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इंडिगो उड़ान संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने त्वरित सुनवाई से इनकार किया, जबकि याचिका में इसे मानवीय संकट बताकर तुरंत हस्तक्षेप की मांग की गई।

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो द्वारा बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द किए जाने को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से मना कर दिया। कोर्ट का कहना है कि सरकार पहले ही इस पूरे मामले पर ध्यान दे रही है और जरूरी कदम उठाए जा चुके हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्वीकार किया कि लाखों यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है और कई लोगों के महत्वपूर्ण काम भी रुक गए हैं, लेकिन जब केंद्र सरकार स्थिति पर काम कर रही है तो उसे अपना काम करने दिया जाए। उन्होंने कहा कि अदालत एयरलाइन नहीं चला सकती।

इंडिगो का यह संकट लगातार छठे दिन भी जारी है। आज भी 200 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गईं और कई उड़ानें घंटेभर से ज्यादा देरी से चल रही हैं। दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और बेंगलुरु सहित देश भर के हवाई अड्डों पर यात्रियों को अफरा-तफरी और लंबा इंतजार झेलना पड़ रहा है।

इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के वकील नरेंद्र मिश्रा ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर इस पूरे मामले में स्वतः संज्ञान लेकर तात्कालिक हस्तक्षेप की मांग की थी। उनकी याचिका में कहा गया कि पिछले कुछ दिनों में इंडिगो ने 1,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दीं, जिससे लाखों यात्री एयरपोर्ट्स पर फंस गए और हालात मानवीय संकट जैसे बन गए।

मिश्रा ने इसे यात्रियों के मौलिक अधिकारों—विशेषकर अनुच्छेद 21 में मिले जीवन और गरिमा के अधिकार—का घोर उल्लंघन बताया और कोर्ट से तुरंत दखल देने की अपील की। याचिका में यह भी बताया गया कि छह बड़े महानगरों में इंडिगो की ऑन-टाइम परफॉर्मेंस घटकर सिर्फ 8.5 प्रतिशत रह गई। बुजुर्ग, बच्चे, दिव्यांग और बीमार यात्री घंटों तक एयरपोर्ट्स पर बिना किसी सुविधा के अटके रहे।

एयरपोर्ट्स पर भोजन, पानी, विश्राम, कपड़े, दवाइयाँ और ठहरने जैसी बुनियादी जरूरतें तक उपलब्ध नहीं थीं। स्वयं एयरलाइन ने स्वीकार किया था कि यात्रियों के लिए पर्याप्त व्यवस्था उनके पास नहीं थी। कई जगहों पर तुरंत चिकित्सा जरूरतों की भी अनदेखी की गई।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि इस मामले को पीआईएल के रूप में तुरंत स्वीकार कर विशेष बेंच गठित की जाए, इंडिगो को मनमाने ढंग से उड़ानें रद्द करने से रोका जाए, सेवाओं को सुरक्षित तरीके से सामान्य किया जाए और सभी फंसे यात्रियों को बिना किसी शुल्क के वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

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