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Ankita Bhandari Case – बीजेपी के गले ही हड्डी बना अंकिता भंडारी हत्याकांड, कई बीजेपी नेताओं के इस्तीफे

देहरादून – उत्तराखण्ड का अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आ गया है। इस मामले से जुड़ी वीआईपी चर्चा अब भारतीय जनता पार्टी के लिए बड़ी मुश्किल बनती दिख रही है। हाल ही में उर्मिला सनावर की ओर से जारी किए गए वीडियो के बाद पार्टी के भीतर बेचैनी साफ नजर आने लगी है। स्थिति यह है कि बीते कुछ दिनों में भाजपा के कई नेताओं ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इससे संगठन और सरकार दोनों पर दबाव बढ़ गया है। उर्मिला सनावर के वीडियो के सामने आने के बाद यह मामला फिर से चर्चा में आ गया। वीडियो में उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कुछ दावे किए और एक कथित वीआईपी का जिक्र किया। इसी के बाद पार्टी के अंदर असहजता बढ़ती चली गई। नेताओं का कहना है कि यह मामला सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि उत्तराखंड की जनता की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। सबसे पहले इस्तीफा देने वालों में पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ का नाम सामने आया। उर्मिला सनावर के वीडियो में उन पर भी आरोप लगाए गए थे। इसके बाद आरती गौड़ ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि उनका नाम इस मामले में बेवजह घसीटा जा रहा है और सच्चाई सामने लाने के लिए पूरे मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। उनका कहना था कि जांच से ही यह साफ होगा कि कौन दोषी है और कौन नहीं। इसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्य मंत्री भगत राम कोठारी ने भी भाजपा को अलविदा कह दिया। उन्होंने पार्टी प्रदेश मुख्यालय को भेजे अपने इस्तीफे में लिखा कि अंकिता भंडारी को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। इसको लेकर आम लोगों में गुस्सा और सवाल दोनों हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा उत्तराखंड की बेटी से जुड़ा है और पार्टी को इस पर गंभीर फैसला लेना चाहिए। उनका मानना है कि देर करने से जनता का भरोसा कमजोर होता है। इस्तीफों का सिलसिला यहीं नहीं रुका। ऋषिकेश से भाजपा युवा मोर्चा के जिला मंत्री अंकित बहुखंडी ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को भेजा। अंकित बहुखंडी ने कहा कि पार्टी अंकिता भंडारी हत्याकांड पर कोई साफ फैसला नहीं ले रही है। उन्होंने भारी मन से पद छोड़ने की बात कही और कहा कि अभी तक पार्टी के किसी बड़े नेता ने खुलकर इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा है। अंकित बहुखंडी ने यह भी कहा कि इस मामले में उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर के साथ साथ यमकेश्वर की विधायक रेनू बिष्ट की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि वीआईपी को लेकर जो चर्चा हो रही है, उस पर भी अब तक कोई साफ कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके। इन इस्तीफों के बाद भाजपा संगठन पर दबाव साफ दिखाई देने लगा है। पार्टी के भीतर यह चर्चा है कि यदि मामला इसी तरह चलता रहा, तो आगे और भी असंतोष सामने आ सकता है। वहीं विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठाकर सरकार को घेर रहा है। भाजपा की ओर से इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया भी सामने आई है। प्रदेश प्रवक्ता मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि पार्टी शुरू से ही इस मामले को लेकर गंभीर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस बेवजह इस पर राजनीति कर रही है। उनका कहना है कि जिन नेताओं ने इस्तीफा दिया है, पार्टी उनके संपर्क में है। भाजपा एक परिवार की तरह है और अगर परिवार का कोई सदस्य नाराज होता है, तो भी वह परिवार का हिस्सा बना रहता है। अब जरा इस पूरे विवाद की जड़ को समझते हैं। खुद को भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी बताने वाली उर्मिला सनावर ने कुछ दिन पहले एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में उन्होंने अपनी और सुरेश राठौर की कथित फोन बातचीत सुनाई थी। इस बातचीत में अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र था। उर्मिला सनावर ने वीडियो में एक व्यक्ति का नाम लेते हुए दावा किया कि वही वह वीआईपी है, जिसके लिए अंकिता पर खास सेवा देने का दबाव बनाया जा रहा था। उर्मिला सनावर का आरोप है कि जब अंकिता भंडारी ने इस दबाव को मानने से इनकार कर दिया, तो रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके बीच विवाद हुआ। इसी विवाद के बाद अंकिता की हत्या कर दी गई। हालांकि यह आरोप पहले से चल रही जांच से अलग दावे हैं और इन्हें लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अंकिता भंडारी हत्याकांड पहले ही उत्तराखंड को झकझोर चुका है। अब इस मामले से जुड़ी नई चर्चाओं और वीडियो ने लोगों की पीड़ा और गुस्से को फिर से जगा दिया है। आम लोग चाहते हैं कि इस मामले में किसी भी तरह का शक बाकी न रहे और सच पूरी तरह सामने आए।
फिलहाल भाजपा के सामने चुनौती साफ है। एक ओर पार्टी को अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को संभालना है, तो दूसरी ओर जनता के सवालों का जवाब भी देना है। आने वाले दिनों में पार्टी और सरकार इस मामले पर क्या कदम उठाती है, इस पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।

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