#Home #National

Silver Rate – रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद चांदी ने अचानक लगा दी ‘छलांग’, आम निवेशक हैरान

नई दिल्ली। चांदी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यह धातु जितनी तेजी से ऊपर जाती है, उतनी ही तेजी से नीचे भी आ सकती है। बीते कुछ समय से लगातार चढ़ती जा रही चांदी की कीमतें आज अचानक ऐसे फिसलीं कि बाजार में हलचल मच गई। सुबह के शुरुआती कारोबार में चांदी ने ऐसा ऊंचा स्तर छुआ, जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक मुश्किल थी, लेकिन महज एक घंटे के भीतर तस्वीर पूरी तरह बदल गई। आज चांदी की कीमतें सुबह चढ़ते चढ़ते 2,54,174 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थीं। निवेशकों और कारोबारियों के बीच उत्साह साफ दिख रहा था। लग रहा था कि चांदी फिर से नया रिकॉर्ड बना लेगी। लेकिन यह खुशी ज्यादा देर टिक नहीं पाई। एक घंटे के भीतर ही चांदी की कीमत में करीब 21,000 रुपये की भारी गिरावट आ गई और यह 2,33,120 रुपये के आसपास फिसल गई। इतनी बड़ी गिरावट ने छोटे निवेशकों से लेकर बड़े ट्रेडर्स तक सभी को चौंका दिया। यह गिरावट सिर्फ भारत के बाजार तक सीमित नहीं रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमतों में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिला। सोमवार को पहली बार चांदी की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 82 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई थी। यह अपने आप में एक ऐतिहासिक स्तर था। लेकिन वहां भी मुनाफा कमाने की होड़ और कुछ अहम वैश्विक घटनाओं के चलते कीमतें फिसलती चली गईं और 75 डॉलर के नीचे आ गईं। इस अचानक बदलाव की एक बड़ी वजह वैश्विक राजनीति से जुड़ी खबरें रहीं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच शांति समझौते की उम्मीदों ने बाजार का मूड बदल दिया। ट्रंप ने रविवार को बयान दिया था कि वह और जेलेंस्की यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के समझौते के काफी करीब हैं। इस खबर ने निवेशकों को राहत दी। जब दुनिया में तनाव कम होने की उम्मीद बनती है, तो लोग सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी से कुछ दूरी बना लेते हैं। यही कारण है कि इन धातुओं की मांग अचानक कमजोर पड़ जाती है।

अगर घरेलू बाजार की बात करें तो MCX पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी पिछले कारोबारी सत्र में 2,39,787 रुपये पर बंद हुई थी। आज यह 2,47,194 रुपये पर खुली। शुरुआती कारोबार में इसमें जबरदस्त तेजी देखने को मिली और यह 2,54,174 रुपये तक पहुंच गई। लेकिन इसके बाद बिकवाली का ऐसा दौर शुरू हुआ कि कीमतें तेजी से नीचे आने लगीं। कुछ समय के लिए यह करीब 2,32,663 रुपये तक भी फिसल गई। दोपहर करीब ढाई बजे चांदी 2,33,900 रुपये के आसपास कारोबार कर रही थी। बीते महीनों में चांदी की कीमतों में जो तेजी देखने को मिली है, उसने निवेशकों को चौंकाया भी है और आकर्षित भी किया है। इस साल अब तक चांदी ने करीब 181 प्रतिशत का रिटर्न दिया है, जो सोने से भी बेहतर माना जा रहा है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में नए निवेशक भी चांदी की ओर खिंचे चले आए। लोगों को लगने लगा कि चांदी आने वाले समय में सोने से भी बेहतर कमाई करा सकती है। चांदी की कीमतों में इस तेज उछाल के पीछे कई वजहें रही हैं। अमेरिका ने हाल ही में चांदी को एक महत्वपूर्ण खनिज घोषित किया है। इसका मतलब यह हुआ कि तकनीक और उद्योग से जुड़े कई क्षेत्रों में इसकी अहमियत और बढ़ गई है। इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल, बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में चांदी का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। दूसरी ओर खनन और आपूर्ति से जुड़ी कुछ दिक्कतों के चलते बाजार में चांदी की उपलब्धता उतनी नहीं बढ़ पाई, जितनी मांग बढ़ी है। नतीजा यह हुआ कि कीमतों को ऊपर जाने का पूरा मौका मिल गया। इसके साथ ही निवेश की दुनिया में भी चांदी की मांग बढ़ी है। जब महंगाई बढ़ती है या वैश्विक हालात अस्थिर होते हैं, तो लोग अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए कीमती धातुओं की ओर रुख करते हैं।

