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बागेश्वर—विकास -सीएम धामी की सौगातों से गूँजा बागेश्वर—विकास, संस्कृति और उम्मीदों का नया पर्व

बागेश्वर—विकास – बागेश्वर की सर्द हवा और देवभूमि की पावन मिट्टी उस दिन जैसे कोई नई कथा कहने के लिए बेचैन थीं। कपकोट के केदारेश्वर मैदान में उमड़ी भीड़ किसी राजनीति की वजह से नहीं, बल्कि उस उम्मीद का स्वागत करने के लिए जुटी थी, जो लंबे समय से पहाड़ की घाटियों में पलती रही है। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जब अपने दो दिवसीय बागेश्वर दौरे के दूसरे दिन मंच पर पहुँचे, तो नारों, तालियों और फूल-मालाओं की गूंज ने पूरे वातावरण को उत्सव में बदल दिया। बागेश्वर—विकास

मुख्यमंत्री ने बागेश्वर में 108 करोड़ रुपये की 42 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें से 62 करोड़ की 24 योजनाएँ अब सीधे जनता के जीवन में बदलाव लाने को तैयार हैं, जबकि 46 करोड़ की 18 नई परियोजनाएँ आने वाले वर्षों में विकास की मजबूत राह बनाएँगी। बागेश्वर—विकास

कार्यक्रम की शुरुआत स्कूली बच्चों के रंगारंग प्रस्तुतियों से हुई। उनके हँसते चेहरे और सुरों पर थिरकते कदम जैसे यह संदेश देते दिखे कि नया उत्तराखण्ड अब “युवा आकांक्षाओं” की भूमि बनेगा।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री धामी ने जनसमुदाय की भारी उपस्थिति की ओर इशारा करते हुए कहा—
“यह प्यार और आशीर्वाद बताता है कि हमारा प्रदेश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।”
उन्होंने गरीबों, महिलाओं और युवाओं के लिए चलाई जा रहीं कल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार “वादों से नहीं, काम से” भरोसा जीत रही है। बागेश्वर—विकास

उन्होंने बताया कि मानस खंड माला परियोजना के तहत क्षेत्र के पौराणिक स्थलों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है—यह केवल संरचनाओं को सुधारने का काम नहीं, बल्कि लोक आस्था को नया जीवन देने का प्रयास है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शीतकालीन पर्यटन की पहल पूरे वर्ष रोजगार के अवसर पैदा करेगी। जहाँ कभी छह माह बाजारों में सन्नाटा छा जाता था, वहीं अब बारहों महीने नए मौके और गतिविधियाँ देखने को मिलेंगी। बागेश्वर—विकास

बागेश्वर की ताम्र शिल्पकला को नई साँस

राज्य सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट–वन प्रोडक्ट’ नीति ने बागेश्वर की प्राचीन ताम्र (कॉपपर) कला में फिर जान डाल दी है। पहाड़ के वे कारीगर, जो पीढ़ियों से हथौड़ी की ताल में कला गढ़ते आए हैं, अब अपने उत्पाद देशभर में भेज पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उनसे मुलाकात की, उनकी समस्याएँ सुनीं, और आश्वस्त किया कि सरकार उनकी कला को “राष्ट्रीय पहचान” दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। बागेश्वर—विकास


बागेश्वर रेल लाइन—सपना अब और करीब

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि बागेश्वर रेल लाइन का सर्वे पूरा हो चुका है। यह सूचना सुनते ही मैदान में मौजूद हर चेहरे पर उम्मीद की चमक दिखाई दी।
सरयू और गोमती नदियों के संरक्षण कार्य भी तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं—ये नदियाँ पहाड़ की संस्कृति और जीवन का आधार हैं। बागेश्वर—विकास

गरुड़ अस्पताल के उच्चीकरण की घोषणा ने दूर-दराज़ के लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की राह खोल दी।


महिलाओं और सहकारिता समूहों को नई शक्ति

सरकार ने महिला और स्वायत सहकारिता समूहों को करोड़ों की वित्तीय सहायता प्रदान की। चेक प्राप्त करते हुए कई महिलाओं की आँखों में गर्व और आत्मनिर्भरता की चमक स्पष्ट दिख रही थी। यह रकम उनके लिए सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी थी। बागेश्वर—विकास

सहायता राशि इस प्रकार रही

जय गोलू देवता स्वयं सहायता समूह – ₹5 लाख

संकल्प  स्वयं सहकारिता समूह (हर्षिला) – ₹3 करोड़ 23 लाख

ऊर्जा स्वयं  सहकारिता सीएलएफ – ₹22 लाख 50 हजार

संवाद महिला स्वयं सहायता समूह – ₹5 लाख

विभागीय स्टॉलों में उत्साह

कृषि, उद्यान, रेशम, डेयरी, पशुपालन, ग्राम्य विकास और उद्योग विभागों के स्टॉलों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। किसानों ने नई तकनीक को नज़दीक से परखा और योजनाओं के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने स्वयं स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए कहा “आपकी यह कला ही उत्तराखण्ड की असली पूँजी है।” बागेश्वर—विकास

कपकोट का यह जनसभा कार्यक्रम सिर्फ सरकारी औपचारिकता नहीं था यह उन अरमानों का पर्व था जो पहाड़ के हर घर में पलते हैं बेहतर सड़कों की चाह, स्थायी रोजगार की उम्मीद, बच्चों की मजबूत शिक्षा और अपनी लोक संस्कृति को संजोए रखने का सपना। बागेश्वर—विकास

आज उत्तराखण्ड की वादियाँ एक ही संदेश दे रही हैं
“परिवर्तन की शुरुआत हो चुकी है… और पहाड़ अब अपनी नई पहचान गढ़ने को तैयार है।”

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