पिथौरागढ़ मे कुमाऊनी फीचर फिल्म “मेरी माटी मेरो पहाड़” की गूंज : उत्तराखंडी सिनेमा का दिखा एक नया रूप !
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद में इन दिनों कुमाऊनी सिनेमा की एक नई और बहुप्रतीक्षित फिल्म “मेरी माटी मेरो पहाड़” की शूटिंग जोर-शोर से चल रही है। पंचाचूली पिक्चर्स के बैनर तले बन रही यह फिल्म न केवल एक मनोरंजक सिनेमाई प्रस्तुति है, बल्कि पहाड़ की संस्कृति, परंपराओं और जड़ों से जुड़ी भावनाओं को बड़े पर्दे पर जीवंत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी है। फिल्म की शूटिंग इन दिनों मड़मानले गाँव, कनालीछीना और आसपास के कई रमणीय स्थलों पर की जा रही है, जहां प्राकृतिक सुंदरता और पारंपरिक पहाड़ी परिवेश फिल्म की आत्मा को सशक्त बना रहे हैं।

निर्माण टीम द्वारा चुने गए लोकेशन फिल्म की कहानी के साथ गहराई से जुड़े हुए हैं। हरे-भरे जंगल, पहाड़ी घर, शांत वातावरण और स्थानीय जीवनशैली को कैमरे में कैद कर फिल्म को वास्तविकता के करीब लाने की कोशिश की जा रही है। शूटिंग का अगला चरण दिल्ली और गाजियाबाद में प्रस्तावित है, जहां फिल्म के कुछ महत्वपूर्ण दृश्यों को फिल्माया जाएगा। इससे कहानी में एक व्यापक सामाजिक और आधुनिक दृष्टिकोण भी जोड़ा जाएगा।
फिल्म का निर्देशन सुरेन्दर बावरा कर रहे हैं, जो संवेदनशील और यथार्थवादी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। वहीं, डी.ओ.पी. रोहन कापड़ी अपनी सिनेमैटोग्राफी के माध्यम से पहाड़ की सुंदरता और भावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में जुटे हुए हैं। निर्देशन और कैमरा कार्य का यह संयोजन फिल्म को तकनीकी और कलात्मक रूप से मजबूत बना रहा है।

फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे देवा धामी पहले भी “केदार” और “छोलियार” जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीत चुके हैं। इस फिल्म में उनके साथ मुख्य अभिनेत्री के रूप में भावना कांडपाल नजर आएंगी, जो कहानी में भावनात्मक गहराई और सहजता लेकर आती हैं। इसके अलावा हेमराज बिष्ट ,मीनू पुनेड़ा बडोनी, यशवंत मेहर, जनार्दन उप्रेती, मैगी, , विशाल और कई अन्य स्थानीय कलाकार भी फिल्म में अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। खास बात यह है कि फिल्म में स्थानीय प्रतिभाओं को विशेष स्थान दिया गया है, जिससे क्षेत्रीय कला और कलाकारों को प्रोत्साहन मिल रहा है।

फिल्म की कहानी पहाड़ की मिट्टी, कुमाऊनी भाषा और अपनी जड़ों से जुड़े रहने के महत्व को केंद्र में रखकर बुनी गई है। यह कहानी केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को एक गहरा संदेश भी देती है। आज के समय में जब युवा तेजी से अपने गांव और परंपराओं से दूर हो रहे हैं, यह फिल्म उन्हें अपनी पहचान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने के लिए प्रेरित करती है। यह दर्शाती है कि अपनी मातृभाषा और संस्कृति से जुड़ाव व्यक्ति के आत्मसम्मान को मजबूत बनाता है।

फिल्म के संगीत पक्ष को लेकर भी दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, फिल्म के गीत बेहद मधुर और भावनात्मक हैं, जिन्हें उत्तराखंड के स्थानीय कलाकारों ने अपनी आवाज दी है। संगीतकार सतेंद्र परंडिया ने फिल्म के माहौल और भावनाओं के अनुरूप संगीत तैयार किया है, जो कहानी को और प्रभावी बनाने में सहायक साबित होगा।

वर्तमान में फिल्म की शूटिंग का कार्य अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और इसमें लगभग एक महीने का समय और लगने की संभावना है। इसके बाद पोस्ट-प्रोडक्शन का कार्य शुरू किया जाएगा, जिसमें संपादन, साउंड डिजाइन और अन्य तकनीकी प्रक्रियाएं शामिल होंगी। निर्माण टीम को उम्मीद है कि सभी कार्य निर्धारित समय पर पूरे कर लिए जाएंगे और फिल्म सितंबर महीने में रिलीज के लिए तैयार हो जाएगी।

फिल्म के निर्माताओं का मानना है कि “मेरी माटी मेरो पहाड़” केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आत्मा को दर्शाने वाला एक सशक्त माध्यम है। इसमें पहाड़ की संस्कृति, लोकजीवन, भाषा और आत्मसम्मान को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। उनका विश्वास है कि यह फिल्म दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ-साथ उन्हें अपनी जड़ों के प्रति जागरूक और गर्वित भी बनाएगी।

कुल मिलाकर, “मेरी माटी मेरो पहाड़” कुमाऊनी सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। यह फिल्म न केवल क्षेत्रीय सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रही है, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को देशभर के दर्शकों तक पहुंचाने का भी माध्यम बन रही है। अब देखना यह होगा कि रिलीज के बाद यह फिल्म दर्शकों के दिलों में कितनी गहरी छाप छोड़ती है। भरत प्रजापति ने भी प्रोडक्शन हेड के रूप मैं बहुत सराहनीय काम किया है






