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दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस-वे पर सफर होगा महंगा, बस के टिकट से ज़्यादा पड़ेगा कार का टोल टैक्स

देहरादून- दिल्ली से देहरादून तक सफर को तेज और आसान बनाने वाले दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इस बार वजह है एक्सप्रेसवे पर लगने वाला टोल टैक्स। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से टोल टैक्स की संभावित दरों का एक प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस टोल टैक्स के मुताबिक अगर बस से टिकट लेकर यात्रा की जाएगी तो वो कार से यात्रा करने से सस्ती पड़ेगी, क्योंकि कार का टोल टैक्स ही इतना वसूला जा रहा है, जितने में पूरी यात्रा हो जाए। कार में टोल टैक्स के अलावा पेट्रोल का खर्च अलग लगेगा। इसलिए टोल टैक्स की दरों का विरोध भी शुरू हो गया है। हालांकि यह प्रस्ताव तब लागू किया जाएगा, जब पूरा एक्सप्रेसवे आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।

212 किलोमीटर की दूरी ढाई घंटे में
दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे करीब 212 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है। यह दिल्ली के अक्षरधाम इलाके से शुरू होकर बागपत, शामली, सहारनपुर होते हुए देहरादून तक जाएगा। अभी इसका केवल अक्षरधाम से बागपत तक का लगभग 32 किलोमीटर हिस्सा ट्रायल के तौर पर खोला गया है। इस हिस्से में फिलहाल किसी तरह का टोल नहीं लिया जा रहा है।
पूरी परियोजना में करीब पांच टोल प्लाजा बनाए जाने की योजना है। इन्हीं टोल प्लाजा के आधार पर टोल टैक्स की संभावित दरें तय की गई हैं। एनएचएआई की ओर से साफ किया गया है कि ये दरें अभी प्रस्तावित हैं और अंतिम रूप से एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने के बाद ही लागू होंगी।

670 रुपये टोल कार का टोल टैक्स
प्रस्ताव के अनुसार अगर कोई कार चालक दिल्ली से देहरादून तक पूरे एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करता है तो उसे लगभग 670 रुपये टोल देना पड़ सकता है। हल्के वाणिज्यिक वाहनों के लिए यह राशि करीब 1085 रुपये और बस या भारी वाहनों के लिए लगभग 2275 रुपये हो सकती है। अलग अलग पड़ावों जैसे काठा, रसूलपुर और गणेशपुर तक जाने पर टोल की राशि इससे कम होगी।
एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि टोल भुगतान की मुख्य व्यवस्था फास्टैग के जरिए होगी। हालांकि जरूरत पड़ने पर कैश भुगतान का विकल्प भी उपलब्ध रह सकता है। फास्टैग से भुगतान करने पर वाहन चालकों को रुकना नहीं पड़ेगा और यात्रा समय और भी कम हो जाएगा।
इस एक्सप्रेसवे के खुलने से दिल्ली से देहरादून का सफर करीब ढाई से तीन घंटे में पूरा होने की उम्मीद है। अभी यही सफर पुरानी सड़कों से करने में छह से सात घंटे तक लग जाते हैं। ऐसे में टोल टैक्स बढ़ने के बावजूद लोग समय की बचत और आरामदायक यात्रा को प्राथमिकता दे सकते हैं।

अधूरा निर्माण कब होगा पूरा ?
हालांकि निर्माण की रफ्तार को लेकर जमीनी हकीकत कुछ और कहानी कहती है। बागपत से सहारनपुर तक एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में अभी भी काम अधूरा है। पहले इसे दिसंबर 2024 तक शुरू करने की बात कही गई थी, फिर इसे दिसंबर 2025 तक चालू करने का ऐलान किया, लेकिन
अब 2026 आने वाला है और निर्माण कार्य अधूरा है। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि यह दावा फिलहाल कागजों तक ही सीमित दिखता है।
मेरठ बागपत नेशनल हाईवे पर अग्रवाल मंडी टटीरी, मुजफ्फरनगर मार्ग पर बिजरौल समेत कई जगहों पर इंटरचेंज का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है। अग्रवाल मंडी टटीरी में अंडरपास का काम काफी बाकी है। फ्लाईओवर को जोड़ने का काम, ढलान की सुरक्षा, सर्विस रोड और लाइटिंग जैसे जरूरी कार्य भी अधूरे हैं। मवीकलां में मुख्य टोल बूथ का निर्माण भी अभी बाकी है। इन सभी कामों को पूरा करने में कम से कम तीन महीने से ज्यादा का समय लग सकता है।

कई जगह टूट गई रोड
इसके अलावा एक्सप्रेसवे की सड़क कई जगहों से पहले ही टूट चुकी है। सूजरा, दुड़भा, पाली, नौरोजपुर गुर्जर, बड़ौत और टीकरी के पास सड़क की हालत खराब है। कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत उखाड़ दी गई है और मिट्टी का कटान भी हुआ है। जब तक वहां दोबारा मिट्टी भरकर मजबूती नहीं दी जाती, तब तक सड़क को पूरी तरह ठीक करना मुश्किल है।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक नरेंद्र सिंह का कहना है कि एक्सप्रेसवे के कुछ काम अभी बाकी हैं, लेकिन उन्हें जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। काम में तेजी लाई गई है और कोशिश की जा रही है कि एक्सप्रेसवे को तय समय के भीतर चालू किया जा सके।
कुल मिलाकर दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे लोगों के लिए बड़ी उम्मीद लेकर आया है। यह न सिर्फ सफर का समय घटाएगा, बल्कि पहाड़ों तक पहुंच को भी आसान बनाएगा। हालांकि टोल टैक्स, अधूरे निर्माण और सड़क की गुणवत्ता जैसे सवाल अभी भी लोगों के मन में हैं। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि यह एक्सप्रेसवे उम्मीदों पर कितना खरा उतर पाता है।

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