#Home #Dehradun #News

कांग्रेस के अजीब हाल, हरक सिंह रावत की ‘गलती’ पर हरीश रावत को जूते साफ करने पड़े

देहरादून- उत्तराखण्ड की राजनीति में कांग्रेस के अजीब हाल हैं। कई गुटों में बंटी उत्तराखण्ड कांग्रेस 2027 के चुनाव के लिए बीजेपी को चुनौती देने की बजाय ‘गलती पर गलती’ करती जा रही है। पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के एक बयान ने अब सिख समाज को आहत कर दिया है और उनके खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। ऐसे में पूर्व सीएम हरीश रावत सामने आए और गलती मानी। इतना ही नहीं दिल से भूल सुधार के लिए उन्होंने गुरुद्वारे जाकर जूता सफाई का काम किया।
सोमवार को कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत देहरादून के आढ़त बाजार गुरुद्वारे में पहुंचे और अरदास की। साथ ही उन्होंने जोड़ा सेवा भी की। हरीश रावत दोपहर बाद आढ़त बाजार स्थित गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा पहुँचे। शांत वातावरण में उन्होंने अरदास की, फिर संगत के जूते रखने वाली सेवा (जोड़ा घर सेवा) की—यह सेवा सिख परंपरा में विनम्रता और सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। इसके बाद उन्होंने लंगर में प्रसाद ग्रहण किया। इस पूरी प्रक्रिया में हरीश रावत का भाव स्पष्ट था—वे केवल माफी नहीं मांग रहे थे, बल्कि यह विश्वास दिलाने आए थे कि सिख समुदाय को चोट पहुँचाना उनकी पार्टी की सोच का हिस्सा कभी नहीं हो सकता।
उन्होंने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि सिख समुदाय भारत की सबसे गौरवशाली और उदार परंपराओं में से एक है। उन्होंने कहा कि यह समाज अपने इतिहास, शौर्य और सेवा के लिए जाना जाता है, और उसकी भावना को ठेस पहुँचाने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। रावत ने स्वीकार किया कि किसी भी व्यक्ति से कभी-कभी शब्दों की चूक हो सकती है, और ऐसी स्थिति में माफी माँगना ही सबसे सही कदम होता है। उन्होंने बार-बार यह बात दोहराई कि यदि कोई त्रुटि हुई है, ऐसा कोई क्षण आया है जिससे सिख समाज को दुख पहुँचा है, तो वे उसकी क्षमा मांगते हैं।
गुरुद्वारे में मौजूद संगत ने उन्हें सुना, और माहौल संवाद और संयम से भरा रहा। इस अवसर पर कांग्रेस नेता संजय शर्मा, महेंद्र सिंह नेगी, ओमप्रकाश सती, गुलजार अहमद, दीप वोहरा, जसबीर रावत और कई अन्य स्थानीय नेता भी मौजूद थे। सभी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी ऐसी किसी भी बात का समर्थन नहीं करती जो समाज में दरार पैदा करे।
इससे पहले स्वयं हरक सिंह रावत भी सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके थे, लेकिन विवाद थमा नहीं था। कोतवाली चौराहे पर उत्तरांचल पंजाबी महासभा, गुरुद्वारा सिंह सभा और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनका पुतला फूंका। नारों के बीच लोगों ने कहा कि पूर्व मंत्री ने सार्वजनिक मंच पर
बेवजह टिप्पणी की है, और उन्हें पूरी स्पष्टता के साथ समुदाय के सामने क्षमा मांगनी चाहिए। इस विरोध प्रदर्शन में गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष हरबंस सिंह, पंजाबी महासभा के अध्यक्ष गुरदीप सिंह, हरनाम सिंह, सतनाम सिंह सहित भाजपा के जिला व मंडल पदाधिकारी और कई कार्यकर्ता शामिल थे।
यह पूरा घटनाक्रम केवल राजनीतिक गलती का मामला नहीं था। यह उन भावनात्मक तंतुओं को छू गया जो सिख समुदाय की अस्मिता और सम्मान से जुड़े हैं। उत्तराखंड में सिख समाज की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, सैन्य सेवाओं से लेकर सामाजिक कार्यों तक और उनके प्रति सम्मान हमेशा प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रहा है। इसलिए किसी भी बयान का असर केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समुदाय के भीतर गहरे तक पहुँच जाता है।

Read More

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *