कारोबार करना होगा आसान, रिफार्म्स के अगले दौर की शुरुआत करेगी मोदी सरकार
नई दिल्ली- सरकारी प्रशासन में लालफीताशाही से अगर आपका सामना होता रहा है तो जल्द ही ये बीते दिनों की बात हो जाएगी। अगर कोई कारोबारी नया बिजनेस लगाना चाहेगा, कोई युवा स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करे या कोई किसान किसी सहायता योजना के लिए पात्र हो, तो उसे फॉर्म भरने और प्रमाणपत्र जुटाने के बोझ में नहीं फंसना पड़ेगा। मोदी सरकार रिफॉर्म्स यानी सुधारों के अगले दौर की शुरुआत करने वाली है। पहले दौर में मोदी सरकार ने जिस तरह दस्तावेजों को सेल्फ अटेस्टेट यानी खुद हस्ताक्षर करके प्रमाणित करने की छूट दी थी, उसका दुरुपयोग नहीं हुआ, इसी तर्ज पर अब और कई नए सुधार सरकार करने जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए संसदीय दल की बैठक में इसका ऐलान किया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब सुधारों की जिस पटरी पर दौड़ रहा है, वह पहले से कहीं अधिक तेज, पारदर्शी और आम नागरिक के जीवन से सीधी जुड़ी होगी। प्रधानमंत्री ने इसे रिफॉर्म एक्सप्रेस का दौर बताया, एक ऐसा समय जब सुधार सिर्फ आर्थिक नीतियों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी की परेशानियों को दूर करने का माध्यम बनेंगे।
बैठक का माहौल गंभीर और उत्साहपूर्ण था। प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि सरकार के सभी प्रयास अब नागरिक केंद्रित होंगे। पिछली कई दशकों से लोगों की शिकायतें लगभग एक जैसी थीं कि सरकारी प्रक्रियाएं कठिन हैं, कागजी कार्यवाही बहुत है, और एक छोटी सी सेवा प्राप्त करने के लिए भी बार बार फॉर्म भरने और कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि यह पुरानी व्यवस्था अब देश की प्रगति में बाधा बन चुकी है और इसे पूरी तरह बदलने का समय आ गया है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया कि बार बार एक ही डाटा मांगने की पुरानी संस्कृति को समाप्त करना होगा। कई विभाग एक ही नागरिक से एक जैसी जानकारी अलग अलग फॉर्म में मांगते हैं, जिससे समय, धन और ऊर्जा तीनों का नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि जिस देश ने डिजिटल इंडिया अभियान को सफल बनाया है, वहां यह समस्या अब स्वीकार्य नहीं हो सकती। स्वचालित डाटा सत्यापन, साझा सरकारी डेटाबेस और डिजिटाइज्ड रिकॉर्ड प्रणाली के जरिए आने वाले वर्षों में नागरिकों से बार बार कागजी प्रमाण लेने की आवश्यकता लगभग समाप्त कर दी जाएगी।
प्रधानमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि सरकार ने दस वर्ष पहले सेल्फ सर्टिफिकेशन की व्यवस्था शुरू की थी, जिसमें नागरिकों को अपने दस्तावेज स्वयं सत्यापित करने की अनुमति दी गई। इस कदम का विरोध भी हुआ था, लेकिन दस वर्षों में इसका कोई बड़े पैमाने पर दुरुपयोग सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि यह प्रमाण है कि जब सरकार जनता पर भरोसा करती है तो जनता भी उस भरोसे को निभाती है। आने वाले सुधार भी इसी सिद्धांत पर आधारित होंगे कि नागरिक को संदेह की दृष्टि से नहीं, बल्कि सहभागी की दृष्टि से देखा जाए।
बैठक में प्रधानमंत्री ने सांसदों को यह जिम्मेदारी भी सौपी कि वे अपने क्षेत्रों की असली समस्याओं को पहचानें और उन्हें सरकार तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण कभी दूर बैठे नहीं हो सकता, वह जमीन पर अनुभव किए गए दर्द, कठिनाइयों और अपेक्षाओं से जन्म लेना चाहिए। यदि सांसद वास्तविक समस्याओं को ईमानदारी से सामने लाते हैं तो सुधारों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।
अब इन सुधारों पर सरकार का फोकस
सरकारी विभागों के बीच साझा डाटा प्रणाली ताकि नागरिकों से बार बार कागज न मांगे जाएं.
कम फॉर्म, छोटे फॉर्म और अधिकांश सेवाओं के लिए केवल ऑनलाइन आवेदन.
पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र, पेंशन, राशन कार्ड, छात्रवृत्ति, बिजली कनेक्शन, भूमि अभिलेख जैसी सेवाओं को एकीकृत डिजिटल पोर्टल पर लाना.
फील्ड विजिट और आफलाइन सत्यापन को कम कर डिजिटल प्रमाणन को प्राथमिकता देना.
नागरिकों के लिए मोबाइल आधारित सेवाएं, जिसमें शिकायत निवारण और आवेदन की स्थिति रियल टाइम में मिल सके.
गांव और दूरस्थ क्षेत्रों में जन सेवा केंद्रों का विस्तार ताकि हर घर तक सरकारी सेवा पहुंच सके.
उन योजनाओं की समीक्षा जो जनता के जीवन में वास्तविक सुधार लाने में सफल नहीं रहीं.
एनडीए बैठक में यह भी स्पष्ट संदेश दिया गया कि सुधारों का उद्देश्य केवल शासन को कुशल बनाना नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन को सरल करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक सामान्य व्यक्ति को सरकारी प्रक्रिया के कारण अपने सपनों और प्रयासों में रुकावट नहीं आनी चाहिए। यदि कोई उद्यमी व्यवसाय शुरू करना चाहे, कोई युवा स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करे या कोई किसान किसी सहायता योजना के लिए पात्र हो, तो उसे फॉर्म भरने और प्रमाणपत्र जुटाने के बोझ में नहीं फंसना चाहिए।
प्रधानमंत्री के भाषण में एक भावनात्मक पहलू भी था। उन्होंने कहा कि देश का विकास केवल निवेश और आंकड़ों से नहीं होता, बल्कि लोगों की परेशानियों को कम करने से होता है। हर परिवार जब महसूस करेगा कि सरकार उसके साथ है, उसकी यात्रा को सरल बना रही है, तभी असली प्रगति होगी। यहीं से रिफॉर्म एक्सप्रेस अपने गंतव्य की ओर बढ़ती है.
यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह बताती है कि आने वाले महीनों में सरकार किस दिशा में काम करेगी। यह स्पष्ट है कि सुधार अब दस्तावेजों के पन्नों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में दिखाई देंगे। जब फॉर्म छोटे होंगे, बार बार कागज नहीं मांगे जाएंगे, सेवाएं घर तक पहुंचेंगी, और नीति निर्माण जनता की वास्तविक कठिनाइयों से प्रेरित होगा, तब भारत सचमुच आसान जीवन वाली अर्थव्यवस्था में बदल सकेगा।






