जेएनयू में वन्यजीव संरक्षण के लिए नई सोसाइटी का गठन
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए एनिमल वेलफेयर सोसाइटी का गठन किया है। यह सोसाइटी विशेष रूप से उन प्रजातियों के लिए काम करेगी जो विलुप्त होने के कगार पर हैं। जेएनयू प्रशासन का कहना है कि किसी भी भारतीय विश्वविद्यालय में इस तरह का यह पहला वैधानिक निकाय होगा। इस कदम का उद्देश्य न केवल विश्वविद्यालय परिसर में बल्कि व्यापक स्तर पर भी जैव विविधता और वन्यजीव कल्याण को बढ़ावा देना है।
सोसाइटी की संरचना
एनिमल वेलफेयर सोसाइटी की अध्यक्षता प्रोफेसर पीयूष प्रताप सिंह करेंगे, जो वर्तमान में जेएनयू एनिमल बर्थ कंट्रोल कमेटी के प्रमुख हैं। इस सोसाइटी में फैकल्टी, स्टाफ और छात्रों के प्रतिनिधियों के अलावा वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र की जानी-मानी कार्यकर्ता गौरी मौलेखी को बाहरी सलाहकार के रूप में शामिल किया गया है।
मुख्य उद्देश्य

सोसाइटी का मुख्य फोकस उन वन्यजीवों की सुरक्षा और देखभाल पर होगा जो धीरे-धीरे गायब हो रहे हैं। इसमें रेप्टाइल, पॉर्क्यूपाइन, नीलगाय, सियार और लोमड़ी जैसी प्रजातियां शामिल होंगी। इन जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय परिसर में फेंसिंग लगाई जाएगी, ताकि वे बाहर न निकल पाएं और दुर्घटनाओं से बच सकें।
सुविधाएं और गतिविधियां
परिसर में फीडिंग जोन बनाए जाएंगे, जहां इन जानवरों को सुरक्षित तरीके से भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
घायल जानवरों के लिए तत्काल प्राथमिक उपचार की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए एक विशेष टीम हमेशा तैयार रहेगी।
छात्रों और निवासियों को वन्यजीव संरक्षण के बारे में जागरूक करने के लिए सेमिनार, वर्कशॉप और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इच्छुक छात्रों को इस क्षेत्र में अनुभव दिलाने के लिए इंटर्नशिप के अवसर भी दिए जाएंगे।
शिक्षा और जागरूकता से जोड़ना
जेएनयू प्रशासन का मानना है कि यह पहल सिर्फ कक्षाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाएगा। विश्वविद्यालय के निवासियों को भी इस प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा ताकि वे वन्यजीवों की जानकारी और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी समझ सकें।
महत्व और प्रभाव
इस सोसाइटी के गठन से न केवल विश्वविद्यालय परिसर के वन्यजीवों की रक्षा होगी, बल्कि छात्रों में भी पर्यावरण और जैव विविधता के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी। यह कदम आने वाले समय में अन्य विश्वविद्यालयों और संस्थानों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकता है।
जेएनयू की यह पहल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि शिक्षा संस्थान केवल अकादमिक विकास तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे प्रकृति और जीव-जंतुओं की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
कुल मिलाकर, जेएनयू की एनिमल वेलफेयर सोसाइटी एक ऐसी पहल है जो आने वाले वर्षों में वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकती है।