पिछले कुछ समय में यही माहौल बना रहा, जिससे चांदी को जबरदस्त सहारा मिला। हालांकि आज की गिरावट यह भी दिखाती है कि बाजार एक तरफा नहीं चलता। सिर्फ भू राजनीतिक तनाव कम होने से ही कीमतें नहीं गिरीं। इसके पीछे कुछ तकनीकी और कारोबारी कारण भी हैं। सबसे अहम वजह मुनाफावसूली रही। जब कोई संपत्ति बहुत तेजी से ऊपर जाती है, तो एक समय के बाद निवेशक मुनाफा निकालने लगते हैं। यही चांदी के साथ भी हुआ। जिन्होंने नीचे के स्तर पर खरीदारी की थी, उन्होंने ऊंचे दामों पर बेचकर फायदा लेना शुरू कर दिया। इसके अलावा CME का एक फैसला भी बाजार पर भारी पड़ा। सीएमई ने चांदी के मार्च 2026 वायदा सौदों के लिए मार्जिन बढ़ा दिया है। पहले जहां निवेशकों को करीब 20,000 डॉलर जमा करने पड़ते थे, अब यह रकम बढ़कर लगभग 25,000 डॉलर हो गई है। मार्जिन बढ़ने का सीधा मतलब है कि अब सौदा करने के लिए ज्यादा पूंजी चाहिए। ऐसे में कई छोटे और मध्यम निवेशक बाजार से बाहर हो जाते हैं, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ता है। बाजार के जानकारों का कहना है कि चांदी में अभी भी लंबी अवधि में तेजी की संभावना बनी हुई है, लेकिन रास्ता आसान नहीं होगा। उतार चढ़ाव आगे भी जारी रह सकता है। रिलायंस सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी का मानना है कि 2.4 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर चांदी के लिए आने वाले समय में एक अहम सहारा साबित हो सकता है। अगर कीमतें इस स्तर के आसपास टिक जाती हैं, तो फिर से ऊपर जाने की कोशिश देखी जा सकती है। वहीं अमेरिका की जानी मानी वित्तीय सेवा कंपनी बीटीआईजी ने चांदी समेत कीमती धातुओं को लेकर चेतावनी दी है। कंपनी का कहना है कि मौजूदा तेजी कुछ हद तक बहुत ज्यादा हो चुकी है। बीटीआईजी के मुताबिक चांदी की कीमतें इस समय उस स्थिति में हैं, जिसे बाजार की भाषा में पैराबोलिक कहा जाता है। यानी कीमतें बहुत कम समय में बहुत तेजी से ऊपर गई हैं। इतिहास गवाह है कि जब भी ऐसी तेजी आती है, उसके बाद गिरावट भी उतनी ही तेज हो सकती है। बीटीआईजी ने पुराने उदाहरणों की याद दिलाई है। साल 1987 में चांदी की कीमत में एक ही दिन में करीब 10 प्रतिशत की तेजी आई थी। इसके बाद अगले कुछ हफ्तों में कीमतें करीब 25 प्रतिशत तक गिर गई थीं। इसी तरह 1979 और 1980 के दौर में चांदी 6 डॉलर प्रति औंस से बढ़कर 49 डॉलर तक पहुंच गई थी। उस समय लोगों को लगने लगा था कि कीमतें कभी नहीं गिरेंगी, लेकिन बाद में चांदी 90 प्रतिशत से ज्यादा टूट गई। साल 2011 में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। चांदी की कीमतें करीब 48 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थीं। इसके बाद अगले कुछ वर्षों में इसमें 75 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ गई। इन सभी उदाहरणों में एक बात समान रही। गिरावट से पहले कीमतें कई गुना बढ़ चुकी थीं। अगर मौजूदा हालात को देखें तो महामारी के बाद से चांदी की कीमतें छह गुना से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। सिर्फ पिछले एक साल में ही यह करीब तीन गुना हो गई हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि बाजार काफी गर्म हो चुका है। इतिहास बताता है कि जब तेजी की रफ्तार टूटती है, तो चांदी में 50 प्रतिशत या उससे ज्यादा की तेज गिरावट भी देखी जा सकती है। इन हालात में निवेशकों के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है। चांदी ने भले ही शानदार रिटर्न दिया हो, लेकिन इसमें जोखिम भी उतना ही बड़ा है। जानकारों की सलाह है कि बिना सोच समझे ऊंचे दामों पर खरीदारी करने से बचें। अगर निवेश करना है, तो छोटे हिस्सों में और लंबी अवधि के नजरिये से कदम उठाएं। आज की गिरावट ने एक बार फिर यह याद दिला दिया कि बाजार में कोई भी तेजी हमेशा के लिए नहीं होती। चांदी की चमक फिलहाल बरकरार है, लेकिन इसके साथ जुड़ा जोखिम भी उतना ही चमकदार है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि चांदी दोबारा संभलती है या यह गिरावट किसी बड़े बदलाव का संकेत साबित होती है। निवेशकों के लिए यह वक्त जोश से ज्यादा होश का है।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *