महाराष्ट्र: अनिल देशमुख पर हमले का दावा झूठा, पुलिस ने जांच बंद की
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया है। पूर्व गृह मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता अनिल देशमुख पर पिछले साल कथित रूप से पत्थरबाजी होने का मामला पूरी तरह से झूठा निकला है। पुलिस ने इस पूरे मामले की जांच बंद कर दी है और अदालत में अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दी है।
क्या था मामला?
पिछले साल नागपुर जिले के कातोल इलाके में एक शिकायत दर्ज की गई थी। शिकायत में कहा गया था कि अनिल देशमुख पर कुछ अज्ञात लोगों ने पत्थर से हमला किया। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि जब अनिल देशमुख किसी कार्यक्रम में जा रहे थे, तभी अचानक उन पर पत्थर फेंका गया। यह खबर उस समय सुर्खियों में भी आई थी और इसे राजनीतिक साजिश से जोड़कर देखा गया था।
पुलिस की जांच में क्या सामने आया?
नागपुर ग्रामीण पुलिस ने पूरे मामले की गहराई से जांच की। इसके लिए घटनास्थल का निरीक्षण किया गया, गवाहों से पूछताछ हुई और फोरेंसिक जांच भी कराई गई।
पुलिस की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के पीछे कोई सबूत नहीं है। न तो किसी पत्थरबाजी का प्रमाण मिला और न ही कोई ऐसा व्यक्ति मिला जिसने घटना को अपनी आंखों से देखा हो।
फोरेंसिक जांच और बयान दर्ज करने के बाद पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि यह घटना कभी घटी ही नहीं।
अदालत में रिपोर्ट दाखिल
नागपुर ग्रामीण पुलिस ने अपनी जांच पूरी करने के बाद कातोल की अदालत में “बी सारांश रिपोर्ट” (B Summary Report) जमा की। यह रिपोर्ट तब दाखिल की जाती है जब दर्ज की गई शिकायत फर्जी या झूठी साबित होती है।

पुलिस ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि शिकायतकर्ता के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराने पर कार्रवाई की जाए। यानी अब शिकायत करने वाले व्यक्ति पर ही मुकदमा चल सकता है।
अनिल देशमुख कौन हैं?
अनिल देशमुख महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता हैं और लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वे महाराष्ट्र सरकार में गृहमंत्री भी रह चुके हैं। उनका नाम पहले भी कई बार विवादों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के कारण सुर्खियों में रहा है।
इस पूरे मामले का असर
राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर कई तरह की चर्चाएँ हो रही हैं। कुछ लोग इसे अनिल देशमुख की छवि खराब करने की कोशिश बता रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग पुलिस की निष्पक्ष जांच की तारीफ कर रहे हैं।
फिलहाल अदालत को तय करना है कि शिकायतकर्ता पर मुकदमा चलाया जाए या नहीं। लेकिन इतना साफ है कि पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख पर पत्थरबाजी का दावा पूरी तरह से झूठा निकला है।
यह खबर अब साफ हो गई है कि यह हमला कभी हुआ ही नहीं था और पुलिस ने इसे फर्जी मामला करार दे दिया है।






