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Fighting, Devotees and Volunteers – नए साल पर कोटद्वार के श्री सिद्धबली मंदिर में मारपीट, श्रद्धालुओं-स्वयंसेवकों में चले लात घूसे

कोटद्वार- नववर्ष 2026 के पहले हफ्ते में आस्था के प्रमुख केंद्र सिद्धपीठ श्री सिद्धबली मंदिर में उस वक्त अफरा तफरी मच गई, जब दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं और मंदिर व्यवस्था में लगे कुछ स्वयंसेवकों के बीच मारपीट हो गई। मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर हुई इस घटना ने वहां मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं को हैरान और परेशान कर दिया। जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से श्रद्धालुओं का एक जत्था नववर्ष के मौके पर सिद्धबली बाबा के दर्शन के लिए कोटद्वार पहुंचा था। यह लोग रामलीला टीला क्षेत्र से आए थे और बाबा के दरबार में मन्नत पूरी होने पर प्रसाद चढ़ाने आए थे। मंदिर में उस दिन भारी भीड़ थी और दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी हुई थीं। इसी बीच मुजफ्फरनगर से आई एक महिला श्रद्धालु अपने दूधमुंहे बच्चे को गोद में लिए हुए थी। महिला मन्नत का धागा खोलने के लिए मंदिर के एक ऐसे शॉर्ट रास्ते से जाने लगी, जिसे भीड़ के कारण अस्थायी रूप से बंद किया गया था। व्यवस्था में लगे स्वयंसेवकों ने महिला को वहां से जाने से रोक दिया। आरोप है कि इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने सिर्फ विनम्रता से बात करने की कोशिश की थी, लेकिन कुछ स्वयंसेवक अपना आपा खो बैठे। बात इतनी बढ़ गई कि मंदिर परिसर में ही दोनों पक्षों के बीच लात घूंसे चलने लगे। आरोप यह भी है कि झगड़े के दौरान लाठी और पत्थरों का इस्तेमाल भी किया गया। यह पूरी घटना महज दो मिनट के भीतर हुई, लेकिन इसने मंदिर के माहौल को पूरी तरह बदल दिया। जहां कुछ देर पहले भजन और जयकारों की आवाज गूंज रही थी, वहां अचानक चीख पुकार मच गई। वहां मौजूद श्रद्धालु यह देखकर सन्न रह गए कि आस्था के स्थान पर इस तरह का बेकाबू दृश्य देखने को मिल रहा है। घटना में मुजफ्फरनगर के गौरव और कार्तिक समेत तीन श्रद्धालु घायल हो गए। मंदिर परिसर में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने दोनों पक्षों को अलग करने की कोशिश की और हालात को काबू में किया। घायल श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार दिलाया गया। घटना के बाद पीड़ित पक्ष ने कोतवाली पुलिस को तहरीर सौंपकर स्वयंसेवकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। श्रद्धालुओं का कहना है कि वे दूर से बाबा के दर्शन के लिए आए थे और मंदिर में उनके साथ इस तरह का व्यवहार बेहद दुखद है। उनका कहना है कि मंदिर जैसी जगह पर शांति और सहयोग होना चाहिए, न कि मारपीट। वहीं मंदिर समिति की ओर से इस घटना को ज्यादा गंभीर नहीं बताया गया। मंदिर समिति के अध्यक्ष डॉ. जेपी ध्यानी ने कहा कि यह एक मामूली विवाद था, जिसे मौके पर ही बीच बचाव कर सुलझा लिया गया। उनका कहना है कि मंदिर की व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है। हालांकि श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का मानना है कि नववर्ष जैसे खास मौके पर इस तरह की घटना मंदिर प्रशासन और व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। बड़ी भीड़ के दौरान अगर स्वयंसेवक संयम और शालीनता न रखें, तो हालात जल्दी बेकाबू हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन और व्यवहार कितना जरूरी है, ताकि श्रद्धालु आस्था और शांति के साथ अपने आराध्य के दर्शन कर सकें।

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