्चा करना और यूरोप में बसे भारतीय समुदाय से विचार साझा करना है।

यात्रा के आयोजकों ने कहा कि राहुल गांधी न सिर्फ भारतीय प्रवासियों से मिलेंगे बल्कि वह जर्मनी के सांसदों और मंत्रालयों के साथ भी बातचीत करेंगे ताकि भारत और जर्मनी के बीच सहयोग और संवाद को बढ़ाया जा सके। आईओसी जर्मनी के अध्यक्ष बलविंदर सिंह और आईओसी ऑस्ट्रिया के अध्यक्ष औसाफ खान ने राहुल गांधी की इस यात्रा को स्वागत योग्य बताते हुए कहा कि यह विदेश में बसे भारतीयों के साथ जुड़ने का एक अच्छा अवसर है।
हालांकि राजनीतिक स्तर पर यह दौरा फिलहाल बहस का विषय बना हुआ है। एक ओर बीजेपी का मानना है कि संसद के बीच इस तरह की विदेश यात्रा सही नहीं है, वहीं कांग्रेस इसे एक नियोजित और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम बता रही है। आम नागरिकों के बीच भी इस मुद्दे पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इस यात्रा को अनावश्यक बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे भारतीय राजनीति को दुनिया के मंच के साथ जोड़ने का एक सकारात्मक कदम मानते हैं।
सवाल चाहे जैसे हों, लेकिन यह स्पष्ट है कि राहुल गांधी की विदेश यात्राएं हमेशा से चर्चा में रही हैं और इस बार भी यह यात्रा सियासी हलचल के बीच केंद्र में बनी हुई है।






