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The Success Story of Suresh Chandra Pandey – फर्श से अर्श तक: सुरेश चन्द्र पांडे की संघर्ष, समर्पण और सफलता की अद्भुत यात्रा

The Success Story of Suresh Chandra Pandey– एक पहाड़ी पुत्र जिसने मेहनत, और शक्ति से उत्तराखंड को दुनिया के मानचित्र पर रोशन किया उत्तराखंड की शांत वादियों में बहती शीतल हवा जब किसी मन में हौसले की चिंगारी सुलगाती है, तो वही चिंगारी एक दिन पूरा आसमान रोशन कर देती है। अल्मोड़ा जिले के छोटे से गाँव बरतोली में जन्मे सुरेश चन्द्र पांडे ऐसी ही प्रेरणादायक शख्सियत हैं- जिन्होंने अभावों से भरे बचपन को पीछे छोड़, अपने हौसले, मेहनत और निष्ठा की बदौलत न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे उत्तराखंड का नाम देश-विदेश में ऊँचा किया।

आज वे देश की अग्रणी पाइपलाइन सर्वे कंपनी एस. के. पी. प्रोजेक्ट प्रा. लिमिटेड के संस्थापक चेयरमैन और एमडी हैं। करीब 2000 से अधिक कर्मचारियों को रोजगार देने वाली यह कंपनी भारत की प्रमुख संस्थाओं के साथ-साथ विदेशों में भी कई बड़े प्रोजेक्ट संभाल रही है। पर इस सफलता के पीछे छिपा संघर्ष उतना ही अद्भुत और प्रेरक है। The Success Story of Suresh Chandra Pandey

कठिन बचपन, मजबूत इरादे The Success Story of Suresh Chandra Pandey

सुरेश जी एक साधारण किसान परिवार मैं पले-बढे। घर में छह भाई-बहन, आर्थिक अभाव, सीमित साधन – लेकिन सपने सीमित नहीं। पढ़ाई जारी रखना किसी चुनौती से कम नहीं था, फिर भी वे डटे रहे। पर्वतीय कठिनाइयों ने उनका मन नहीं तोड़ा, बल्कि उन्हें और मजबूत बनाया।

बड़ोदरा की ओर पहला कदम –  संघर्षों की कहानी The Success Story of Suresh Chandra Pandey

1989 में वे अपने भाई के पास गुजरात के बड़ोदरा पहुँचे । परंतु दो माह बाद भाई की यूनिट का तबादला हो गया। सुरेश जी अकेले पड़ गए न नौकरी, न ठिकाना |

संयोग से सड़क पर एक सरदार जी के खराब स्कूटर को ठीक करते हुए उनकी मुलाकात जीवन बदल दियाँ । यही मुलाकात उन्हें ONGC के पाइपलाइन सर्वे कार्य तक ले गई, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। काम सीखते गए, आगे बढ़ते गए। उनकी मेहनत और लगन देखकर अधिकारी भी प्रभावित हुए। जल्द ही उन्हें सर्वे के महत्वपूर्णं कार्य सौंपे जाने लगे।

1997 –भाग्य के द्वार खुलने की शुरुआत The Success Story of Suresh Chandra Pandey

बिटिया नेहा के जन्म के साथ ही उनका भाग्य भी बदलने लगा। ONGC से पहला बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिला। साइकिल से स्कूटर और फिर स्कूटर से कार तक सफर आगे बढ़ा। 1998 में परिवार को उत्तराखंड से बड़ोदरा ले आए। 1999 में दूसरा बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिला और 2000

उन्होंने अपनी खुद की कंपनी – एस. के. पी. प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा ।

आज की एस. के. पी. – तकनीक और गुणवत्ता का विश्वसनीय नाम आज एस. के. पी. देश की अग्रणी पाइपलाइन सर्वे कंपनी है, जो-

• पाइपलाइन सर्वे

• तेल और गैस अन्वेषण

• भूकंप 

• GIS मैपिंग

• भू-तकनीकी जांच भूमि

• अधिग्रहण अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट

32 से अधिक कार्यालय, 2000 स्थायी कर्मचारी, जिनमें 50% कर्मचारी उत्तराखंड के हैं,

यह अपने आप में उनके प्रदेश प्रेम और युवाओं के प्रति समर्पण का प्रमाण है।कांडला से गोरखपुर पाइपलाइन जैसे बड़े प्रोजेक्ट आज उनका नेतृत्व देख सफलता पा रहे हैं।

सादगी, सेवा और मानवीय मूल्य – उनकी असली पहचान The Success Story of Suresh Chandra Pandey

अपनी अपार सफलता के बावजूद सुरेश जी का जीवन बेहद सरल है।वे हर प्रोजेक्ट का निरीक्षण स्वयं करते हैं, हर कर्मचारी को सम्मान देते हैं, और सामाजिक कार्यों में हमेशा आगे रहते हैं।

उन्होंने-

• वृद्धाश्रमों की सहायता

• उत्तराखंड के स्कूलों की मदद खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा

• योग प्रचार

• नेत्र चिकित्सक कैंप

• गरीबों की शिक्षा सहायता

 जैसे कई कार्यों में उदार योगदान दिया है।

समाज और युवाओं के लिए प्रेरणा The Success Story of Suresh Chandra Pandey

एक साधारण पहाड़ी गाँव से निकलकर देश के अग्रणी उद्यमियों में स्थान पाना आसान नहीं ।

पर सुरेश चन्द्र पांडे ने दिखा दिया कि- “अभाव मंज़िल नहीं रोकते, अगर इरादे मज़बूत हों।”

उत्तराखंड की मिट्टी का सच्चा सपूत The Success Story of Suresh Chandra Pandey

आज सुरेश चन्द्र पांडे सिर्फ एक सफल व्यवसायी नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं- एक ऐसा उदाहरण, जो हर युवा को बताता है कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, अगर हौसला हो तो फर्श से अर्श तक का सफर भी संभव है। उत्तराखंड की मिट्टी के इस सच्चे सपूत ने सिद्ध किया है कि सपने किसी के भी हो सकते हैं – पर उन्हें सच करने का साहस बहुत कम लोगों में होता है। और सुरेश चन्द्र पांडे उन्हीं विरले लोगों में से हैं। The Success Story of Suresh Chandra Pandey

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