लोकसभा में वंदे मातरम् पर गरमाहट, मोदी बोले—यह गीत आज़ादी की आत्मा है
लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने पर मंगलवार को जोरदार बहस देखने को मिली। मानसून सत्र के बीच जब यह मुद्दा उठा, तो सदन का माहौल इतिहास और राष्ट्रभावना से भर गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय गीत की इस गौरवशाली यात्रा को याद करते हुए कहा कि वंदे मातरम् वह स्वर था, जिसने देश को आज़ादी की ओर अग्रसर किया।
पीएम मोदी ने कहा, “वंदे मातरम् ने 1947 में स्वतंत्रता का बिगुल बजाया। यह केवल गीत नहीं था—यह स्वतंत्रता संघर्ष की आत्मा थी। जब हम इस पर चर्चा कर रहे हैं, तब यहां पक्ष-विपक्ष का सवाल ही नहीं है। हम सबके लिए यह अवसर है कि जिस वंदे मातरम् ने आज़ादी की लड़ाई को दिशा दी, उसी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करें।”
उन्होंने कहा कि जिस ऊर्जा ने आजादी के दीवानों को प्रेरित किया, वही शक्ति आज देश को 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के संकल्प में साथ दे सकती है। पीएम ने जोर दिया कि वंदे मातरम् केवल उच्चारण नहीं, बल्कि वह भावना है जो देश को एकजुट करती है।
चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की गैरमौजूदगी पर भी हलचल रही और सांसदों ने इस पर टिप्पणी की।
प्रधानमंत्री ने वंदे मातरम् के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी शुरुआत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी। वह समय 1857 की क्रांति के बाद का था, जब अंग्रेजी हुकूमत भारतीयों पर कठोरता बढ़ाती जा रही थी। अंग्रेज अपने राष्ट्रीय गीत को हर घर तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे थे, ऐसे माहौल में “बंकिम चंद्र ने प्रतिरोध की आवाज़ बुलंद की और वंदे मातरम् रचा—एक ऐसा गीत जो पूरे राष्ट्र के दिल की धड़कन बन गया।”
उन्होंने आगे बताया कि 1882 में प्रकाशित ‘आनंद मठ’ उपन्यास में भी वंदे मातरम् को प्रतिष्ठित स्थान मिला। पीएम मोदी के अनुसार, यह गीत सिर्फ राजनीतिक स्वतंत्रता का नारा नहीं था, बल्कि भारत की प्राचीन संस्कृति, परंपरा, मातृभूमि-भक्ति और आत्मसम्मान का प्रतीक था—एक ऐसी प्रेरणा जो पीढ़ियों को जोड़ती रही।






