देहरादून के इकोलॉजिकल पार्क पर संकट, हाईकोर्ट ने बैठाई जांच, गड़बड़ी मिली तो हटाया जा सकता है पार्क
देहरादून- राजधानी में बन रहे इकोलॉजिकल पार्क को लेकर उठे सवालों पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि विकास जरूरी है, लेकिन वह प्रकृति और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर नहीं हो सकता। इसी वजह से हाईकोर्ट ने पार्क निर्माण से जुड़े सभी पहलुओं की जांच के लिए एक आयुक्त नियुक्त करने का आदेश दिया है। यह मामला तब अदालत के सामने आया जब कुछ स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े कार्यकर्ताओं ने याचिका दायर कर कहा कि इकोलॉजिकल पार्क का निर्माण ऐसे इलाके में किया जा रहा है, जहां से बारिश और प्राकृतिक पानी का बहाव होता है। उनका कहना है कि अगर इस जगह पर कंक्रीट का निर्माण हुआ तो भविष्य में पानी भरने, जल निकासी रुकने और आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। हाईकोर्ट ने इस आशंका को गंभीर मानते हुए निर्देश दिए हैं कि नियुक्त आयुक्त मौके पर जाकर खुद निरीक्षण करें। उन्हें यह देखना होगा कि क्या पार्क का निर्माण पर्यावरण से जुड़े नियमों के अनुसार हो रहा है या नहीं, प्राकृतिक नालों और जल प्रवाह को कोई नुकसान तो नहीं पहुंचाया जा रहा, और जो नक्शा और डिजाइन स्वीकृत किए गए थे, उनका पालन किया जा रहा है या नहीं। निरीक्षण के बाद आयुक्त को अपनी पूरी रिपोर्ट अदालत में सौंपनी होगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि इकोलॉजिकल पार्क का मतलब ही होता है प्रकृति की रक्षा। अगर ऐसा पार्क ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने लगे, तो यह बेहद चिंताजनक बात है। कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर जांच में किसी तरह की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास जो आने वाली पीढ़ियों के लिए परेशानी खड़ी कर दे, उसे रोका जाना जरूरी है। कई लोग भावुक होकर यह भी कहते हैं कि शहर पहले ही तेजी से कंक्रीट का जंगल बनता जा रहा है और अगर बचे हुए प्राकृतिक रास्तों और हरियाली को भी खत्म कर दिया गया, तो देहरादून की पहचान ही खत्म हो जाएगी। इकोलॉजिकल पार्क की अवधारणा आम तौर पर शहरों में हरियाली बढ़ाने, लोगों को खुली और साफ जगह देने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए लाई जाती है। ऐसे पार्कों में पेड़ पौधे, घूमने के लिए पगडंडियां, बैठने की जगह, बच्चों के खेलने का क्षेत्र और प्रकृति से जुड़ी गतिविधियां होती हैं। उत्तराखंड में धनौल्टी जैसे इलाकों में बने इको पार्क इसका उदाहरण हैं, जहां बिना ज्यादा निर्माण के प्राकृतिक सुंदरता को संरक्षित रखा गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अगर देहरादून में बनने वाला यह पार्क सच में इकोलॉजिकल पार्क है, तो इसमें प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले निर्माण से बचना चाहिए और पानी के प्राकृतिक रास्तों को खुला छोड़ा जाना चाहिए। हाईकोर्ट के आदेश को स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।






