Dehradun : उत्तराखण्ड से दिल्ली जाते समय रहें सावधान, प्रदूषण फैलाने बसों की एंट्री पर रोक
देहरादून। उत्तराखंड से दिल्ली जाने वाले हजारों यात्रियों के लिए यह समय मुश्किल भरा हो गया है। बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण दिल्ली सरकार ने सख्ती दिखाते हुए उत्तराखंड परिवहन निगम की 192 पुरानी डीजल बसों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगा दी है। बुधवार से यह फैसला लागू होते ही यात्रियों को लंबा इंतजार, रूट बदलने और वैकल्पिक साधन तलाशने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिन बसों पर रोक लगी है, वे बीएस तीन और बीएस चार श्रेणी की डीजल बसें हैं। दिल्ली सरकार पिछले चार वर्षों से इस बात को लेकर लगातार चेतावनी दे रही थी कि प्रदूषण कम करने के लिए इन बसों को राजधानी में आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वर्ष 2021 से ही उत्तराखंड परिवहन निगम को पत्र भेजे जा रहे थे, लेकिन इन चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया। अगस्त में भी एक बार फिर साफ शब्दों में चेताया गया था, इसके बावजूद तैयारी अधूरी रही। इस समय उत्तराखंड परिवहन निगम के पास दिल्ली जाने लायक केवल 130 बीएस छह डीजल बसें और करीब 300 अनुबंधित सीएनजी बसें ही हैं। समस्या यह है कि यही बसें प्रदेश के पहाड़ी और अन्य लंबे रूटों पर भी चल रही हैं। पहले दिल्ली मार्ग पर रोज करीब 540 बसें चलती थीं, लेकिन अब यह संख्या घटकर 348 रह गई है। बुधवार सुबह जैसे ही पुरानी बसों को दिल्ली जाने से रोका गया, कई बसों को यूपी बॉर्डर पर मोहनगर तक ही रोक दिया गया। वहां से यात्रियों को दिल्ली पहुंचने के लिए मेट्रो, ऑटो या दूसरी बसों का सहारा लेना पड़ा। उत्तराखंड से रोज करीब 40 से 50 हजार यात्री दिल्ली आते जाते हैं।

इनमें नौकरीपेशा लोग, छात्र, मरीज और कारोबारी शामिल हैं। अचानक लगे इस प्रतिबंध ने इन सभी की दिनचर्या बिगाड़ दी है। कई यात्रियों ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन टिकट पहले से बुक कर रखे थे, लेकिन बसें या तो रद्द हो गईं या दिल्ली की जगह नोएडा तक ही पहुंच सकीं। ऐसे में यात्रियों को न केवल अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ा, बल्कि समय और परेशानी भी झेलनी पड़ी। परिवहन निगम की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। सबसे बड़ी चिंता उसकी वोल्वो बसों को लेकर है, जिन्हें उच्च वर्ग के यात्री ज्यादा पसंद करते हैं। निगम के पास कुल 53 वोल्वो बसें हैं, जिनमें से 41 बीएस चार डीजल पर चलती हैं। अब ये बसें दिल्ली नहीं जा सकतीं। केवल 12 बीएस छह वोल्वो ही ऐसी हैं, जिन्हें दिल्ली में प्रवेश की अनुमति है। बुधवार को आधा दर्जन से ज्यादा वोल्वो बसें रद्द करनी पड़ीं और जो गईं, वे भी कश्मीरी गेट आईएसबीटी की जगह नोएडा सेक्टर 62 तक ही चल सकीं। देहरादून से अकेले 23 वोल्वो बसें दिल्ली रूट पर चलती हैं और इनमें ज्यादातर सीटें पहले से बुक रहती हैं। आने वाले वीकेंड और नए साल से पहले के दिनों में यह समस्या और गहरी हो सकती है। परिवहन निगम के अधिकारियों को आशंका है कि अगर बसें रद्द होती रहीं या दिल्ली तक नहीं जा सकीं, तो यात्रियों का गुस्सा झेलना पड़ सकता है। दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ते ही सरकार ने सख्ती दिखाई है। त्योहारी सीजन में उत्तराखंड सरकार के आग्रह पर कुछ समय के लिए छूट दी गई थी, लेकिन अब हालात बिगड़ने पर फिर से रोक लगा दी गई। दिल्ली में कई बसों के चालान भी किए गए हैं। इसके बाद उत्तराखंड परिवहन निगम के महाप्रबंधक संचालन क्रांति सिंह ने सभी डिपो प्रबंधकों को निर्देश दिए हैं कि दिल्ली कश्मीरी गेट आईएसबीटी के लिए केवल बीएस छह और अनुबंधित सीएनजी बसें ही भेजी जाएं। अब निगम की कोशिश है कि अनुबंधित बसों की संख्या बढ़ाई जाए और वोल्वो बस आपरेटरों से बीएस छह या सीएनजी बसें जल्द उपलब्ध कराने को कहा जाए। इसके लिए बस प्रदाताओं से यह भी पूछा जा रहा है कि नई बसें लाने में कितना समय लगेगा। हालांकि यह एक लंबी प्रक्रिया है और इसका तुरंत समाधान निकलना मुश्किल दिख रहा है। इस बीच उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने मौके का फायदा उठाते हुए उत्तराखंड के बस अड्डों से दिल्ली के लिए बीएस छह बसों की संख्या बढ़ा दी है। कई यात्री अब मजबूरी में यूपी रोडवेज की बसों का सहारा ले रहे हैं। यह पूरा मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि समय रहते तैयारी क्यों नहीं की गई। चार साल पहले से चेतावनी मिलने के बावजूद जब सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो उसका खामियाजा अब आम यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। दिल्ली की हवा को साफ रखने की जरूरत से कोई इनकार नहीं कर सकता, लेकिन अचानक लगे प्रतिबंध ने उत्तराखंड के हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि परिवहन निगम कितनी तेजी से वैकल्पिक इंतजाम कर पाता है और यात्रियों को राहत देने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल दिल्ली जाने वाले यात्रियों के लिए सफर न सिर्फ लंबा, बल्कि ज्यादा तनाव भरा हो गया है।






